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UP की स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल, बदहाली पर आंसू बहा रहा हरदोई का जिला अस्पताल

हरदोई का जिला अस्पताल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है, पीडियाट्रिक वार्ड में लगे वेंटिलेटरों को चलाने के लिए टेक्नीशियन नहीं हैं,ओपीडी में चिकित्सक समय से नहीं बैठते, आयुष विंग बिना दवाइयों के ही चल रहा है।

Lipi 13 Jun 2021, 6:10 pm
सुधांशु मिश्र, हरदोई
नवभारतटाइम्स.कॉम 2222

एक ओर जहां कोरोना की तीसरी लहर की संभावना देखते हुए प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को चुस्त दुरुस्त करने के निर्देश सभी जिलों के सीएमओ को जारी किए हैं, लेकिन हरदोई में इन निर्देशों को हवा में उड़ाया जा रहा है। जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने के बावजूद पंडित दीनदयाल त्रिवेदी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है। यहां वेंटिलेटर हैं पर टेक्नीशियन नहीं, ओपीडी में कभी भी समय से चिकित्सक नहीं बैठते, आयुष विंग बिना दवाएं ही चल रहा है।

जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों को भर्ती किया जाता है। यहां पर बच्चों के लिए पांच वेंटिलेटर पहले से थे वहीं दस नए छोटे वेंटिलेटर भी आ गए हैं, लेकिन इन्हें चलाने के लिए टेक्नीशियन ही नही हैं। जिस कारण वेंटिलेटर शोपीस बनकर रह गए हैं। पिछले दिनों जिले की नोडल अधिकारी ने अस्पताल का निरीक्षण किया था, जिसमें पीडियाट्रिक वार्ड में कई खामियां मिली थी। साथ ही वेंटिलेटर चादरों से ढके हुए थे। वेंटिलेटर की चादरें तो हट गई, लेकिन अन्य खामियों को अभी तक दूर नहीं किया जा सका है। बच्चों के बेहतर इलाज के दावे तो बहुत किए जा रहे हैं, पर हकीकत में बच्चे और तीमारदार परेशान ही होते हैं।

ओपीडी में मरीजों को चिकित्सकों का घंटों इंतजार करना होता
अस्पताल की ओपीडी सुबह 8 बजे खुल जाती है। यहां तैनात चिकित्सकों को पहले अपने उन मरीजों को जो वार्डों में भर्ती देखना पड़ता है और फिर ओपीडी के मरीजों को देखना होता है, कायदे से 9 बजे तक सभी चिकित्सकों को मरीज देखना शुरू कर देना चाहिए पर ऐसा होता नहीं है, चिकित्सक दस बजे के बाद ही मरीज देखना शुरू करते हैं। ऐसे में मरीज जो दूर दराज से आते हैं उन्हें घण्टों इंतजार करना होता है। खुद सीएमएस दस बजे से पहले अपने केबिन में नहीं पहुंचते। अधिकांश चिकित्सक मुख्यालय पर नहीं रुकते।

आयुष विंग में नहीं दवाएं, परेशान हो रहे मरीज
आयुष विंग में होम्योपैथ,आयुर्वेद व यूनानी की ओपीडी में रोजाना तकरीबन सौ मरीज आते थे। जून की शुरुआत होते ही ओपीडी खुलने के निर्देश दिए गए। ओपीडी खुलने के बाद एक चिकित्सक की ड्यूटी अभी भी वैक्सीनेशन में लगी है। दो चिकित्सक आयुष विंग की ओपीडी में मरीजों को परामर्श देते हैं। ओपीडी में चिकित्सक से परामर्श लेने के बाद मरीज को सभी दवाएं निःशुल्क मिलनी चाहिए, पर यहां ऐसा नहीं होता। यूनानी और होम्योपैथ की तो लगभग सभी दवाएं खत्म हैं। बुखार, जुकाम, पेट दर्द, पुराने चर्म रोग, सिरदर्द, माइग्रेन, पथरी आदि के मरीजों को केवल चिकित्सक से परामर्श लेकर बिना दवाओं के जाना पड़ रहा है।

यह बोले जिम्मेदारइस सम्बंध में सीएमओ डाक्टर सूर्यमणि त्रिपाठी ने बताया कि वेंटिलेटर को चिकित्सक भी चला लेते हैं इसलिये यह कोई बड़ा इशू नहीं है। आयुष विंग में दवाओं की उपलब्धता के सम्बंध में बताया कि मार्च में दवाइयों का आर्डर दिया गया था लेकिन कोरोना संक्रमण बढ़ने से दवाइयां नहीं आ पायीं, एक दो दिन में आ जाएंगी।

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