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Noida Viral Fever News: केवल बुखार न समझें, डेंगू, स्क्रब टाइफस या लेप्टोस्पायरोसिस भी हो सकता है

नोएडा जिला अस्पताल में इन मरीजों की संख्या 50-55 से बढ़कर 70 के करीब पंहुच गई है। जिला अस्पताल में इस समय बुखार के 4 मरीज भर्ती हैं। सीएमओ रिपोर्ट के मुताबिक तीन दिन पहले डेंगू के सिर्फ 2 केस थे। 2 दिन में 11 केस और मिल गए हैं।

Edited byसुधाकर सिंह | नवभारत टाइम्स 19 Sep 2021, 3:49 pm
नोएडा
नवभारतटाइम्स.कॉम FEVER
प्रतीकात्मक तस्वीर

बुखार को साधारण बुखार समझकर इलाज न करते रहें, अन्यथा स्थिति बिगड़ सकती है। आईसीएमआर ने बुखार को डेंगू, स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पायरोसिस का नाम दिया है। आईसीएमआर के मुताबिक मरने वालों में इन तीनों बीमारी के लक्षण थे। ये तीनों वायरस एक दूसरे से मिलते जुलते हैं। इसलिए पहचानना मुश्किल होता है।

अस्पतालों में बुखार के मरीज लगातार आ रहे हैं। नोएडा जिला अस्पताल में इन मरीजों की संख्या 50-55 से बढ़कर 70 के करीब पंहुच गई है। जिला अस्पताल में इस समय बुखार के 4 मरीज भर्ती हैं। सीएमओ रिपोर्ट के मुताबिक तीन दिन पहले डेंगू के सिर्फ 2 केस थे। 2 दिन में 11 केस और मिल गए हैं। वहीं शुक्रवार को जिला अस्पताल में की गई 49 जांचों में 1 मरीज डेंगू पॉजिटिव आया है। 17 सितंबर को जारी सीएमओ रिपोर्ट के मुताबिक जिले में स्क्रब टाइफस के 3 केस मिले थे जो अब ठीक हो चुके हैं। लेप्टोस्पायरोसिस के अब तक कोई मरीज नहीं मिले हैं। सीएमओ डॉ सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि जिन इलाकों में डेंगू, मलेरिया के मरीज मिलते हैं, इन इलाकों में फॉगिंग करवाई जाती है। फॉगिंग का काम नोएडा और ग्रेनो में लगातार हो रहा है। जब तक बुखार, डेंगू, मलेरिया के मरीज मिलते रहेंगे फॉगिंग का काम चलता रहेगा।

क्या हैं ये बीमारियां
स्क्रब टाइफस : डॉक्टरों ने बताया कि यह समस्या एक कीड़े के काटने से होती है। यह कीड़ा बहुत छोटा होता है। कई बार यह दिखता भी नहीं है। इसके अंदर एक बैक्टीरिया होता है। उसके काटने से यह इंफेक्शन होता है। इसमें बुखार, शरीर दर्द, सिर दर्द की समस्या होती है। यह समस्या एक दूसरे से नहीं फैलती है।

डेंगू : डेंगू में बुखार के साथ हाथ-पैर में दर्द रहता है। इंसान को भूख कम लगने लगती है। जी मचलाना और उल्टी करने की टेंडेंसी भी हो सकती है।

लेप्टोस्पायरोसिस : लेप्टोस्पायरोसिस एक संक्रमण है जो लेप्टोस्पाइरा कहे जाने वाले कॉकस्क्रू-आकार के बैक्टीरिया से फैलता है। लक्षणों में हल्का सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और बुखार से लेकर फेफड़ों से रक्तस्राव या दिमागी बुखार जैसे गंभीर लक्षण शामिल हो सकते हैं।

जांच सुविधा उपलब्ध है : वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया, स्क्रब टाइफस के मरीजों की जांच के लिए सेक्टर 30 स्थिति जिला अस्पताल, चाइल्ड पीजीआई समेत सीएचसी, पीएचसी मिलाकर कुल 8 स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच की सुविधा उपलब्ध है। रैपिड टेस्ट में डेंगू की पुष्टि हो जाती है तब कंफर्म करने के लिए एलाइजा टेस्ट किया जाता है।

इन दिनों बच्चों में बुखार की समस्या लगातार देखने को मिल रही है। बच्चों के साथ नवजातों में भी इंफेक्शन की संभावना हो सकती है। अभिभावक इस बारे में चिंतित हो रहे हैं। हालांकि डॉक्टर ने कहा कि नवजातों में जल्दी डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड की समस्या देखने को नहीं मिलती है, लेकिन उन्हें शारिरिक रूप से अंदरूनी इंफेक्शन हो सकता है। इसके लिए सावधानी बरतें। नवजात को इंफेक्शन से मां का दूध बचा सकता है।

बुखार की बजाय नवजात को हाइपोथर्मिया होता है
सेक्टर 30 स्थित चाइल्ड पीजीआई की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रुचि रॉय ने बताया कि अस्पताल में नवजात शिशुओं में बुखार और इंफेक्शन की समस्या अधिक देखने को नहीं मिल रही है, लेकिन सावधानी बरतने की जरूरत है। नवजातों में सीजनल समस्याएं कम देखने को मिलती हैं। नवजातों में इम्युनिटी डेवेलप नहीं होती इसलिए इनको जल्दी बुखार भी नहीं आता है। बुखार आने की बजाय इनको हाइपोथर्मिया हो जाता है। जिसमें शरीर ठंडा हो जाता है। मेरे कार्यकाल में अबतक किसी नवजात में डेंगू देखने को नहीं मिला है। मलेरिया के केस भी बहुत कम होते हैं।

खून में हो जाता इंफेक्शन : डॉ. रुचि ने बताया कि नवजात शिशुओं में इंफेक्शन देखने से पता नहीं चल पाता, इसे सिर्फ डॉक्टर ही पता कर पाते हैं। ऊपर से शिशु स्वस्थ लगता है। कभी-कभी शरीर में लाल दाने, इन दानों में मवाद भरा होता है।

इंफेक्शन से बचाव के लिए
- डिब्बाबंद दूध नहीं मां का दूध पिलाएं।
- जब तक बच्चा छह महीने का न हो ऊपर का दूध, घुट्टी, शहद कुछ नहीं देना।
- मौसम के मुताबिक नहलाएं, नहीं तो शरीर को गीले कपड़े से पोंछ दें।
- नाभि में कोई तेल, पाउडर या दवाई न लगाएं।
- स्तनपान कराने से पहले हाथ धुलें
- मल मूत्र साफ करने से पहले हाथ अच्छी तरह धो लें।
लेखक के बारे में
सुधाकर सिंह
साहिल के सुकूं से किसे इनकार है लेकिन तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है...लिखने-पढ़ने का शौक पत्रकारिता की दुनिया में खींच लाया। पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज़िले से ताल्लुक़। पढ़ाई लखनऊ विश्वविद्यालय से और पत्रकारिता में ईटीवी से शुरुआत। सियासत को इतिहास और वर्तमान को अतीत के आईने में देखने की दिलोदिमाग़ में हसरत उठती रहती है। राजनैतिक-ऐतिहासिक शख़्सियतों और घटनाओं पर लिखने की ख़ास चाहत। डिजिटल दुनिया में राजस्थान पत्रिका से सफ़र का आग़ाज़ करने के बाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में मंज़िल का नया पड़ाव।... और पढ़ें

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