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सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले प्रांजल की मदद अजनबी लड़की ने की, अस्पतालों ने मुंह फेरा

सेक्टर-16 स्थित रजनीगंधा अंडरपास के ऊपर शुक्रवार को डीटीसी बस की चपेट में आने से यूपी बोर्ड की परीक्षा देने जा रहे 10वीं के छात्र प्रांजल की मौत हो गई। घटनास्थल पर मौजूद एक अनजानी लड़की ने प्रांजल के सिर से बह रहे खून को रोकने के लिए अपना दुपट्टा उतारकर उसके सिर पर बांधा।

नवभारत टाइम्स 10 Feb 2018, 12:26 pm
नोएडा
नवभारतटाइम्स.कॉम सांकेतिक चित्र
सांकेतिक चित्र

सेक्टर-16 स्थित रजनीगंधा अंडरपास के ऊपर शुक्रवार को डीटीसी बस की चपेट में आने से यूपी बोर्ड की परीक्षा देने जा रहे 10वीं के छात्र प्रांजल की मौत हो गई। इससे पहले मौके पर मौजूद एक अनजान लड़की ने अपने दुपट्टे से सड़क पर तड़प रहे प्रांजल के सिर से बह रहे खून को रोकने की कोशिश की। वहीं, आरोप है कि मैक्स और कैलाश अस्पताल ने घायल को भर्ती नहीं किया।

घटनास्थल पर मौजूद एक अनजानी लड़की ने प्रांजल के सिर से बह रहे खून को रोकने के लिए अपना दुपट्टा उतारकर उसके सिर पर बांधा। इसके बावजूद खून नहीं रुका तो वह अपने दोनों हाथों से उसका सिर दबाकर बैठ गई। प्रांजल के मौसेरे भाई प्रिंस के मुताबिक, जब तक वे ऑटो लेकर पहुंचे, वह लड़की प्रांजल का सिर पकड़े बैठी थी।

पढ़ें: निजी अस्पतालों ने घायल छात्र को भर्ती करने से किया इनकार, हुई मौत


प्रांजल के दोस्त तालिम के मुताबिक, शुक्रवार सुबह 7:30 बजे से इंग्लिश का पेपर था। वह प्रांजल, प्रिंस, अभिषेक, आशु और अर्जुन सुबह करीब 6 बजे छलेरा व भंगेल के अपने सेंटर के लिए निकले। प्रांजल अपने पापा की मोपेड चला रहा था, वह पीछे बैठा था। रजनीगंधा अंडरपास के ऊपर मोपेड डीटीसी बस से टकरा गई। घटना के वक्त प्रांजल के हाथों में हेल्मेट था। दोस्त उसे ऑटो में डालकर पहले मैक्स, फिर कैलाश व अंत में जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल के सीएमएस ने बताया कि जब प्रांजल को लाया गया था, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

प्रांजल के 5 दोस्तों की दसवीं की परीक्षा छूट गई। छात्रों ने बताया कि पुलिस वालों ने कहा कि ड्राइवर को सजा दिलाने के लिए उनके बयान होने हैं। कहीं जाना नहीं है। सेक्टर 19 चौकी इंचार्ज ने कहा कि हमने घायल को अस्पताल पहुंचाने को कहा था। परीक्षा छोड़ने के लिए कहने की बात ठीक नहीं है। प्रांजल के मौसेरे भाई प्रिंस के मुताबिक, मैक्स हॉस्पिटल वालों ने कहा कि घायल की हालत ज्यादा खराब है। इसे कैलाश अस्पताल ले जाओ। कैलाश पहुंचे तो वहां इमरजेंसी वॉर्ड में मौजूद डॉक्टर ने कहा कि एक्सरे मशीन खराब है। आप जिला अस्पताल ले जाओ।

वी. बी. जोशी, प्रवक्ता, कैलाश अस्पताल ने कहा, बच्चे गलत आरोप लगा रहे हैं। पिछले 30 वर्षों में हमने किसी घायल को वापस नहीं भेजा। हमारी सारी मशीनें एकदम ठीक हैं और डॉक्टरों की भी कोई कमी नहीं है।

मैक्सकेयर हेल्थ अथॉरिटी के प्रवक्ता ने कहा, हमारे अस्पताल में एमआरआई और सीटी एमआर की मशीन उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए अटेंडेंट को सलाह दी गई कि आसपास के किसी दूसरे अस्पताल में सीटी स्कैन करवा सकते हैं। उन्हें 2-3 अस्पतालों के नाम भी बताए गए।

बचाई जा सकती थी जान
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक, सड़क हादसे में घायल को प्राइवेट या सरकारी अस्पताल लीगल केस या सुविधाओं की कमी के आधार पर भर्ती करने से इनकार नहीं कर सकता। उन्हें अनिवार्य रूप से घायल को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवानी ही होगी।

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