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भारत में भी बसता है छोटा क्रोएशिया, दशकों पुराना है जुड़ाव

फीफा विश्व कप फाइनल में युवा चैंपियन जहां फ्रांस पर दांव लगाकर बैठे हैं वहीं गोवा के एक गांव में फुटबॉल प्रेमी क्रोएशिया को जीतते हुए देखने के लिए टेलीविजन सेट पर चिपके जाएंगे।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 14 Jul 2018, 10:52 am
गोवा
नवभारतटाइम्स.कॉम गांव में बनी यह चर्च है क्रोएशिया से जुड़ाव की पहचान।
गांव में बनी यह चर्च है क्रोएशिया से जुड़ाव की पहचान।

छोटा सा देश क्रोएशिया फीफा फुटबॉल विश्वकप के फाइनल में पहुंचकर सबको चौंका रहा है। अगर आपको बताएं कि इस देश का एक हिस्सा भारत में भी बसता है तो शायद आपको हैरानी हो। यह सच है कि फीफा विश्व कप फाइनल में युवा चैंपियन जहां फ्रांस पर दांव लगाकर बैठे हैं वहीं गोवा के इस गांव में फुटबॉल प्रेमी क्रोएशिया को जीतते हुए देखने के लिए टेलीविजन सेट से चिपक जाएंगे। रविवार को फाइनल में एक साझा इतिहास की वजह से कम से कम यह छोटा सा गांव क्रोएशिया के पक्ष में होगा।

क्रोएशिया के पर्यटक 16वीं शताब्दी में ओल्ड गोवा से चार किमी दूर गंडौलिम आए। वे लंबे समय तक वहां नहीं रहे, लेकिन क्यूबार्जुआ नहर के बगल में बना साओ ब्राज का पुनर्स्थापित चर्च इस 200 लोगों के इस गांव को उनका जुड़ाव याद दिलाता है।क्रोएशियाई इंडोलॉजिस्ट ज्रदार्वा मतिसिक ने भारत में संस्कृत का अध्ययन करते हुए अपने देश के गोवा लिंक का संदर्भ खोजा। मतिसिक ने राज्य के अभिलेखागार में और अनुसंधान किया। चर्च ऑफ साओ ब्राज़ क्रोएशिया के डबरोवनिक में स्वेती वाल्हो चर्च का एक छोटा प्रतिरूप है।

1 अप्रैल, 1999 को क्रोएशिया का पहला आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल गांडौलिम में गोवा-क्रोएशिया के लिंक का पता लगाने के लिए पहुंचा। 15 सदस्यीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ क्रोएशियाई के राजदूत ज़ोरान एंड्रिक भारत आए थे।

इतिहासकारों का मानना है कि पुर्तगालियों ने जहाजों को बनाने के लिए क्रोएशियाई साथ लाए होंगे। इस क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता का सम्मान किया गया होगा। हो सकता है कि वे गांडौलिम गांव को पुराने गोवा के एक उपनगर के रूप में प्रयोग करने वाले व्यापारियों के रूप में आए हों।

1999 से, गांव में कोएशिया से आगंतुकों आ रहे हैं और क्रोट्स इस जगह पर भावनात्मक लगाव विकसित कर रहे हैं। एक ग्रामीण ब्राज़ सिल्विरा कहते हैं, 'हर बार जब क्रोएशियाई जहाज मोरमुगाओ बंदरगाह में आता है, तो नाविक हमारे चर्च जाते हैं।' उन्होंने कहा, 'एक क्रोएशियाई बाल रोग विशेषज्ञ, डॉ मारिजा राडोनिक, जो एक दशक पहले आए थे, वापस गए और चर्च के लिए दान इकट्ठा किया।'

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