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9 साल की लंबी लड़ाई के बाद देश की पहली महिला को मिला बिना जाति और धर्म वाला प्रमाणपत्र

तमिलनाडु के वेलूर में एक महिला को बिना जाति और धर्म वाला प्रमाणपत्र जारी किया गया है। पेशे से वकील महिला का दावा है कि वह देश का पहली ऐसी महिला है, जिसे इस तरह का प्रमाणपत्र मिला है। इसके लिए उन्होंने नौ साल की लड़ाई लड़ी तब वह सफल हुईं।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 14 Feb 2019, 1:59 pm
वेलूर
नवभारतटाइम्स.कॉम स्नेहा को प्रमाणपत्र देते अधिकारी
स्नेहा को प्रमाणपत्र देते अधिकारी

'यह प्रमाणित किया जाता है कि स्नेहा किसी जाति या किसी धर्म की नहीं हैं।' बुधवार को इस तरह का प्रमाणपत्र तिरुपत्तूर के तहसीलदार ने स्नेहा को सौंपा। पेशे से वकील स्नेहा का दावा है कि वह देश की पहली ऐसी महिला हैं, जिन्हें इस तरह का प्रमाणपत्र मिला है। इसमें लिखा है कि वह किसी जाति या धर्म की नहीं हैं। इस प्रमाणपत्र को पाने के लिए उन्होंने करीब 9 साल की लंबी लड़ाई लड़ी।

35 साल की स्नेहा ने कहा, 'जाति और धर्म कुछ नहीं होता है। हम इंसान हैं और धरती पर इंसान के रूप में जन्म लिया है। जब लोग कोई जाति या धर्म वाला प्रमाणपत्र लेंगे तो इससे आर्थिक कमजोर लोगों को उनका अधिकार मिल सकेगा।' उन्होंने कहा कि उनके शादी लेखक पार्थिबराजा से हुई है। यह शादी भी उन्होंने पारंपरिक शादी को चेतावनी देते हुए की थी।

लंबे संघर्ष के बाद कामयाबी
स्नेहा ने कहा कि कई अदालतों के और सरकार के आदेश हैं कि किसी को भी प्रमाणपत्रों में जाति के नाम का उल्लेख करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। इसके बाद भी स्कूल छात्रों के प्रमाणपत्रों में जाति और समुदाय का उल्लेख करते हैं।

स्नेहा ने कहा, 'एक वकील होने के नाते मैं इस बैरियर को तोड़ना चाहती थी। मेरे नौ साल के संघर्ष, लगातार प्रयास के बाद यह सफल हो पाया है। मैं इस प्रमाणपत्र को पाने के लिए अंतिम बार मई, 2017 में आवेदन किया था। अब सरकार ने मुझे जाति-धर्म नहीं वाला प्रमाणपत्र जारी किया है।'

प्रशासन का पक्ष
तिरुपत्तूर की सब कलेक्टर प्रियंका पंकजम से जब इस बारे में पूछा गया कि स्नेहा को किस नियम के तहत यह प्रमाणपत्र मिला है तो उन्होंने कोई नियम नहीं बताया। प्रियंका ने कहा कि यह एक अपवाद है। तहसीलदार को अधिकार होता है कि वह सत्यापन के बाद इस तरह का प्रमाणपत्र जारी कर सकता है।

प्रियंका ने कहा कि स्नेहा के आवेदन के बाद उनके सारे दस्तावेज चेक किए गए। उन्होंने दस्तावेज में कोई भी जाति या धर्म नहीं लिखा था। उनके परिवार और उनकी लाइफ स्टाइल का सत्यापन कराया गया, उसके बाद उन्हें प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। स्नेहा ने कहा कि वह जिला प्रशासन का, तहसीलदार और सब कलेक्टर का धन्यवाद देती हैं, जिन्होंने उन्हें इस तरह का प्रमाणपत्र दिया है।

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