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सोनभद्र: नगर पालिका का खसरा रजिस्टर हुआ गायब, दो सालों में बढ़े जमीनी विवाद के मामले

सोनभद्र नगर पालिका परिषद का वर्ष 1940-41 का खसरा आबादी रजिस्टर कार्यालय से बीते 12 फरवरी 2018 को चोरी हो चुका है। खसरा रजिस्टर गायब होने की तहरीर राबर्ट्सगंज कोतवाली में दी। मगर दो वर्ष बाद भी खसरा रजिस्टर के सम्बंध में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

Edited byविश्व गौरव | Lipi 24 Sep 2021, 9:14 pm
ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी, सोनभद्र
नवभारतटाइम्स.कॉम 2222

सोनभद्र नगर पालिका परिषद का खसरा रजिस्टर बीते 12 फरवरी 2018 को चोरी हो चुका है। गायब हुए रजिस्टर को लेकर नगर पालिका प्रशासन द्वारा विभागीय जाँच के साथ रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में 4 मार्च 2018 को एफआईआर दर्ज भी कराई गई थी। लेकिन रजिस्टर किसने गायब करवाया, रजिस्टर कहां गया, इस तरह के कुछ अन्य सवालों को लेकर जिम्मेदार आज भी चुप्पी साधे हुए हैं। वही नगर पालिका क्षेत्र में जमीनों के कब्जे में हेरफेर दिखाकर कथित तौर पर कुछ रसूखदारों को लाभ पहुँचाने के लिए रजिस्टर गायब किए जाने की चर्चा आज भी नगर में बनी हुई है।

नगर पालिका के वार्ड नं- 5 मछ्ली गली निवासी जितेन्द्र कुमार का कहना है कि आराजी संख्या, 1492 में अपने बाप- दादा के जमाने से घर मकान बनाकर कई वर्षों से रह रहा हूँ। जबकि विपक्षी सुरेश कुमार पुत्र पारस केशरी निवासी कस्बा रॉबर्ट्सगंज जिला सोनभद्र द्वारा नजूल की जमीन आराजी संख्या, 1493 का हिस्सा मानकर कब्ज़ा करने का प्रयास कर रहे है। भूमि विवाद को लेकर हुई मौके पर मारपीट के बाद पहुँची पुलिस ने बगैर कागजों की जाँच के ही एकपक्षीय कार्रवाई कर सुरेश साहनी सहित उनके परिवार के पाँच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस हिरासत मे लेने के लिए छापेमारी भी कर रही है। मौका देखकर सुरेश केशरी द्वारा मकान पर अवैध कब्जा करके निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है।

वहीं युवा समाजसेवी गिरीश पाण्डेय का कहना है कि नजूल की खसरा खतौनी नगर पालिका से गायब होने से नगर में भूमि विवाद चरम पर है। जहाँ खाली जगह मिल रहा वहां पर लोग अतिक्रमण कर ले रहे है। चुकी दस्तावेज न होने से मालिकाना हक नही दिखा पा रहे है। दबंग किस्म के व्यक्ति नगर में पैसे के दम पर जमीन कब्जा कर रहे है। वही मौजूदा नगर पालिका अध्यक्ष के द्वारा भी अपने निजी होटल के सामने भी काफी अतिक्रमण कर चुके है। रजिस्टर गायब कर जमीनों के खरीद फरोख्त हो रहा है। अगर समय रहते प्रशासन गंभीरता से संज्ञान नही लेंगी तो एक दिन नगर में उम्भा जैसी घटना कभी भी हो सकती है।

नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी प्रदीप गिरी का कहना है कि खसरा - खतौनी रजिस्टर गायब होने का प्रकरण उनके समय का नहीं है। उनकी यहां तैनाती से पहले रजिस्टर गायब हुआ था। नगर पालिका की नजूल की जमीन का पता लगाने के लिए सर्वे कराया जा रहा है।
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