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कानपुरः 'विभीषणों' की तलाश में SIT, शिवली थाने में 1990 से तैनात पुलिसकर्मियों का मांगा ब्योरा

हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद उसके संपर्क में रहने वाले पुलिस कर्मियों पर सिकंजा कसते की तैयारी हैl विभाग में छिपे विभीषणों का बचना मुश्किल है। एसआइटी ने शिवली थाने से 1990 से 2020 तक तैनात रहे पुलिस कर्मियों का मोबाइल नंबर समेत ब्यौरा माँगा हैl

Lipi 14 Jul 2020, 12:19 pm

हाइलाइट्स

  • विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद पुलिस और अपराधियों के गठजोड़ की जांच में लगी SIT
  • पुलिस विभाग के विभीषणों की तलाश, 1990 से शिवली थाने में तैनात कर्मियों का मांगा ब्योरा
  • विकास दुबे पर शिवली थाने में दर्ज सभी मुकदमों के बारे में भी SIT ने मांगी पूरी जानकारी
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नवभारतटाइम्स.कॉम मामले की जांच में जुटी एसआईटी
मामले की जांच में जुटी एसआईटी
कानपुर
कुख्यात अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद भी उत्तर प्रदेश के कानपुर के बिकरू गांव में दहशत बरकरार है। ग्रामीणों के मन से विकास के खौफ को बाहर निकालने के लिए बिकरू गांव में अस्थायी पुलिस चौकी खोली जा रही है। इसके बाद ग्रामीणों को शिकायत लेकर 18 किलोमीटर दूर चौबेपुर थाना नहीं जाना पड़ेगा। वहीं एसआईटी कानपुर एनकाउंटर की जांच में लग गई है।
मंगलवार को जांच टीम ने शिवली थाने में 1990 से अब तक तैनात रहे पुलिसकर्मियों का ब्यौरा मांगा है। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने साल 1990 में ही अपराध की दुनिया में एंट्री की थी। विकास को राजनीतिक संरक्षण और पुलिसकर्मियों की हमदर्दी ने प्रदेश का सबसे बड़ा अपराधी बना दिया था। इसका खामियाजा 3 अप्रैल को 8 पुलिसकर्मियों को अपनी जान गवां कर भरना पड़ा। दुबे के सबसे बड़े मददगार पुलिस महकमें के 'विभीषण' थे।

विभाग के विभीषण ही उसे बचाने का काम करते रहे। इसके साथ ही विभाग से जुड़ी हर एक गतिविधियों की जानकारी देते रहे। विकास को पकड़ने के लिए पुलिस जब कभी भी दबिश देने की तैयारी करती थी, पुलिस विभाग के ‘विभीषण’ विकास दुबे तक जानकारी पहुंचा देते।

विकास दुबे और पुलिस के कनेक्शन की जांच

एसआइटी की टीम ने बीते रविवार को शिवली थाने पहुंचकर विकास दुबे से संबधित फाइलों को खंगाला। विकास दुबे और पुलिस विभाग के विभीषणों के कनेक्शन का पता लगाने के लिए एसआइटी ने 1990 से 2020 तक शिवली थाने में तैनात रहे थानाप्रभारी, दरोगा, सीओ और सिपाहियों का मोबाइल नंबर समेत ब्योरा मांगा है। इसके साथ ही एसआईटी ने विकास दुबे के मुकदमों में क्या प्रगति रही, उनमें क्या रिपोर्ट लगाई गई और विकास के गुर्गो के खिलाफ क्या कार्रवाई गई, इसकी रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।

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शिवली थाने में दर्ज है 27 मुकदमे

हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का गढ़ शिवली रहा है। शिवली थाने में विकास दुबे पर 27 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से चार मुकदमे हत्या के हैं। चौबेपुर और बर्रा थाने में हत्या के एक-एक मुकदमों में उसका नाम है। विकास दुबे पर चौबेपुर थाने में 15 से अधिक एफआइआर दर्ज है। कल्यानपुर थाने में 10 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। विकास दुबे ने साल 2001 में तत्कालीन दर्जा प्राप्त मंत्री संतोष शुक्ला की शिवली थाने में घुसकर हत्या कर दी थी।


इस हत्याकांड के बाद विकास दुबे के बिकरू गांव को कानपुर नगर के चौबेपुर थाने से जोड़ दिया गया था। साल 2001 से पहले विकास दुबे का बिकरू गांव कानपुर देहात के शिवली थाना अंतर्गत आता था।

बिकरू गांव में खुलेगी चौकी
बिकरू गांव के ग्रामीणों के मन से विकास दुबे के नाम खौफ निकालने के लिए गांव में चौकी खोली जाएगी। विकास दुबे का एनकाउंटर हो गया है। इसके बाद भी उसकी दहशत कायम है। आज भी ग्रामीण उसके खिलाफ खुलकर बोलने में घबराते हैं। ग्रामीणों का कहना है जब तक उसके गुर्गे जिंदा हैं, हमे खतरा है। बिकरू समेत आसपास के ग्रामीणों को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए 18 किलोमीटर दूर चौबेपुर थाने जाना पड़ता था। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने बताया कि गांव में ग्रामीणों के मन से डर निकालने के लिए गांव में चौकी बनाई जाएगी। चौकी प्रभारी समेत स्टाफ तैनात किया जाएगा।

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