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मुजफ्फरनगरः 168 साल पुरानी पनचक्की का पिसा आटा खाते हैं यहां के लोग, 1850 में अंग्रेजों ने कराया था निर्माण

यूपी के मुजफ्फनगर जनपद के ग्राम निरगाजनी में अंग्रेजों के जमाने में स्थापित की गई पनचक्की आज भी वजूद में है। इस चक्की में दर्जनों गांव के ग्रामीण आटा पिसवाकर खाते हैं। इस चक्की में पिसे आटे में अनेक विशेषता हैं, जिसके चलते ग्रामीण दूसरी चक्कियों के मुकाबले इस चक्की का पिसा आटा खाना ही पसंद करते हैं, जबकि यहां पर आटा भी खुद ही पीसना पड़ता है।

Lipi 14 Sep 2021, 12:53 pm
मिर्जा गुलजार बेग, मुजफ्फरनगर
नवभारतटाइम्स.कॉम आज भी इस पनचक्की का पिसा आटा खाते हैं लोग
आज भी इस पनचक्की का पिसा आटा खाते हैं लोग

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के थाना भोपा क्षेत्र के ग्राम निरगाजनी में आज भी पानी से चलने वाली आटा चक्की चलती है। 168 साल पुरानी यह आटाचक्की अंग्रेजों ने 1850 में बनवाई थी। यह चक्की आज भी चल रही है और लोग इसका पीसा आटा खाते हैं। इससे पीसा हुआ आटा एकदम ठंडा होता है। इसे भारत की सबसे पुरानी चक्की माना जाता है। अभी तक कई पीढ़ियां लगातार इस चक्की का पिसा आटा खा रही हैं।

पनचक्की के पिसे आटे में हैं अनेक विशेषता
इस पनचक्की की विशेषता यह है कि नहर में पानी आने पर यह पानी से चलती है और इसका पिसा आटा ठंडा होता है, जो चार से छः महीने तक खराब नहीं होता। दूसरी विशेषता यह है कि इस पनचक्की में जो पत्थरों से आटा पिसा जाता है वह कुदरती पत्थर हैं जबकि आजकल की चक्कियों में मसाले से तैयार किए गए पत्थरों का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इस चक्की के पिसे आटे को खाने से पथरी जैसे अन्य रोग नहीं होते। साथ ही गेहूं के सभी गुण आटे में बने रहते हैं।

पनचक्की को बुजुर्गों की विरासत मानते हैं ग्रामीण
इस क्षेत्र के लोग इस पनचक्की को अपने बुजुर्गों की विरासत मानते हैं। सरकार ने भी इस ओर काफी ध्यान दिया है और इस पनचक्की का जीर्णोद्धार किया है। इस पनचक्की को देखने के लिए बहुत दूर-दूर से लोग भी आते हैं, जबकि मुजफ्फरनगर के आसपास के लोग तो यहां पर आटा पिसवाने के लिए आते हैं। लोगों के बीच इस चक्की को लेकर ऐसी भावना है कि इसका पिसा हुआ आटा खराब नहीं होता।

इस चक्की की एक और खास विशेषता है कि यहां पर तौलने के लिए कोई तराजू नहीं लगा हुआ है। यहां पिसाई 60 रुपए प्रति कुन्तल के हिसाब से होती है। इस चक्की में ग्राहक को खुद ही अपना आटा पीसना पड़ता है।

ऐसे काम करती है चक्की
मुजफ्फरनगर के थाना भोपा क्षेत्र के ग्राम निरगाजनी नहर पर बनी यह चक्की पानी से चलती है। नहर का पानी लोहे के बड़े-बड़े पंखों के ऊपर गिरता है, जिससे कि वो घूमते हैं और चक्की चलती है। यहां पर छह चक्कियां लगी हुई है, जो कि एक घंटे में लगभग दो सौ चालीस किलोग्राम गेहूं कि पिसाई कर देती है। यह चक्की सिंचाई विभाग के अधीन आती है, जो उसे सालाना ठेके पर देता है। इस पनचक्की पर आटा पिसवाने के लिए जनपद मुजफ्फरनगर के निरगाजनी से लगे हुवे करीब तीन दर्जन से अधिक गांव आटा पीसने आते है।

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