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पटरी पर आया वर्ल्ड हर्बल फॉरेस्ट का काम

विशेष संवाददाता, चंडीगढ़पिछले ढाई साल से अधर में लटका पड़ा बीजेपी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट, वर्ल्ड हर्बल फॉरेस्ट का काम पटरी पर आता दिखाई दे रहा ...

नवभारतटाइम्स.कॉम 26 Mar 2017, 6:30 am

विशेष संवाददाता, चंडीगढ़

पिछले ढाई साल से अधर में लटका पड़ा बीजेपी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट, वर्ल्ड हर्बल फॉरेस्ट का काम पटरी पर आता दिखाई दे रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए सलाहकार की भूमिका में शामिल पंतजलि की 40 सदस्यों की एक टीम ने मोरनी हिल्स में मौजूद पौधों की 465 विभिन्न प्रजातियों की पहचान कर ली है और एक हजार विभिन्न किस्मों की जड़ी-बूटियों की पहचान विशेषज्ञों ने शुरू कर दी है।

इस प्रोजेक्ट में शनिवार को उस समय एक और कदम उस समय आगे बढ़ा जब पंतजलि से बालकृष्ण ने मोरनी हिल्स का दौरा किया और पौधों की प्रजातियों और जड़ी-बूटियों की पहचान पर अबतक हुए काम का मुआयना किया। उल्लेखनीय है कि सरकार ने हाल में पंतजलि के साथ एमओयू साइन किया था।

औषधीय पौधों की हुई पहचान

बालकृष्ण का दावा है कि वर्ल्ड हर्बल फॉरेस्ट इस इलाके में रोजगार के मौके खोलेगा। उनके मुताबिक मोरनी की पहाड़ियों में अदरक, हरड़, हल्दी काफी होते हैं और पंचजलि की कोशिश रहेगी कि उनके उत्पादन को उचित मूल्य पर खरीदा जाएगा। बालकृष्ण ने यह भी कहा कि इस इलाके में देसी किस्म की गाय भी पाई जाती है और किसान गोमूत्र से अरक निकाल के इकठ्ठा कर सकते हैं तथा बाजार मे मुनाफा कमा सकते हैं। उनके मुताबिक बरसात के दिनों में और नए औषधीय पौधे पैदा होते हैं, उनकी पहचान की जाएगी। इस बात पर भी जोर दिया कि मोरनी में जितनी भी जड़ी-बूटियां पैदा हो रही हैं, उन्हें इस्तेमाल में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मोरनी क्षेत्र में ऐसे औषधीय पौधे उगते हैं जो विश्व के किसी कोने में इस संस्थान को नहीं मिले हैं।

बालकृष्ण ने साफ किया कि इस नई परियोजना के लिए पतंजलि मोरनी के इलाके में कोई जमीन लीज पर नहीं ले रहा है बल्कि स्थानीय किसानों से ही खेती करवाई जाएगी और इसको औषधीय पौधों की नर्सरी के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि मोरनी क्षेत्र विश्व में आकर्शण का केंद्र बनेगा तथा विश्व में पता लगेगा कि औषधीय पौधे सिर्फ मोरनी क्षेत्र में ही मिलते हैं।

प्रोजेक्ट को लेकर उठ चुका है विवाद

इस प्रोजेक्ट के लिए योग गुरु स्वामी रामदेव के पंतजलि का सहयोग लेने पर काफी विवाद मचा था। विपक्ष ने इसे बीजेपी सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा बनाकर पेश किया था, लेकिन सरकार अपनी परियोजना पर अडिग रही। सरकार खुद तब परेशानी में फंस गई जब परियोजना कागजी कसरत में उलझ कर रह गई। काफी समय तक यही साफ नहीं हुआ कि परियोजना में कौन-कौन से विभाग भागीदार होंगे और उनकी क्या भूमिका रहेगी। इसके अलावा जमीन से लेकर दूसरी तमाम प्रक्रियाएं किसके जिम्मे रहेंगी। मामला उस समय ज्यादा उलझ गया जब प्रोजेक्ट के लिए सर्वे में यह बात सामने आई कि जितनी जमीन वर्ल्ड हर्बल फॉरेस्ट के लिए प्रस्तावित की गई है, उतनी जमीन तो मौजूद ही नहीं है। वन विभाग ने परियोजना के लिए जमीन का आकार घटा दिया। कुल मिलाकर इस परियोजना में देरी से स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज काफी नाराज हुए।

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