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मारुति कांड में 31 दोषी

प्रमुख संवाददाता, गुड़गांवबहुचर्चित मारुति सुजूकी मामले में कोर्ट ने शुक्रवार को 148 आरोपी श्रमिकों में से 31 को दोषी करार देते हुए उनकी सजा पर ...

नवभारतटाइम्स.कॉम 11 Mar 2017, 8:00 am

प्रमुख संवाददाता, गुड़गांव

बहुचर्चित मारुति सुजूकी मामले में कोर्ट ने शुक्रवार को 148 आरोपी श्रमिकों में से 31 को दोषी करार देते हुए उनकी सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत 17 मार्च को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद सजा सुनाएगी।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर.पी. गोयल ने शुक्रवार की दोपहर करीब 12 बजे मारुति कांड में फैसला सुनाना शुरू किया। सबसे पहले उन्होंने 117 आरोपियों को रिहा का आदेश दिया। कोर्ट ने बरी किए गए हर व्यक्ति को बताया कि उनके खिलाफ कोई सबूत व गवाह नहीं मिले हैं। करीब 90 आरोपियों के नाम एफआईआर में भी नहीं हैं। कोर्ट में गवाह उनकी पहचान तक नहीं कर सके। गवाहों ने कुछ आरोपियों की पहचान अदालत में की भी, लेकिन इस मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं मिली। इसलिए ऐसे सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।

13 आरोपियों को माना एचआर हेड की हत्या का दोषी

अभियोजन पक्ष के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी लाल सिंह यादव और सरकारी वकील अनुराग हुड्डा ने बताया कि अदालत ने 13 आरोपियों को 18 जुलाई, 2012 को आईएमटी मानेसर स्थित मारुति सुजुकी कंपनी में घटित हुई घटना में एचआर हेड अवनीश देव की मौत का जिम्मेदार मानते हुए उन्हें आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी करार दिया है। इनमें मारुति सुजुकी श्रमिक यूनियन के सभी 12 पदाधिकारी व श्रमिक जियालाल शामिल हैं। जियालाल की ही शॉप फ्लोर पर सुपरवाइजर से कहासुनी हुई थी, जिसने झगड़े का रूप धारण कर लिया था और यह घटना घटित हो गई। दोषियों में राममेहर, संदीप ढिल्लो, रामविलास, सरबजीत सिंह, पवन कुमार, सोहन कुमार, प्रदीप गर्जर, अजमेर सिंह, सुरेश कुमार, अमरजीत, धनराज भामी व योगेश कुमार श्रमिक यूनियन के पदाधिकारी थे। जियालाल को भी दोषी करार दिया गया है।

18 आरोपी मारपीट के आरोप में दोषी

लाल सिंह यादव व अनुराग हुड्डा ने बताया कि 18 आरोपियों को मारपीट आदि की आईपीसी की धारा 325 व 452 के तहत अदालत ने दोषी करार दिया है। इनमें दोषी विजयपाल, आनंद, विशाल भारत, सुनील कुमार, प्रवीण कुमार, किशन जांगड़ा, वीरेंद्र सिंह, रामसबद, इकबाल सिंह, हरमिंद्र सिंह, कृष्ण कुमार, नवीन, शिवाजी, सुरेंद्र पाल, प्रदीप कुमार, जोगेंद्र सिंह, नवीन पुत्र बलवान व प्रदीप शामिल हैं। अनुराग हुड्डा ने बताया कि 117 आरोपियों को सबूतों व गवाहों के अभाव में अदालत ने उन पर लगे सभी आरोपों से मुक्त करते हुए बरी कर दिया।

कोर्ट में दोषियों के दर्ज हुए बयान

न्यायाधीश ने दोषियों के अधिवक्ताओं राजेंद्र पाठक, एसएस चौहान, राजकुमार, मोनू आदि से आग्रह किया कि वे दोषियों के बयान दर्ज करा दें, ताकि 17 मार्च को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनी जा सके और दोषियों की सजा मुकर्रर की जा सके। उक्त अधिवक्ताओं ने सभी 31 दोषियों के बयान अदालत में दर्ज कराए। दोषियों ने अपने बयानों में अदालत से गुहार लगाई कि वे युवावस्था में हैं। उनके सिवाए परिवार में कोई अन्य कमाने वाला व्यक्ति भी नहीं है। पूरे परिवार की उनके ऊपर ही जिम्मेदारी है। इसलिए उनकी सजा निश्चित करते समय उक्त स्थितियों को ध्यान में रखा जाए और दया दिखाते हुए उन्हें कम से कम सजा दी जाए।

31 दोषियों के परिजन हुए निराश

अदालत ने जब 31 आरोपियों को दोषी करार दिया तो उनके परिजनों के चेहरों पर निराशा स्पष्ट झलक रही थी, जिन 13 दोषियों को हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया है, उनके परिजन अधिक परेशान दिखाई दिए। सीनियर एडवोकेट कुलभूषण भारद्वाज का कहना है कि हत्या के आरोप में दोषियों को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है और मारपीट के मामले में अदालत उन्हें उनकी जेल में काटी गई अवधि को पर्याप्त सजा मानते हुए अंडरगोन कर रिहा भी कर सकती है, लेकिन यह सब अदालत व अपराध की प्रकृति पर निर्भर करता है।

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