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मद्रास हाई कोर्ट ने जयललिता की वसीयत या उत्तराधिकारी का पता लगाने का आदेश दिया

मद्रास हाई कोर्ट ने आयकर विभाग से यह पता लगाकर कोर्ट को बताने के लिए कहा है कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की कोई वसीयत या कानूनी उत्तराधिकारी है।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 11 Sep 2018, 1:06 pm
चेन्नै
नवभारतटाइम्स.कॉम जयललिता (फाइल फोटो)
जयललिता (फाइल फोटो)

मद्रास हाई कोर्ट ने आयकर विभाग से यह पता लगाकर कोर्ट को बताने के लिए कहा है कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की कोई वसीयत या कानूनी उत्तराधिकारी है। जस्टिस हुलुवडी जी रमेश और जस्टिस कल्याणसुदंरम की बेंच ने विभाग की ओर से दाखिल की गई उस याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया, जिसमें आयकर अपीलीय अधिकरण के एक फैसले को चुनौती दी गई थी।

ट्राइब्यूनल ने संपत्ति कर कमिश्नर के रिविजन ऑर्डर को हटाते हुए 2,255 दिन की देरी को मान लिया था। बेंच ने विभाग के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल टीआर सेंथिल कुमार से 26 सितंबर से जानकारी लेने के लिए कहा है। यह मामला 1997-98 के दौरान जयललिता की संपत्ति से जुड़ा है।

संपत्ति के आकलन में अंतर
पहले विभाग ने 27 मार्च 2000 को उनकी संपत्ति 4.67 करोड़ बताई थी, लेकिन बाद में डायरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस ऐंड ऐंटी-करप्शन की जांच में पता चला कि सोने और चांदी के जेवरों की कीमत 3.83 करोड़ की जगह 1.85 करोड़ आंकी गई थी। साथ ही पोज गार्डन स्थित उनके घर के निर्माण में लगाए गए 58.52 लाख रुपये, हैदराबाद में फार्म हाउस के निर्माण में लगे 11.72 लाख रुपये और उनकी कुछ गाड़ियों का आकलन नहीं किया गया।

आयकर विभाग ने दी चुनौती
बाद में असेसमेंट को रिवाइज किया गया, जिसके खिलाफ जयललिता ने ट्राब्यूनल में 2,255 दिन के बाद अपील की। ट्राइब्यूनल ने देरी के बावजूद अपील को स्वीकार कर लिया। इसके खिलाफ विभाग ने कोर्ट ने ट्राब्यूनल के फैसले को रद करने की अपील की है। अपील में कहा गया है कि ट्राइब्यूनल ने रिविजन के ऑर्डर को रद्द करके गलती की है। विभाग ने कहा है कि मामला हाई कोर्ट में होने के कारण ट्राइब्यूनल इसे रद्द नहीं कर सकता। साथ ही विभाग ने 2,255 दिन की देरी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ बताया है।

इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ें।

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