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RSS Bengaluru Meeting: पहली बार नागपुर में नहीं होगी RSS की 'चुनावी' बैठक, जानिए क्यों खास मानी जा रही है यह मीटिंग?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चुनावी बैठक पहली बार नागपुर में नहीं होने वाली है। कोरोना प्रोटोकॉल के चलते इसे बेंगलुरु में कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस मीटिंग में कुछ अहम सांगठनिक चुनाव संपन्न होंगे।

नवभारत टाइम्स 2 Mar 2021, 11:52 am
बेंगलुरु
नवभारतटाइम्स.कॉम मोहन भागवत
मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा इस बार 19 से 21 मार्च तक बेंगलुरु में होने वाली है। वैसे तो संघ की यह बैठक हर साल मार्च में ही होती है लेकिन इस बार की होने वाली बैठक कुछ खास मानी जा रही है। यह बैठक खास इसलिए क्योंकि यह चुनावी बैठक है। वहीं, संघ की यह चुनावी बैठक पहली बार नागपुर से बाहर हो रही है।

चुनावी बैठक नागपुर से बाहर
संघ में हर तीसरा साल चुनावी साल होता है। इसमें सरकार्यवाह का चुनाव होता है। करीब एक दशक पहले तक हर साल संघ की इस सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक नागपुर में ही होती थी लेकिन फिर तय किया गया कि हर तीसरी बैठक यानी चुनावी साल वाली बैठक नागपुर में होगी। बाकी दो साल यह बैठक देश के अलग-अलग हिस्सों में होगी। इस साल की बैठक चुनावी है और इसे नागपुर में होना था।

संघ के एक पदाधिकारी ने बताया कि कोविड-19 की वजह से अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग नियम हैं। महाराष्ट्र के कोरोना प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए इस बार यह बैठक नागपुर में नहीं कराने का फैसला किया गया है। वहां कोरोना केस भी तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए यह चुनावी बैठक इस साल बेंगलुरु में हो रही है।

सरकार्यवाह का चुनाव
संघ के पदाधिकारी के मुताबिक, हर तीसरे साल संघ में जिला संघ चालक, प्रांत संघ चालक, विभाग संघ चालक समेत सरकार्यवाह का चुनाव होता है। संघ में सबसे बड़ा कार्यकारी पद सरकार्यवाह का ही है। एक दशक से ज्यादा वक्त से भैया जी जोशी सरकार्यवाह हैं। चर्चा है कि इस बार संघ को कोई नया सरकार्यवाह मिल सकता है। हालांकि, तीन साल पहले भी इसी तरह की चर्चा थी लेकिन तब भी भैयाजी जोशी ही चुने गए थे।

चुनाव अब तक हमेशा निर्विरोध
संघ के इतिहास में आज तक कभी वोटिंग की नौबत नहीं आई है। हर बार सरकार्यवाह का चुनाव निर्विरोध ही हुआ है। चुनाव की पूरी प्रक्रियाका पालन किया जाता है। चुनाव अधिकारी नए सरकार्यवाह के लिए नाम आमंत्रित करते हैं। नॉमिनेशन के साथ ही प्रस्तावक भी जरूरी हैं। हालांकि, कभी भी वोटिंग की नौबत नहीं आई। नए सरकार्यवाह का चुनाव होने के बाद वह अपनी नई टीम का ऐलान कर सकते हैं। इस बार प्रतिनिधि सभा में संख्या भी कम रखी गई है।

कई प्रस्ताव भी होंगे पास
बैठक में संघ के प्रतिनिधि पिछले एक साल की गतिविधियों का ब्योरा देंगे। शाखाएं कितनी बढ़ीं, इसका जिक्र होगा। कोविड के दौरान किस तरह काम हुआ इस पर भी बात होगी। संघ की प्रतिनिधि सभा में कई सामाजिक और राजनीतिक प्रस्ताव भी पास होते हैं। संघ के एक पदाधिकारी के मुताबिक, बैठक में आर्थिक प्रस्ताव भी आ सकता है। क्योंकि कोविड-19 के दौर में अर्थव्यवस्था पर मार पड़ी है।

उन्होंने कहा कि एक प्रस्ताव सामाजिक समरसता को लेकर भी आ सकता है। राम मंदिर का भी जिक्र होगा जिसमें राम मंदिर ट्रस्ट और भव्य मंदिर बनाने के लिए समाज के सहयोग और निधि समर्पण अभियान की बात होगी।

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