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बुंदेलखंड में गरीबों को सस्ता भोजन कैसे देंगे: हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दशकों से सूखे के चलते भुखमरी से पीड़ित बुंदेलखंड में गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे लोगों को सस्ते दर पर अनाज की बजाय कम दर पर पका भोजन उपलब्ध कराने की योजना लागू करने पर मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।

नवभारत टाइम्स 21 Feb 2018, 10:57 pm
इलाहाबाद
नवभारतटाइम्स.कॉम इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दशकों से सूखे के चलते भुखमरी से पीड़ित बुंदेलखंड में गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे लोगों को सस्ते दर पर अनाज की बजाय कम दर पर पका भोजन उपलब्ध कराने की योजना लागू करने पर मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। यही नहीं, कोर्ट ने कहा है कि यदि यह हलफनामा दाखिल नहीं होता तो वह 5 मार्च को हाजिर हों। यह आदेश जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस हर्ष कुमार की खण्डपीठ ने बुन्देलखण्ड हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार ने लखनऊ में 5 और 10 रुपये में भरपेट भोजन की कैंटीन खोली है। संसद और विधानसभा में सांसदों, विधायकों और सचिवालय अधिकारियों के लिए सस्ती दर की कैंटीन है। पीठ ने कहा कि गरीबों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराने में भारी सब्सिडी सरकार दे रही है। सब्सिडी बंद कर इसी को पका भोजन ग्राम पंचायत स्तर पर और फिर प्रत्येक गांव में उपलब्ध कराने की कोशिश करे जिससे बुंदेलखंड के गरीबों की भूख से मौत न हो सके।

कहा गया कि बुंदेलखंड के सात जिलों की 70 फीसदी आबादी 4500 गांवों में निवास करती है। सूखे से पीड़ित क्षेत्र के विकास के लिए सरकारों ने भारी अनुदान दिया है। बालू, पत्थर, ग्रैनिट से धनी क्षेत्र की जनता को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। खनन माफिया-अधिकारियों की मिलीभगत से भूगर्भ संपत्तियों का दोहन किया जा रहा है। चंबल, कुंवारी, पहुज, सिंध, बेतवा आदि नदियां होने के बावजूद पीने और सिंचाई के पानी की भारी कमी है। आदमी ही नहीं जानवरों का जीवन भी इस इलाके में मुश्किल हो गया है। इसलिए लोगों को एक, दो और पांच रुपये में भोजन की व्यवस्था की जाए जिससे लोग भूख से न मरने पाएं।

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