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बेस्ट टीचर: गुरुजी ने बदल डाली तस्वीर, चंदा मांगकर बढ़ाया स्कूल

कर्नाटक के एक छोटे से आदिवासी गांव अदाविसोमापुर के प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाले मल्लेश डी हरिवन ने बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ इस स्कूल को भी विकसित किया है। 2003 में जब हरिवन यहां पहुंचे तो सिर्फ दो कमरों का स्कूल था, जिसे हरिवन ने अब पांच कमरों का बना दिया। उनके प्रयासों को देखते हुए हरिवन को शिक्षक दिवस पर बेंगलुरु में आयोजित कार्यक्रम में बेस्ट टीचर अवॉर्ड से भी सम्मानित किए जाएगा।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 5 Sep 2018, 6:29 pm
बेंगलुरु/गडग
नवभारतटाइम्स.कॉम gadag
काफी रुचिकर तरीके से पढ़ाते हैं हरिवन

कर्नाटक के एक छोटे से आदिवासी गांव अदाविसोमापुर के प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाले मल्लेश डी हरिवन ने बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ इस स्कूल को भी विकसित किया है। 2003 में जब हरिवन यहां पहुंचे तो सिर्फ दो कमरों का स्कूल था, जिसे हरिवन ने अब पांच कमरों का बना दिया। उनके प्रयासों को देखते हुए हरिवन को शिक्षक दिवस पर बेंगलुरु में आयोजित कार्यक्रम में बेस्ट टीचर अवॉर्ड से भी सम्मानित किए जाएगा।

जानकारी के मुताबिक, 2003 में जब हरिवन यहां जॉइन करने पहुंचे, तब सिर्फ 68 बच्चे पढ़ते थे और उनके लिए सिर्फ दो कमरे ही थे। हरिवन यहां आने से पहले सावनूर में पांच साल पढ़ा चुके थे इसलिए उनके पास अनुभव की कमी नहीं थी। इसी अनुभव के दम पर हरिवन में स्कूल में बच्चों की संख्या 103 तक पहुंचा दी है। साथ ही साथ उन्होंने इस दो कमरे के स्कूल को अब पांच कमरों का बना दिया है।

बच्चों के परिजनों को समझाकर स्कूल में वापस लाए बच्चे
49 वर्षीय हरिवन ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया, 'यहां के लोग काम की तलाश में अपना ठिकाना बदलते रहते हैं, बच्चे भी उनके सीथा ही जाते हैं और स्कूल आना बंद कर देते हैं। अन्य शिक्षकों की मदद से मैंने उन्हें समझाना शुरू किया कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजें। प्रतिक्रिया थोड़ा देर से हुई लेकिन हमें इसका फायदा मिला है।'

बताया गया कि जब बच्चे बढ़ने लगे तो हरिवन ने स्कूल बड़ा करने के बारे में सोचा। उन्होंने अपने दोस्तों से चंदा लेकर तीन और क्लासरूम बनाए। एक्स्ट्रा-करिकुलर ऐक्टिविटीज को बढ़ावा देने के लिए स्कूल में हर शनिवार को नौ बेग-डे होता है। हर दूसरे हफ्ते में बच्चों को लाइब्रेरी ले जाया जाता है और उन्हें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हरिवन कहते हैं, 'अब मैं इस स्कूल का इनचार्ज हूं तो मैं अलग तरीके से यहां कन्नड़ पढ़ाऊंगा।'

चंदा इकट्ठा कर बच्चों के लिए जूते और किताब-कॉपी

गडग डाएट में सीनियर लेक्चरर शंकर हूगक कहते हैं, 'हरिवन की कड़ी मेहनत के चलते स्कूल छोड़ चुके कई बच्चे भी फिर से पढ़ने लगे हैं। सरकारी पैसों के अलावा उन्होंने अपने दोस्तों से चंदा लेकर बच्चों के लिए जूतों और कॉपी-किताब की व्यव्स्था की है। वह स्कूल में पढ़ाने के नए-नए तरीके भी लाए हैं।'

गौरतलब है कि शिक्षक दिवस के मौके पर बेंगलुरु स्थित राज्य की विधानसभा में आयोजित एक कार्यक्र्म में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी 20 प्राइमरी शिक्षकों, 10 हाई स्कूल शिक्षकों और एक स्पेशल हाई स्कूल के शिक्षक को 2018-19 के लिए बेस्ट टीचर्स अवॉर्ड से सम्मानित करेंगे, इसमें हरिवन का भी नाम शामिल है।

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