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Babu Jagjivan Ram: अछूत का दंश झेलते हुए उप प्रधानमंत्री के पद तक पहुंच गए थे बाबू जगजीवन राम

आंबेडकर के बाद दलितों के हितैषी कहे जाने वाले बाबू जगजीवन राम की 115वीं जयंती के उपलक्ष्य पर मंगलवार को जगह-जगह उन्हें याद किया गया। आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित बाबू जगजीवन राम पार्क में एक भव्य आयोजन किया गया। जिसमें समाज के प्रबुद्ध वर्ग और राजनैतिक दलों के नेताओं ने प्रतिभाग किया।

guest Sunil-kumar | Lipi 5 Apr 2022, 6:05 pm
सुनील साकेत, आगरा : 24 जनवरी 1978 में बतौर रक्षा मंत्री बाबू जगजीवन राम वाराणसी में एक मूर्ति का अनावरण करने पहुंचे थे। उन्होंने मूर्ति का अनावरण तो कर दिया, लेकिन उनके द्वारा मूर्ति छू लेने के बाद वहां मौजूद लोगों ने कहा कि अछूत के छू लेने से मूर्ति अपवित्र हो गई है। इसे पवित्र करने के लिए मूर्ति को गोबर लगवाकर गंगाजल से धुलवाया गया। इस घटना से व्यथित होकर बाबू जगजीवन राम ने कहा कि 'मैं मानता हूं जो व्यक्ति यह समझता है कि किसी के छू देने से पत्थर की मूर्ति अपवित्र हो जाती है। उसका दिमाग भी पत्थर जैसा है। जरा सोचिए जब देश के रक्षा मंत्री होने के बावजूद उन्होंने इतना बड़ा अपमान सहा तो उनके छात्र जीवन में क्या हुआ होगा।
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मंगलवार पांच जनवरी को बाबू जगजीवन राम की जन्मतिथि के अवसर पर उन्हें याद किया गया। आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित बाबू जगजीवन राम पार्क में समाज के बुद्धिजीवी और तमाम राजनैतिक दलों के नेतागण मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर पहुंचे पूर्व सीएम ओएसडी गंगाराम अंबेडकर ने कहा कि बाबू जगजीवन राम ने अपने छात्र जीवन से ही संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि बिहार के एक छोटे से गांव में जन्मा चर्मकार का बेटा देश का उप प्रधानमंत्री बन सकता है। कार्यक्रम में आंबेडकर समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष (पूर्व आईआरएस अधिकारी) तेज सिंह, पूर्व राज्यमंत्री विधायक डॉ. जीएस धर्मेश, जाटव उत्थान समिति के संयोजक देवकी नंदन सोन आदि मौजूद रहे।

माल रोड का बाबू जगजीवन के नाम पर रखने की मांग

जाटव उत्थान समिति के संयोजक देवकी नंदन सोन ने कहा कि बाबू जगजीवन राम का दलितों की राजधानी आगरा से खास लगाव रहा है। वे कई बार आगरा आए। उन्होंने आगरा किला परिसर में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा लगवाई। यह जमीन रक्षा संपदा थी। जिसे रक्षा मंत्रालय से आंवटित करवाया। इसके अलावा 1962 में उन्होंने काजीपाड़ा में एक वाचनालय भी बनवाया। उनके जन्मदिवस के अवसर पर माल रोड को बाबू जगजीवन राम के नाम पर रखने की मांग की गई है।

नाईयों ने बाल काटने से कर दिया था इनकार
बाबू जगजीवन राम छात्र जीवन में मेधावी रहे। हमेशा कक्षाओं में टॉप रहने के बाद भी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में उन्हें भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अनुसूचित जाति के लोगों को मजबूत करने और असमानताओं को दूर करने के लिए आंदोलन चलाया। गुस्साए नाई समाज के लोगों ने उनके बाल काटने से भी इनकार कर दिया था।

जब नाराज होकर तोड़ दिया था घड़ा
स्कूल में जब वे पहुंचे थे तो उन्हें अलग घड़े से पानी पीने के लिए मजबूर किया गया था, लेकिन उन्होंने दलितों के लिए बनाया गया घड़ा ही तोड़ दिया। उनके आक्रामक तेवरों के चलते सुभाष चंद बोस ने भी उन्हें अपने साथ रख लिया था। बाबू जगजीवन राम 35 साल तक केंद्रीय मंत्री रहे। उनके संघर्ष ने उन्हें बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के समकालीन लाकर रख दिया था।
लेखक के बारे में
योगेश भदौरिया
टीवी जर्नलिज्म से शुरुआत के बाद बीते 8 साल से डिजिटल मीडिया में हैं। राजनीति के अलावा टेक और ऑटो सेक्शन की खबरों में दिलचस्पी। NDTV इंडिया से सफर की शुरुआत के बाद न्यूज नेशन होते हुए अब NBT ऑनलाइन पहुंचे। वक्त मिलने पर नई टेक्नोलॉजी के बारे में जानना। घुमक्कड़ और जिज्ञासू। खाली टाइम में प्ले स्टेशन पर गेमिंग के अलावा बाइकिंग और ड्राइविंग लवर।... और पढ़ें

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