ऐपशहर

घर छोड़कर भागते बच्चे, परिवार नहीं चाहते उनकी 'घर वापसी'!

घर छोड़कर भागने वाले प्रति 100 बच्चों में सिर्फ एक के परिवारवाले ही गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराते हैं...

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 13 Jul 2018, 1:25 pm
एकता एन जॉन, चेन्नै
नवभारतटाइम्स.कॉम 8

घर छोड़कर भागने वाले प्रति 100 बच्चों में सिर्फ एक के परिवारवाले ही गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराते हैं। इतना ही नहीं, इनमें से लगभग एक तिहाई लोगों का कहना है कि वे नहीं चाहते हैं कि उनके बच्चे वापस उनके पास आएं। चाइल्ड प्रटेक्शन स्पेशलिस्ट्स के एक ग्रुप के द्वारा की गई रिसर्च में यह बात सामने आई है।

यूनिसेफ के पूर्व बाल संरक्षण विशेषज्ञ आर विद्यासागर के नेतृत्व में टीम द्वारा किए गए सर्वे से पता लगा कि कटपाडी और विल्लुपुरम के रेलवे स्टेशनों से रोयापुरम स्थित चाइल्ड लाइन में लाए गए 1599 बच्चों में से 1 प्रतिशत से कम के परिवार ने उनके खोने की शिकायत दर्ज कराई। टीम ने इसके पीछे दो वजहें पाईं, पहली यह कि वे परिवार अधिकारियों से संपर्क करने के लिए सामाजिक-आर्थिक रूप से काफी कमजोर थे और दूसरी यह कि बच्चे बार-बार भाग जाते थे।

पिछले एक साल में अधिकारियों ने तमिलनाडु के 18 जिलों में जब 114 बच्चों के परिवार से संपर्क किया तो उनमें से लगभग 30 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि वे अपने बच्चों को वापस नहीं चाहते हैं। विद्यासागर ने कहा कि यह पूरी तरह से हैरान करने वाला था। कुछ मामलों में सामने आया कि 'रेस्क्यू' से पहले ये बच्चे एक दर्जन से भी अधिक बार अपना घर छोड़कर भाग चुके हैं। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले ऐसे लोग अधिक थे, जो अपने बच्चों को वापस नहीं लेना चाहते थे, खासकर तब जब बच्चे किसी मानसिक रोग से पीड़ित हों। डिपार्टमेंट ऑफ सोशल डिफेंस डेटा के मुताबिक, तमिलनाडु में पिछले छः वर्षों में घर छोड़कर भागे 17,000 बच्चों को वापस उनके परिवार के पास छोड़ा गया है।

घर में खुश नहीं रहते बच्चे: एनजीओ
रेलवे चिल्ड्रन इंडिया द्वारा स्पॉर्न्सर्ड एक एनजीओ द्वारा की गई स्टडी में सामने आया कि एक तिहाई बच्चे लगातार घर में काफी बुरे अनुभवों का सामना करते हैं, जिसके चलते वे घर से भाग जाते हैं। इनमें माता-पिता के बीच झगड़ा, शराबी पिता के द्वारा मारपीट, भीख मांगने का दबाव जैसे अनुभव शामिल हैं। वापस घर भेजे गए 114 बच्चों में सिर्फ आधे ही अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ा पाए। घर छोड़ने से पहले इनमें से 85% बच्चे स्कूलों में थे, लेकिन घर वापसी के बाद यह प्रतिशत सिर्फ 55 ही रह गया। घर वापस जाकर स्कूल जॉइन करने वाले 63 बच्चों में सिर्फ 70% ही ऐसे थे जो नियमित तौर पर स्कूल जाते थे।

टीम ने इन बच्चों से यह भी पूछा कि आखिर उन्होंने घर क्यों छोड़ा था तो इनमें से 25% प्रतिशत बच्चों का कहना था कि वह बिना अपने माता-पिता को बताए चेन्नै घूमना चाहते थे। हालांकि अधिकतर बच्चें परिवारिक कलह और स्कूल के दबाव के चलते घर छोड़ने पर मजबूर हुए थे।

इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

अगला लेख

Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग