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Shabnam Hanging News: शबनम की कॉलेज लाइफ का वो किस्सा! कर्ज उतार रहे उसके बेटे के कस्टोडियन, पढ़ें पूरी कहानी

Shabnam News in Hindi यूपी के अमरोहा का शबनम केस लगातार सुर्खियों में है। शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर (Shabnam Amroha Case) परिवार के सात सदस्यों की हत्या की थी। अब दोनों को फांसी (Shabnam Hanging News) होनी है। शबनम ने अपनी दया याचिका में 12 साल के बेटे के लिए सजा बदलने की गुहार लगाई हैं।

नवभारत टाइम्स 25 Feb 2021, 8:44 am

हाइलाइट्स

  • अमरोहा के बावनखेड़ी नरसंहार में शबनम और सलीम को फांसी की सजा
  • अभी डेथ वॉरंट नहीं जारी हुआ, सजा माफी के लिए लगाई है दया याचिका
  • शबनम के कॉलेज में जूनियर रहे उस्मान सैफी उसके बेटे के कस्टोडियन हैं
  • उस्मान का कहना है कि एक बार शबनम ने कॉलेज में उनकी भी मदद की थी
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शादाब रिजवी, मेरठ
यूपी के अमरोहा जिले के बावनखेड़ी नरसंहार कांड की दोषी शबनम अली की फांसी करीब है। हालांकि डेथ वॉरंट अभी नहीं आया है। दया याचिका की कवायद भी तेज है। इस बीच उसके बेटे के कस्टोडियन उस्मान सैफी का कहना है कि वारदात के वक्त कुछ भी हालात रहे हों, लेकिन शबनम कॉलेज के दिनों में सबके लिए मददगार साबित होती थी। वह मदद करती थी। मेरी भी मदद की थी। उसका अहसान मुझ पर है। हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़े थे। शबनम का कर्ज उतारने के लिए ही मैं उसके बेटे का कस्टोडियन बना। हालांकि ऐसा करने के लिए मुझे बड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
'शबनम पर मैं किताब लिखना चाहता था'
उस्मान सैफी भी अमरोहा के एक गांव के रहने वाले हैं। फिलहाल बुलंदशहर में रहते हैं। शबनम के बेटे की वह परवरिश कर रहे हैं। उस्मान एक अच्छे इंग्लिश मीडियम स्कूल में उसे पढ़ा रहे हैं। उस्मान सैफी का कहना है, 'शबनम से कॉलेज में मैं जूनियर था। शबनम अच्छे परिवार से थी। वह जरूरतमंदों की मदद करती थी। मैं उस पर किताब लिखना चाहता था। मैंने उससे जेल में मिलने के लिए करीब 24-25 बार कोशिश की। हर बार वह मिलने से इनकार कर देती थी। आखिर में एक बार उसने हां कहा और बाल कल्याण समिति की मदद से उसके बेटे का कस्टोडियन बनने का मौका मिल गया।'

'कॉलेज की फीस के नहीं थे पैसे, शबनम ने की मदद'
हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में उस्मान ने कहा था, 'कॉलेज में शबनम मुझसे दो साल सीनियर थी। हम एक ही बस से कॉलेज जाते थे। एक बार मैंने शबनम को बताया कि कॉलेज की फीस जमा करने के लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं। तब उसने मेरी मदद की थी। अगर शबनम ने मेरी सहायता नहीं की होती तो मुझे कॉलेज छोड़ना पड़ता। कम से कम उसके बच्चे की तो देखभाल मैं कर ही सकता हूं।'

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'मुझे शबनम की प्रॉपर्टी नहीं चाहिए'
14-15 अप्रैल 2008 को बावनखेड़ी गांव में शबनम ने अपने पिता, मां, दो भाई समेत परिवार के सात लोगों को मार डाला था। पिता के नाम पर प्रॉपर्टी शबनम को फांसी होने के बाद किसको मिले, इस पर बहस हो रही हैं। प्रॉपर्टी फिलहाल शबनम के चाचा के पास है। ऐसे में शबनम के बेटे के कस्टोडियन उस्मान का कहना है कि प्रॉपर्टी मुझे नहीं चाहिए, किसी सामाजिक संस्था को दे देनी चाहिए।

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फर्जी आईडी पर दिलाया था सिम
शबनम और सलीम के दिमाग में नरसंहार के पीछे साजिश की बात पुलिस ने मानी है। दोनों मोबाइल में दो-दो सिम कार्ड चलाते थे। सलीम ने दोनों सिम फर्जी आईडी पर ले रखे थे। नरसंहार की गुत्थी भी इन्हीं मोबाइलों से सुलझी थी। दोनों की कॉल डिटेल से खुलासा हुआ था कि कत्ल की रात दोनों के बीच 40 बार फोन पर बात हुई थी। शबनम के परिवार वालों ने मोबाइल छीना था तो सलीम ने उसे मोबाइल दिला दिया था।

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12 साल के बेटे ने की थी जान बख्शने की गुहार
जानकारी के मुताबिक शबनम ने दया याचिका में 12 साल के बेटे के लिए सजा बदलने की गुहार लगाई है। शबनम ने कहा है कि वारदात के वक्त वह गर्भवती थी, जेल में बेटे को जन्म दिया था। बेटा 6 साल 7 माह और 21 दिन उसके संग जेल में रहा था। बाल कल्याण समिति की मदद से शबनम के बेटे को 30 जुलाई 2015 को उस्मान सैफी को सौंपा था। इस बीच बेटा भी मां की सजा माफ करने के लिए राष्ट्रपति से गुहार लगा चुका हैं।

(टाइम्स ऑफ इंडिया से मिले इनपुट के साथ)

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