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बैंक खाते में सेंध लग गई है? घबराइए नहीं, इन नंबर्स पर तुरंत कॉल कीजिए... वापस मिल जाएंगे पैसे

साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं या फिर ड्रग स्मगलिंग की सूचना पुलिस को देनी है? इसके लिए अब आपको पुलिस थानों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। पुलिस विभाग ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है जिससे घर बैठे आप पुलिस की मदद ले सकते हैं।

Edited byराघवेंद्र शुक्ला | नवभारत टाइम्स 16 Feb 2023, 10:25 am
नोएडाः साइबर ठगी होने पर अब आपको शिकायत लेकर एक थाने से दूसरे में भटकने की जरूरत नहीं होगी। कमिश्नरेट पुलिस की ओर से जारी साइबर हेल्पलाइन नंबर पर आप शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत मिलते ही पुलिसकर्मी तुरंत ऐक्शन लेंगे और आपके खाते से निकली रकम को वापस दिलाने की कोशिश करेंगे। बता दें कि साइबर क्राइम और ड्रग्स तस्करी रोकने और जल्दी जांच कर कार्रवाई के लिए कमिश्नरेट पुलिस ने नई व्यवस्था शुरू की है।
नवभारतटाइम्स.कॉम सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर


साइबर हेल्पलाइन 0120- 4846100, नारकोटिक्स हेल्पलाइन 0120- 4846101 हैं। इन नंबरों पर फोन कर 24 घंटे घर बैठे पुलिस की मदद ली जा सकेगी। हेल्पलाइन की सुविधा का शुभारंभ बुधवार को पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने किया। इस मौके पर कमिश्नर ने कहा कि दोनों हेल्पलाइन के साथ सेक्टर-108 ऑफिस में हेल्पडेस्क भी बनाई गई है। साइबर क्राइम के पीड़ित को केस दर्ज करवाने या जांच करवाने के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा।

खाते से निकल रकम फ्रीज करवाना पहला लक्ष्य
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि जो साइबर हेल्पडेस्क सेक्टर-108 स्थित कमिश्नरेट मुख्यालय में बनाई गई है यह साइबर फ्रॉड व क्राइम पीड़ित के लिए पहला और आखिरी ठिकाना होगा। साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है। देखने में आता था कि पीड़ित शिकायत लेकर थाने जाता है तो वहां पर बने साइबर हेल्पडेस्क से जोनल ऑफिस में भेजा जाता है। वहां पर भी बैठा स्टाफ अगर शिकायत नहीं समझ पाता तो आगे जाने के लिए बोल देता है।

अब ऐसा नहीं होगा। हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायत पर केंद्र के साइबर क्राइम पोर्टल हेल्पलाइन 1930 की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही शिकायत पर तुरंत जांच शुरू करवा दी जाएगी। कोशिश होगी कि ठगी के 24 घंटे के अंदर अकाउंट से निकाली गई रकम जिस भी अकाउंट में है उसे चिह्नित कर फ्रिज करवा दी जाए। इसके साथ ही हेल्पडेस्क पर साइबर क्राइम जांच में ज्यादा प्रशिक्षित स्टाफ लगाया गया है। ये साइबर क्राइम से बचाव को भी जागरूक करेगा। इस सेल का प्रभारी एसीपी वर्णिका सिंह को बनाया गया है।

बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल भेजी गई टीम

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि 2022 में कमिश्नरेट में 7800 के करीब केस सामने आए। पुलिस एक करोड़ रुपये की धनराशि सीज करवाकर वापस भी लाई। इन सभी की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई। पहले के वर्षों के भी बहुत से केस में जांच पेंडिंग है। समीक्षा की गई तो सामने आया कि कुछ अधिकारियों को पूरी जानकारी नहीं है कि जांच आगे कैसे बढ़ाई जाए। वहीं गौतमबुद्ध नगर में ज्यादा साइबर क्राइम बिहार, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में अलग-अलग ठिकानों पर बैठकर अपराधी कर रहे हैं। इसलिए वहां जाकर जांच करना जरूरी था। आगे भी जांच न रुके और तेजी से हो इसके लिए 14-14 जांच अधिकारियों की तीन टीमें बनाकर इन राज्यों में भेजी गई हैं। ये वहां जाकर स्थानीय पुलिस के साथ सामंजस्य बनाकर जांच और कार्रवाई तेजी से करेंगे।

ड्रग्स सप्लाई की चेन तोड़ेगी पुलिस
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि कॉलेज, यूनिवर्सिटी के बाहर व अन्य जगहों पर नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतें शुरुआत में मिली थी। इस पर जांच करवाई गई तो सही पाया गया। युवा पीढ़ी नशे से दूर रहे इसके लिए नॉरकोटिक्स हेल्पलाइन- 0120- 4846101 और कमिश्नरेट मुख्यालय सेक्टर-108 में हेल्पडेस्क भी बनाई गई है। इस हेल्प डेस्क की प्रभारी डीसीपी क्राइम होंगी। शहर के निवासियों के पास मादक पदार्थों की बिक्री से जुड़ी कोई सूचना हो तो वह पुलिस को बताएं। इसके लिए अलग से टीमें बनाई गई हैं जो सूचना पर तेजी से छापेमारी और कार्रवाई करेंगी। सूचना देने वाले का नाम भी गोपनीय रखा जाएगा।

ऐप से लेकर डार्क वेब तक फैला जाल
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ड्रग्स सप्लाई की दो चेन चिह्नित हुई हैं। एक ईस्टर्न और दूसरी वेस्टर्न (पुलिस की गोपनीय भाषा) हैं। यह सामने आया है कि शहर में नशे के सौदागर ऐप का सहारा ले रहे हैं। इसके साथ ही डार्क वेब तक से डेटा उपलब्ध हो रहा है। पुलिस की जांच वहां तक पहुंच रही है। कमिश्नर ने जोर देकर कहा कि ड्रग्स सप्लाई की ये चेन पुलिस तोड़ेगी और इसमें शामिल अपराधी सलाखों के पीछे होंगे। बताया कि पिछले दो महीने में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े 89 केस दर्ज हुए। इनमें 92 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।
लेखक के बारे में
राघवेंद्र शुक्ला
राघवेंद्र शुक्ल ने लिखने-पढ़ने की अपनी अभिरुचि के चलते पत्रकारिता का रास्ता चुना। नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता में डिप्लोमा हासिल करने के बाद जुलाई 2017 में जनसत्ता में बतौर ट्रेनी सब एडिटर दाखिला हो गया। वहां के बाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन की लखनऊ टीम का हिस्सा बन गए। यहां फिलहाल सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रड्यूसर के पद पर तैनाती है। देवरिया के रहने वाले हैं और शुरुआती पढ़ाई वहीं हुई। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक की डिग्री है। साहित्यिक अभिरूचियां हैं। कविता-उपन्यास पढ़ना पसंद है। इतिहास के विषय पर बनी फिल्में देखने में दिलचस्पी है। थोड़ा-बहुत गीत-संगीत की दुनिया से भी वास्ता है।... और पढ़ें

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