ऐपशहर

चलते-चलते पैरों से खून निकल रहे, चेहरे पर दिखी घर वापसी की उमंग...कैसे बयां करूं ये दर्द

हर राज्य से प्रवासी मजदूरों (Migrant workers) के लौटने का सिलसिला जारी है। राजस्थान से भी भारी संख्या में मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार को लौट रहे हैं। साधन नहीं होने के बावजूद मजदूर पैदल और साइकिल से ही घर वापसी कर रहे हैं। लेकिन ये सफर कितना मुश्किल होता है इसे समझने के लिए नवभारत टाइम्स.कॉम के संवाददाता उनके पास पहुंचे। जब जब संवाददाता ने इनकी हालत देखी तो आंखों में आंसू आ गए। आप भी इन तस्वीरों के जरिए उस दर्द को अनुभव कर सकते हैं और अगर आप सक्षम हों तो मजदूर और गरीब के लिए अपने स्तर पर कुछ कर सकते हैं।

नवभारतटाइम्स.कॉम 13 May 2020, 12:43 pm
भरतपुर
नवभारतटाइम्स.कॉम images of jobless bihar and uttar pradesh migrants who walking the long road home from rajasthan
चलते-चलते पैरों से खून निकल रहे, चेहरे पर दिखी घर वापसी की उमंग...कैसे बयां करूं ये दर्द

कोरोना लॉकडाउन के दौरान राजस्थान से यूपी-बिहार लौट रहे प्रवासी मजदूरों की पीड़ा कम होने का नाम नहीं ले रही है। सरकार से बस,ट्रेन आदि परिवहन साधन नहीं मुहैया नहीं कराने की टीस लिए ये गरीब मजदूर पैदल या फिर साइकिलों से ही चल रहे हैं। सैकड़ों किलोमीटर का सफर करने के बाद भी उनकी मंजिल अब भी सैकड़ों मील दूर है। जोधपुर, जयपुर, अजमेर आदि शहरों से बिहार और यूपी लौट रहे ऐसे मजदूरों पीड़ा मंगलवार को भरतपुर में तब झलकी जब वो सड़क किनारे अपने जख्म सहलाते नजर आए।


बेटी थक गई तो मां ने सहलाया, फिर सफर शुरू

राजस्थान का भरतपुर जो उत्तर प्रदेश सीमा से लगता है। यहां राजस्थान से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश को पैदल पलायन करने वाले मजदूरों की हालत देख हर किसी का दिल पिघल गया।

पैदल चलने से पैरों में जख्म पड़ें

सैकड़ों किलोमीटर चलते हुए इनके पैरों के तलवों में घाव पड़ गए। जख्म इतने पीड़ा दायक की चलना तो दूर खड़े रहना भी मुश्किल है लेकिन अभी तो उनको हजारों किलोमीटर और चलना है। यह तस्वीर उत्तर प्रदेश के गोंडा निवासी हुसैन की है

जहां छाया मिली वही कुछ आराम

दिन- रात चलते हुए जहां छाया मिली वही कुछ आराम के लिए रुक जाते हैं। चलते-चलते इनके पैरों में छाले पड़ गए और फूट गए जिनसे खून निकल रहा था, पर हिम्मत इतनी की घाव पर कपड़े बांधकर फिर से चल दिए।

कुछ पल रुकते, फिर चल पड़ते

महिलाएं जहां थकान होती वह कुछ पल रुककर अपने बच्चों के पैरों की मालिस करती दिखाई पड़ी तो वहीं मजदूर भी थकने के बाद आपस में ही एक-दूसरे के पांव दबावते नजर आए।

अगला लेख

Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग