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Meghaaya Minister News: 'मुर्गा, बकरा, मछली की बजाय खाओ ज्यादा बीफ'...मेघालय के मंत्री का विवादित बयान

Sanbor Shullai मेघालय के मंत्री सनबोर शुलई ने राज्य के लोगों को मुर्गे, भेड़ या बकरी का मांस या मछली खाने के बजाय बीफ ज्यादा खाने के लिए कहा है। हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उनकी पार्टी इसके खिलाफ है।

Edited byसुधाकर सिंह | भाषा 31 Jul 2021, 4:34 pm

हाइलाइट्स

  • मेघालय में बीजेपी सरकार के मंत्री ने बीफ पर दिया विवादित बयान
  • मंत्री सनबोर शुलई की नसीहत- मुर्गा बकरे की बजाए बीफ ज्यादा खाएं
  • कहा- लोकतांत्रिक देश में हर कोई अपनी मर्जी का खाना खाने को आजाद
  • पिछले हफ्ते ही शुलई ने ली है मेघालय के कैबिनेट मंत्री पद की शपथ
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शिलांग
मेघालय में बीजेपी सरकार के मंत्री ने विवादित बयान दिया है। मंत्री सनबोर शुलई ने मुर्गा या बकरे की बजाए बीफ ज्यादा खाने की नसीहत दी है। बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री शुलई ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में हर कोई अपनी मर्जी का खाना खाने के लिए आजाद है।
मेघालय के मंत्री सनबोर शुलाई के बयान ने विवादों को जन्म दिया है। उन्होंने राज्य के लोगों को मुर्गे, भेड़ या बकरी का मांस या मछली खाने की बजाय बीफ ज्यादा खाने के लिए कहा और इस बात से इनकार किया कि उनकी पार्टी इसके खिलाफ है। पिछले हफ्ते कैबिनेट मंत्री की शपथ लेने वाले वरिष्ठ बीजेपी नेता शुलई ने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में हर कोई अपनी पसंद का खाना खाने के लिए स्वतंत्र है।

उन्होंने मीडिया से कहा, 'मैं लोगों को मुर्गे, भेड़ या बकरी का मांस या मछली खाने के बजाय बीफ ज्यादा खाने के लिए प्रेरित करता हूं। यह धारणा कि बीजेपी गोवध पर प्रतिबंध लगाएगी, यह दूर हो जाएगी।' पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री शुलई ने यह भी आश्वासन दिया कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से बात करेंगे कि पड़ोसी राज्य में नए कानून से मेघालय में मवेशियों का परिवहन बाधित न हो।

मेघालय और असम के बीच सीमा विवाद पर तीन बार के विधायक ने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य सीमा और अपने लोगों की रक्षा के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा, 'अगर असम के लोग सीमावर्ती इलाकों में हमारे लोगों को प्रताड़ित करते रहते हैं तो वक्त आ गया है कि केवल बात न करें और चाय न पिएं। हमें जवाब देना होगा। हमें मौके पर ही जवाब देना होगा।' हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह हिंसा के पक्ष में नहीं हैं।
लेखक के बारे में
सुधाकर सिंह
साहिल के सुकूं से किसे इनकार है लेकिन तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है...लिखने-पढ़ने का शौक पत्रकारिता की दुनिया में खींच लाया। पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज़िले से ताल्लुक़। पढ़ाई लखनऊ विश्वविद्यालय से और पत्रकारिता में ईटीवी से शुरुआत। सियासत को इतिहास और वर्तमान को अतीत के आईने में देखने की दिलोदिमाग़ में हसरत उठती रहती है। राजनैतिक-ऐतिहासिक शख़्सियतों और घटनाओं पर लिखने की ख़ास चाहत। डिजिटल दुनिया में राजस्थान पत्रिका से सफ़र का आग़ाज़ करने के बाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में मंज़िल का नया पड़ाव।... और पढ़ें

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