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300 लोगों ने दी शहादत, 100 वीरांगनाओं ने किया जौहर.. पैना के लोगों ने नहीं मंजूर की ईस्ट इंडिया कंपनी की गुलामी

देवरिया जिले के पैना गांव के बहादुरों ने 1857 अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया था । इस लड़ाई में सैकड़ों नौजवान शहीद हो गए थे और अपने सतीत्व की रक्षा करते हुए वीर नारियों ने जल समाधि ले ली थी। गांव में बना शहीद स्मारक और सतीहड़ा घाट शहादत का गवाह है

guest Kaushal-Kishor-Tripathi | Lipi 13 Aug 2022, 10:54 pm
देवरिया: देश की आजादी में देवरिया जिले के पैना गांव की वीर नारियों और रणबांकुरों के बलिदान का इतिहास साक्षी है। यहां के वीर सपूतों ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में ही अंग्रेजी हुकूमत से बगावत कर ब्रिटिश फौजों की रसद और हथियार लूट लिया था। इस घटना से बौखलाई अंग्रेजी हुकूमत ने पैना गांव पर चौतरफा हमला कर दिया। अंग्रेज सैनिक गांव में भयंकर लूटमार मचाते हुए बहू बेटियों पर भी भूखे भेड़ियों की तरह टूट पड़े थे।
नवभारतटाइम्स.कॉम शहीद स्थल
शहीद स्थल


गांव के बहादुरों ने अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया। इस लड़ाई में लगभग 300 लोग शहीद हुए और अंग्रेजों से अपनी अस्मिता बचाने के लिए 100 से अधिक बहू बेटियों ने जौहर कर लिया। पैना गांव में बना शहीद स्मारक और सतीहड़ा घाट आज भी इस घटना का गवाह है।

ईस्ट इंडिया कंपनी के आधिपत्य को नकारते हुए की थी बगावत
साल 1857 में बागी बलिया के वीर सपूत मंगल पांडेय ने स्वतंत्रता संग्राम की जो अलख जगाई थी उससे पूरे देश में उबाल आ गया था। रियासतें और जमींदारों ने भी अंग्रेजों को देश से मार भगाने की ठान ली। देवरिया मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर सरयू नदी के तट पर स्थित पैना गांव के लोगों ने भी ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिपत्य को नकारते हुए बगावत कर दिया। उस दौरान इस इलाके में अंग्रेजी सेना की प्रमुख छावनी आजमगढ़ में थी। गोरखपुर जिले का खजाना भी आजमगढ़ में ही रहता था।

क्रांतिकारियों ने लूट लिया था अंग्रेजों का रसद और हथियार
आजमगढ़ से नदी के रास्ते नाव से अंग्रेजी सेनाओं को रसद और हथियार की आपूर्ति की जाती थी। पैना गांव के क्रांतिवीरों ने सरयू नदी के रास्ते अंग्रेजों की रसद और हथियार लेकर जा रही नाव पर धावा बोलकर अंग्रेजों की रसद और हथियार लूट लिया तथा कई अंग्रेज सैनिकों को मार डाला। नरहरपुर स्टेट के राजा हरी सिंह ने पैना गांव के युवाओं के साथ मिलकर सरयू नदी के रास्ते अंग्रेजों के आवागमन को बंद करते हुए पानी के जहाजों के आने जाने पर रोक लगा दी। सिंगौली कंपनी प्रमुख मेजर होम्स को सलेमपुर से खदेड़कर अफीम कोठी पर कब्जा जमा लिया।

बौखलाए अंग्रेजों ने गांव पर किया था हमला

इन घटनाओं से बौखलायी ब्रिटिश हुकूमत ने पैना गांव को चारों तरफ से घेर कर हमला कर दिया। अंग्रेज सैनिक गांव में भयंकर मारकाट मचाई। पैना के जाबाजों ने खूब लोहा लिया और काफी संख्या में अंग्रेज सैनिकों को मार गिराया।मगर अंग्रेजी पलटन की संख्या अधिक थी। ऐसे में सैकड़ों वीर सपूत शहीद हो गए।

सतीत्व की रक्षा के लिए वीरांगनाओं ने ली थी जलसमाधि
अंग्रेज सैनिकों ने जब बहू-बेटियों को निशाना बनाना चाहा तो देश के स्वाभिमान और अपने सतीत्व की रक्षा के लिए गांव की सैंकड़ों वीरंगनाओं ने उफनाई सरयू नदी में छलांग लगा दी। बताया जाता है कि अंग्रेजों ने जल समाधि ले रही बहू-बेटियों पर इस कदर गोलियां बरसाई थी कि सरयू नदी का पानी लाल हो गया और चारों तरफ वीरांगनाओं के शव दिखाई पड़ रहे थे।

शहादत का गवाह है शहीद स्मारक और सतीहड़ा घाट
जिस स्थान पर गांव की बहू बेटियों ने अंग्रेजों से अपने सतीत्व की रक्षा के लिए जल समाधि ली थी। वह स्थान आज सतीहड़ा घाट के नाम से जाना जाता है। गांव के बाहर शहीदों की याद में स्मारक बनाया गया है। जो नयी पीढ़ी को अपने पूर्वजों के बलिदान की याद दिलाता रहता है। सतीहड़ा घाट पर भी हर वर्ष मेला भी लगता है। जो वीरांगनाओं के जौहर की याद दिलाता है।

रिपोर्टः कौशल किशोर त्रिपाठी

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