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घरौरा के पुलिस-ग्रामीण संघर्ष में आरोपियों को राहत नहीं, सरेंडर करने का निर्देश

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं न्यायमूर्ति अनिल कुमार की खंडपीठ ने मनोज बिंद और 57 अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 45 दिन के भीतर अदालत में सरेंडर करके जमानत अर्जी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

नवभारत टाइम्स 19 Jun 2019, 11:00 pm
प्रयागराज
नवभारतटाइम्स.कॉम Court
सांकेतिक तस्वीर

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बलिया में बांसडीह तहसील के घरौरा गांव में हुए पुलिस-ग्रमीण संघर्ष के आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 45 दिन के भीतर अदालत में सरेंडर करके जमानत अर्जी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस दौरान पुलिस उनकी गिरफ्तारी नहीं करेगी, लेकिन 45 दिन में सरेंडर नहीं करने पर पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकेगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं न्यायमूर्ति अनिल कुमार की खंडपीठ ने मनोज बिंद और 57 अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने इस प्रकरण में दर्ज एफआईआर रद्द करने से भी इनकार कर दिया है। मामले के तथ्यों के अनुसार घरौरा गांवसभा की जमीन पर कब्जे की शिकायत पर गांव पहुंची पुलिस फोर्स तथा राजस्व टीम पर उत्तेजित गांव वालों ने हमला कर दिया था।

पुलिस और ग्रामीण सघर्ष में तहसीलदार सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। बाद में पुलिस ने बांसडीह थाने में 57 ग्रामीणों के विरुद्ध विधिविरुद्ध जाम, बलवा, जानलेवा हमला, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने आदि के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। याचियों का कहना था कि उन्हें राजनीतिक विद्वेष में झूठा फंसाया गया है। याचिका में उन्होंने एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी।

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