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निठारी का 'वो' नरभक्षी! 12वें केस में भी सजा-ए-मौत, सुरेंद्र कोली बोला- मेरे नसीब में फांसी ही है

जब थैलों में भरे नरकंकाल निकले तो अधिकारियों के होश फाख्ता हो गए। दोषियों के चेहरे का भी रंग उड़ गया था। निठारी कांड में 17 मामले दर्ज हैं। इनमें से 12 वें मामले में भी सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई गई है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 16 Jan 2021, 6:40 pm

हाइलाइट्स

  • निठारी कांड के 12वें मामले में सुरेंद्र कोली को दी गई फांसी की सजा
  • 319 दिनों तक सुनवाई के बाद गाजियाबाद की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सुनाई सजा
  • दोषी सुरेंद्र कोली पर 1 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है
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गाजियाबाद
नोएडा का निठारी कांड। साल 2006 में जब नोएडा के निठारी गांव की कोठी नंबर डी-5 से नरकंकाल मिलने शुरू हुए तो लोगों के होश उड़ गए। मामले की जांच कर रही सीबीआई टीम को जांच पड़ताल के दौरान मानव अंगों से भरे कई थैले मिले थे। 319 दिनों तक सुनवाई के बाद गाजियाबाद की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने युवती से दुष्कर्म और हत्या के 12वें मामले में दोषी करार दिए गए नौकर सुरेंद्र कोली को शनिवार को फांसी की सजा सुना दी।
दोषी पर 1 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। सजा के ऐलान के बाद सुरेंद्र कोली को वापस जेल ले जाया जा रहा था। इस बीच उसने कहा, 'मेरे नसीब में तो फांसी ही है।' निठारी मामले में कुल 17 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 12 मामलों में फैसला सुनाया गया। इन सभी में सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा दी गई है।

Nithari Murder case: नोएडा के निठारी कांड के 12 वें केस में सुरेंद्र कोली दोषी करार, सबूतों के अभाव में मोनिंदर सिंह पंढेर बरी
ऐसे हुआ था पूरे कांड का खुलासा
निठारी कांड के 12वें केस में शुक्रवार को सुरेंद्र कोली को दोषी करार दिया गया। हालांकि, सबूतों की कमी के चलते मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर दिया गया। बता दें कि निठारी कांड का खुलासा 7 मई 2006 को लापता लड़की पायल की वजह से हुआ था।

जब रातोंरात टल गई थी फांसी
9 सितंबर 2014, सुरेंद्र कोली को मेरठ जेल में फांसी दी जानी थी। कोली को मेरठ जेल की एक हाई सिक्यॉरिटी वाली बैरक में रखा गया। तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। इसी बीच सुरेंद्र कोली की फांसी पर रोक से संबंधित सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर जेल प्रशासन को तड़के तकरीबन 4 बजे मेरठ के डीएम के जरिए मिला। इस बात की जानकारी खुद तत्कालीन वरिष्ठ जेल अधीक्षक मोहम्मद हुसैन मुस्तफा ने दी थी।

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