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वेस्ट यूपी में कांग्रेस का हुआ बुरा हाल, 14 सीटों पर जमानत जब्त

कांग्रेस वेस्ट यूपी में कहीं भी सियासी पकड़ नहीं बना सका। सहारनपुर और आगरा सीट को छोड़कर किसी भी सीट पर कांग्रेस दो अंकों तक वोट प्रतिशत हासिल नहीं कर सकी। उनके दिग्गजों की हालत और भी खराब रही। जनता ने उन्हें पसंद ही नहीं किया, जिसके चलते ज्यादातर की जमानत जब्त हो गई।

नवभारत टाइम्स 24 May 2019, 8:24 pm
शादाब रिजवी, मेरठ
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प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को मैदान में उतारकर चुनावी फतह करने की कांग्रेस की रणनीति धड़ाम हो गई। कांग्रेस का 'पंजा' वेस्ट यूपी में कहीं भी सियासी पकड़ नहीं बना सका। सहारनपुर और आगरा सीट को छोड़कर किसी भी सीट पर कांग्रेस दो अंकों तक वोट प्रतिशत हासिल नहीं कर सकी। उनके दिग्गजों की हालत और भी खराब रही। जनता ने उन्हें पसंद ही नहीं किया, जिसके चलते ज्यादातर की जमानत जब्त हो गई।

चुनाव से पहले एसपी-बीएसपी से गठबंधन की आस टूटने के बाद कांग्रेस ने प्रियंका गांधी और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत की परचम लहराने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनावी वैतरणी पार लगाने के लिए प्रभारी बनाकर यूपी में उतारा था। सिंधिया को वेस्ट यूपी और प्रियंका को पूर्वी यूपी का जिम्मा सौंपा था, लेकिन पूरे चुनाव सिर्फ प्रियंका जरूर जूझती दिखाई दीं। सिंधिया ने वेस्ट यूपी को खास तवज्जो नहीं दी।

सिंधिया ने प्रचार के नाम पर जरूर एक-दो सीट पर रोड शो किया। वह जमीन पर कांग्रेस के लिए काम करते नहीं दिखे। हालात ऐसे हो गए कि टिकट बटवारे में सिंधिया के दामन पर पैसे लेने के दाग तक लग गए। नजीता यह रहा कि कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह चित हो गई।

इन दो को छोड़ कोई दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सका

सहारनपुर में इमरान मसूद और फतेहपुर सीकरी में राज बब्बर के अलावा वेस्ट यूपी में कोई कैंडिडेट अपना वजूद नहीं दिखा सका। बरेली में जरूर पूर्व सांसद प्रवीन सिंह ऐरन ने दम दिखाया। बाकी वेस्ट यूपी की ज्यादातर सीटों पर अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। इनमें भी इमरान और राज बब्बर 2014 में खुद पाए वोटों का आंकड़ा भी नहीं छू सके।

'कांग्रेस का कोई दांव उसे नहीं बचा सका' मेरठ से पूर्व सीएम बनारसी दास के बेटे हरेंद्र अग्रवाल सिर्फ 34 हजार वोट हासिल कर सके। जो 2014 में कांग्रेस को मिले वोटों से भी कम है। कैराना से पूर्व एमपी और कद्दावर हरेंद्र मलिक 69 हजार वोट पा सके। पूर्व मंत्री ओमवती तो नगीना से 20 हजार वोटों में ही सिमट गई। बिजनौर से यूपी की सियासत में बड़ा नाम रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी 26 हजार पर ही सिमट गए। नौकरशाह से नेता बनीं प्रीति हरित आगरा से 44 हजार का आकड़ा ही बामुश्किल छू सकीं। मुरादाबाद से मशदूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी पर कांग्रेस का दांव लगाना भी ज्यादा कारगर नहीं रहा। वह भी अपनी जमानत नहीं बचा सके। उन्हें सिर्फ 69 हजार वोट मिले।

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