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लखीमपुर कांड पर योगी सरकार पर आक्रामक था विपक्ष, आरोपियों की पहचान होते ही BJP क्यों चढ़ बैठी?

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में दो दलित बहनों की हत्या मामले में विपक्षी दल कांग्रेस, सपा और बसपा लगातार योगी सरकार पर हमलावर थे लेकिन जैसे ही आरोपियों के नाम पुलिस ने उजागर किए, खेल बदल गया और अब बीजेपी विपक्ष पर चढ़ बैठी है।

Curated byराघवेंद्र शुक्ला | नवभारतटाइम्स.कॉम 15 Sep 2022, 1:45 pm
लखीमपुर खीरीः उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में दो सगी बहनों के साथ कथित रेप के बाद हत्या के मामले में सियासी माहौल गर्म है। बुधवार को वारदात के सामने आने के बाद गुरुवार सुबह से ही तमाम राजनैतिक दलों ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया था। इस बीच पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी छोटू समेत सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी और उनकी पहचान सामने आने के बाद मामले को लेकर सियासी अखाड़े का मंजर ही बदल गया है। अभी तक जो बीजेपी इस जघन्य घटना को लेकर निशाने पर थी और बैकफुट पर नजर आ रही थी, वही अब फ्रंटफुट पर खेलने लगी है। इतना ही नहीं, वह अब विपक्ष पर भी बरसने लगी है और यह आरोप लगाने लगी है कि 'तुष्टीकरण' के चक्कर में पूरा विरोधी खेमा सन्नाटे की शरण में चला गया है।
नवभारतटाइम्स.कॉम लखीमपुर कांड पर सियासत
लखीमपुर कांड पर सियासत


विपक्षी नेताओं के हमले
लखीमपुर के निघासन थाना क्षेत्र के गांव में दलित समुदाय की 2 बेटियों के साथ रेप और फिर हत्या किए जाने का झकझोरने वाला मामला सामने आने के बाद से ही विपक्ष के तमाम नेता योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरने में लगे थे। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने आलोचना करते हुए कहा कि योगी सरकार में गुंडे हर दिन मां-बहनों को प्रताड़ित कर रहे हैं। यह बहुत ही शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि लखीमपुर में किसानों के बाद अब दलितों की हत्या 'हाथरस की बेटी' हत्याकांड की जघन्य पुनरावृत्ति है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बलात्कारियों को रिहा करवाने और उनका सम्मान करने वालों से महिला सुरक्षा की उम्मीद की भी नहीं जा सकती। हमें अपनी बहनों-बच्चियों के लिए देश में एक सुरक्षित माहौल बनाना ही होगा। प्रियंका गांधी ने कहा कि रोज अखबारों और टीवी में झूठे विज्ञापन देने से कानून व्यवस्था अच्छी नहीं हो जाती। आखिर यूपी में महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध क्यों बढ़ते जा रहे हैं? कब जागेगी सरकार?'

विपक्ष हमलावर, केशव मौर्य की नसीहत
मायावती भी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि यूपी में अपराधी बेखौफ हैं क्योंकि सरकार की प्राथमिकताएं गलत। यह घटना यूपी में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा आदि के मामले में सरकार के दावों की जबर्दस्त पोल खोलती है। विपक्ष के लगातार हमले से बीजेपी की योगी सरकार बैकफुट पर थी। प्रदेश के डेप्युटी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि लखीमपुर खीरी में बेटियों के साथ दुष्कर्म कर हत्या करने वाले अपराधियों को जल्द गिरफ़्तार कर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। मुद्दा विहीन विपक्ष ऐसे मामलों में राजनीति न करे!

आक्रामक कैसे हो गई बीजेपी?
हालांकि, डेप्युटी सीएम की यह नसीहत काम नहीं आ रही है। मामले को लेकर जमकर राजनीति होने लगी है। दरअसल, लखीमपुर पुलिस ने गुरुवार को मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उजागर की और बताया कि इस घटना में जुनैद पुत्र इजराइल, सुहैल पुत्र इस्लामुद्दीन, हफीजुल रहमान पुत्र अजीजुर रहमान, करीमुद्दीन पुत्र कलीमुद्दीन, आरिफ उर्फ छोटे पुत्र अहमद हुसैन और छोटू पुत्र चेतराम को गिरफ्तार किया गया है।

अब भारतीय जनता पार्टी के नेता आरोपियों के धर्म को लेकर विपक्ष पर निशाना साधने लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी के विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने घटना को लेकर कई सिलसिलेवार ट्वीट किए हैं। उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा, 'लखीमपुर में दलित बच्चियों के गुनहगार - जुनैद, सुहैल, आरिफ़, हफ़ीज़, करीमुद्दीन!!' अपने एक अन्य ट्वीट में त्रिपाठी ने लिखा कि लखीमपुर में दलित बच्चियों के मुख्य गुनाहगार जुनैद को पुलिस मुठभेड़ में लगी गोली। बताया जा रहा कि पुलिस पर हमला कर भाग रहा था। डॉक्टरों के मुताबिक़ अब कभी भाग न पाएगा यह राक्षस!!


विपक्ष की चुप्पी पर पलटवार
जाहिर है कि उनके ट्वीट में आरोपियों की सांप्रदायिक पहचान पर ज्यादा जोर दिया गया है। उनके इस ट्वीट को भाजपा के नेता कपिल मिश्रा ने रिट्वीट किया है। उन्होंने लखा कि लखीमपुर में दलित बेटियों के साथ अपराध करने वाले पापियों का नाम सामने आने के बाद अब एक सन्नाटा पसर जाएगा। उनका निशाना विपक्ष की ओर है, जिसने इस मामले में सिर्फ ट्वीट करके चुप्पी साध ली है। हालांकि, इसी तरह के हाथरस और उन्नाव जैसे अन्य मामलों में विपक्ष ने खूब हल्ला मचाया था। कांग्रेस और सपा के बड़े नेताओं ने पीड़ित परिवार के गांव का दौरा भी किया था, जिसकी सुगबुगाहट भी इस मामले में नजर नहीं आ रही है।

यही कारण है कि घटना को लेकर जो बीजेपी सुबह तक बैकफुट पर थी, आरोपियों का नाम सामने आने के बाद वह आक्रामक हो गई है। चूंकि 6 में से 5 आरोपी मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में बीजेपी के नेता विपक्ष पर इस बात को लेकर निशाना साध रहे हैं कि आरोपियों के मुस्लिम होने के नाते विरोधी दलों के नेता मामले को लेकर उस तरीके से हमलावर नहीं होंगे, जैसा कि अन्य मामलों में होते हैं। कपिल मिश्रा ने इसी संदर्भ में 'सन्नाटा पसर जाएगा' वाला बयान दिया है। सच जो भी हो, अब पूरी घटना का मिजाज बदल गया है और यह सिर्फ रेप के बाद हत्या का मामला न होकर हिंदू-मुस्लिम सियासत का भी अखाड़ा बन गया है। जाहिर है कि इससे सत्ताधारी बीजेपी को कानून-व्यवस्था पर सवालों से बच निकलने और विपक्ष के हमलों पर पलटवार करने का रास्ता मिल सकता है।

विपक्ष पर बीजेपी के आरोप
मामले में दलित ऐंगल भी है। मृतका का ताल्लुक दलित समुदाय से है। बीजेपी की सरकार पर दलित विरोधी और मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगता रहा है। यही कारण है कि जब घटना सामने आई और पता चला कि पीड़िता दलित समुदाय से है, तो विपक्ष काफी आक्रामक नजर आया। प्रियंका गांधी, मायावती, अखिलेश, राहुल गांधी, एक के बाद एक कई नेताओं ने योगी सरकार को कटघरे में खड़े करना शुरू कर दिया लेकिन आरोपियों की पहचान जैसे ही उजागर हुई, वैसे ही कथित तौर पर विपक्षी खेमे में सन्नाटा पसर गया। बीजेपी के नेता तो विपक्ष पर यही आरोप लगा रहे हैं। चूंकि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जो कि बीजेपी सरकार के लिए प्लस पॉइंट है, ऐसे में पार्टी के नेता मामले में अब खुलकर खेलने लगे हैं और लगातार विपक्षी नेताओं पर तंज कस रहे हैं।
लेखक के बारे में
राघवेंद्र शुक्ला
राघवेंद्र शुक्ल ने लिखने-पढ़ने की अपनी अभिरुचि के चलते पत्रकारिता का रास्ता चुना। नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता में डिप्लोमा हासिल करने के बाद जुलाई 2017 में जनसत्ता में बतौर ट्रेनी सब एडिटर दाखिला हो गया। वहां के बाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन की लखनऊ टीम का हिस्सा बन गए। यहां फिलहाल सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रड्यूसर के पद पर तैनाती है। देवरिया के रहने वाले हैं और शुरुआती पढ़ाई वहीं हुई। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक की डिग्री है। साहित्यिक अभिरूचियां हैं। कविता-उपन्यास पढ़ना पसंद है। इतिहास के विषय पर बनी फिल्में देखने में दिलचस्पी है। थोड़ा-बहुत गीत-संगीत की दुनिया से भी वास्ता है।... और पढ़ें

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