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कंप्यूटर डेटा चेक करने के सरकारी एजेंसियों के अधिकार पर हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

याचिका को आईआईटी खड़कपुर के विधि छात्र सौरभ पांडेय ने दाखिल किया है। गृह मंत्रालय की साइबर एवं सूचना सुरक्षा डिवीजन के सचिव ने 20 दिसंबर 2018 को धारा 69 नियम 4 के तहत आदेश जारी कर देश की 10 सुरक्षा एजेंसियों को किसी के भी कंप्यूटर डाटा की जांच करने का असीमित अधिकार दे दिया है।

संजय पांडे | नवभारत टाइम्स 4 Jan 2019, 9:32 pm

हाइलाइट्स

  • सरकारी एजेंसियों को किसी के भी कंप्यूटर का डेटा चेक करने के अधिकार पर हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब।
  • गृह मंत्रालय की साइबर एवं सूचना सुरक्षा डिविजन के सचिव ने देश की 10 सुरक्षा एजेंसियों को किसी के भी कंप्यूटर डेटा की जांच करने का अधिकार दे दिया है।
  • आईआईटी खड़कपुर के विधि छात्र सौरभ पांडेय ने दाखिल की है याचिका। याची का आरोप, देश को सर्विलांस स्टेट बनाना चाह रही है सरकार।
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प्रयागराज
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने देश की 10 सरकारी एजेंसियों को किसी के भी कंप्यूटर का डेटा चेक करने का अधिकार देने एवं सूचना तकनीक कानून की धारा 69 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट इस याचिका पर अब 1 फरवरी को सुनवाई करेगी। याचिका पर चीफ जस्टिस गोविंद माथुर तथा जस्टिस सीडी सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की। इसे आईआईटी खड़कपुर के विधि छात्र सौरभ पांडेय ने दाखिल किया है।
याची का कहना है कि सूचना तकनीकी ऐक्ट-2000 को 2008 में संशोधित किया गया। गृह मंत्रालय की साइबर एवं सूचना सुरक्षा डिविजन के सचिव ने 20 दिसंबर 2018 को धारा 69 नियम 4 के तहत आदेश जारी कर देश की 10 सुरक्षा एजेंसियों को किसी के भी कंप्यूटर डेटा की जांच करने का असीमित अधिकार दे दिया है। याचिका में धारा 69 को असंवैधानिक घोषित करने की मांग भी की गई है।

झांसी का कहना है कि एजेंसियों को कंप्यूटर डेटा की जांच का अधिकार देना संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। इसलिए यह मनमाना ही नहीं, अभिव्यक्ति की आजादी और निजता के मूल अधिकार के विपरीत भी है। याची का कहना है कि देश में गणतंत्र शासन प्रणाली है। यह लोकहित राज्य है, लेकिन केंद्र सरकार देश को कल्याणकारी राज्य की बजाय सर्विलांस स्टेट बनाना चाह रही है।

भारत सरकार के सहायक सॉलिसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति की और कहा कि ऐसे ही मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया और याची ने हाई कोर्ट रूल्स का पालन भी नहीं किया। इस आधार पर भी याचिका खारिज करने की मांग की। हालांकि कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
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