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नोएडा को ओडीएफ ++ का तमगा, जमीनी बदलाव के लिए अभी करें इंतजार

नोएडा अथॉरिटी की 5 महीने की मशक्कत के बाद शहर को ओडीएफ प्लस प्लस का सर्टिफिकेट अर्बन मिनिस्ट्री ने जारी कर दिया है। अब इस सर्टिफिकेट के मिलने से ...

Navbharat Times 9 Mar 2020, 8:00 am

प्रमुख संवाददाता, नोएडा : नोएडा अथॉरिटी की 5 महीने की मशक्कत के बाद शहर को ओडीएफ प्लस प्लस का सर्टिफिकेट अर्बन मिनिस्ट्री ने जारी कर दिया है। अब इस सर्टिफिकेट के मिलने से स्वच्छता सर्वेक्षण में नोएडा के टॉप रैंक में आने के आसार भी बढ़ गए हैं। हालांकि जमीनी बदलाव के लिए अभी इंतजार करना होगा। बता दें कि नोएडा को यह सर्टिफिकेट जरूर मिल गया है पर जरूरत के मुताबिक अभी करीब 200 कम्युनिटी टॉइलट की जरूरत है। सैकड़ों लोग अभी भी खुले में शौच जा रहे हैं। पूरे देश में मिनिस्ट्री ने 481 (यूएलबी)अर्बन लोकल बॉडी (अथॉरिटी, नगर निगम, नगर पालिका व अन्य) को अब तक ओडीएफ प्लस प्लस का तमगा दिया है। इनमें से 18 यूपी से हैं। इनमें नोएडा के अलावा गाजियाबाद, अलीगढ़, मोदीनगर, झांसी, सहारनपुर, देहरादून, लखनऊ, कन्नौज, कानपुर, आगरा, मथुरा, वाराणसी व अन्य शहर शामिल हैं।

एनबीटी ने उठाया था नोएडा का मुद्दा

ओडीएफ प्लस प्लस का सर्टिफिकेट देने के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत जो मानक बने हैं। शहर में उनकी जमीनी हकीकत क्या हैं। अक्टूबर में ही एनबीटी से इस मुद्दे को उठाया था। इसके अथॉरिटी ने काफी सक्रिय होकर काम किया है। इसका फायदा रहा कि शहर में मौजूद शौचालयों के रखरखाव को बेहतर बनाए रखने की प्राथमिकता दी गई। सर्टिफिकेट मिलने का परिणाम यह होगा कि स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार नोएडा की रैंक तो अच्छी आएगी, लेकिन जमीनी बदलाव के लिए इंतजार करना होगा।

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क्या कहते हैं जानकार

पिछले दो-तीन साल से स्वच्छता सर्वेक्षण का फोकस क्वालिटी क्लाइमेट से हटकर रैंकिंग के जरिये शहरों की ब्रांडिंग पर फोकस हो गया है। पिछले साल गाजियाबाद की 13 नंबर रैंक आई थी। मैंने गाजियाबाद के मुद्दे को उठाया था। जहां सड़कों पर कूड़े के अंबार नजर आते हों। उसे किस आधार पर टॉप रैंक में रखा गया है। ओडीएफ को लेकर भी देशभर में ऐसी ही स्थिति है। काम तो हो रहे हैं, लेकिन स्थिति यह है काम 20-25 प्रतिशत हो रहे हैं और तमगा 80-85 प्रतिशत काम का मिल रहा है। यह कागजी आंकड़े पब्लिक और पर्यावरण को धोखा देने वाले हैं।

-डॉ. अनिल पी जोशी, एन्वायरमेंटलिस्ट (पद्म श्री, पद्म भूषण)

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स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत हर साल जिन शहरों को ओडीएफ या ओडीएफ प्लस प्लस किया जा रहा है। हमारी स्टडी के मुताबिक वहां बदलाव तो नजर आ रहे हैं। ऐसे शहरों में कुछ स्थानों पर रिजल्ट बहुत अच्छा है तो कुछ जगह सिर्फ कागजी है। सबसे बड़ा सवाल फीकल मैनेजमेंट का है। अगर टॉइलट बनाने के बाद उसका कनेक्शन सीवर से नहीं है और मल नाले या सीधे जमीन में जा रहा है तो पर्यावरण को उससे उतना ही नुकसान है जितना खुले में शौच करने से है। प्राथमिकता पर्यावरण की बेहतरी से ज्यादा शहरों के स्टेटस सिंबल बनाने पर फोकस हो गई है।

-सुष्मिता सेन गुप्ता, विशेषज्ञ, सीएसई (सेंटर फॉर साइंस एन्वायरमेंट)

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