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केरल के दुर्योधन मंदिर में गिफ्ट की जाती है विदेशी शराब, भक्त ने चढ़ाई 101 ओल्ड मंक

केरल के कोल्लम में दुर्योधन का मंदिर है। इस मंदिर में शराब चढ़ाने की मान्यता है। शुक्रवार को मंदिर का वार्षिकोत्सव था। इस मौके पर एक एनआरआई ने मंदिर में 101 ओल्ड मंक रम की बोतलें चढ़ाईं।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 19 Mar 2019, 8:08 pm

हाइलाइट्स

  • आप में अजूबा है केरल के कोल्लम में दुर्योधन मंदिर, भक्त चढ़ाते हैं शराब की बोतलें
  • मंदिर में वार्षिक उत्सव के दौरान भक्त ने भेंट के रूप में 101 ओल्ड मंक बोतलें चढ़ाई
  • साउथ इंडिया में केरल में दुर्योधन का एकलौता यह मंदिर है, जहां शराब चढ़ाते हैं भक्त
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तिरुवनंतपुरम
केरल के कोल्लम में दुर्योधन मंदिर अपने आप में अजूबा है। एडक्कड़ इलाके में स्थित इस मंदिर का पूरा नाम पोरुवझी पेरुवथी मलनाड दुर्योधन मंदिर है। यहां भक्त अपने भगवान (दुर्योधन) को शराब की बोतलें चढ़ाते हैं। शुक्रवार को इस मंदिर में जब वार्षिक उत्सव की शुरुआत हुई तो यहां एक भक्त ने भेंट के रूप में 101 ओल्ड मंक की बोतलें अपने देवता को चढ़ाई।
साउथ इंडिया में दुर्योधन का एकलौता ऐसा मंदिर है, जहां भक्त शराब चढ़ाते हैं। यहां ऐसी मान्यता है कि एक बार इस गांव में दुर्योधन आए थे। उन्हें बहुत प्यास लगी थी। गांव के एक घर से उन्होंने पानी मांगा तो उन्हें तोड्डी (स्थानीय शराब) मिली। वह बहुत खुश हुए।

पान, चिकन भी चढ़ावा
मंदिर के सचिव एसबी जगदीश ने कहा कि सामान्यता दुर्योधन के मंदिर में विदेशी शराब ही चढ़ाई जाती है। पहले यहां अरक चढ़ाई जाती थी, लेकिन इस पर प्रतिबंध लगने के बाद अब विदेशी शराब औत तोड्डी अर्पित की जाती है। इसके अलावा लोग पान, चिकन, बकरी और सिल्क के कपड़े भी चढ़ाते हैं। कोल्लम के एक एनआरआई ने ओल्ड मंक की 101 बोतलें चढ़ाईं।


जगदीश ने कहा कि हर धर्म के लोग यहां पूजा करने आते हैं। मछुआरे मंदिर का झंडा अपने साथ लेकर आते हैं। यह माना जाता है कि अप्पोपम (देवता का सम्मान से पुकारा जाने वाला नाम) उन्हें हर मुसीबत से बचाते हैं। किरन दीपू ने बताया कि कुछ लोग जब विदेश से अपने घर वापस आते हैं तो जिस तरह परिवार के लोगों के लिए कुछ न कुछ गिफ्ट लाते हैं, उसी तरह अप्पोपम के लिए विदेशी शराब लाते हैं।

मंदिर की विशेषताएं
मलनाड मंदिर की कई विशेषताएं हैं। मंदिर में गर्भगृह का अभाव है। यहां सिर्फ एक उठा हुआ प्लैटफॉर्म है जो 24 घंटे खुला रहता है। जगदीश ने कहा कि मंदिर कमिटी के सदस्यों में हर जाति के लोग हैं, जिन्हें उनके समुदाय के लोग चुनते हैं। मंदिर में 1990 से पहले आतिशबाजी होती थी लेकिन 1990 में एक हादसे के दौरान 26 लोग मारे गए थे जिसके बाद आतिशबाजी बंद हो गई। उसके बाद से यहां वार्षिकोत्सव साधारण तरीके से मनाया जाने लगा।

दुर्योधन के इस मंदिर के अलावा कन्नूर के परास्सिनिकडवू मुथप्पन मंदिर में भी पहले विदेशी शराब चढ़ती थी लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। अब पांच साल से यहां सिर्फ तोड्डी ही चढ़ती है।

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