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दूसरी शादी के लिए धर्म परिवर्तन करना गैर कानूनी

हिंदू मैरेज ऐक्ट में पहली शादी से तलाक लिए बिना दूसरी शादी करना गैरकानूनी है, जबकि मुस्लिम लॉ में यह वैध है। एेसे में कई बार दूसरी शादी के लिए महिलाएं और पुरुष धर्म परिवर्तन कर लेते हैं। जिसे हाई कोर्ट ने गैरकानूनी बताया है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 21 Sep 2017, 12:42 pm
लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र

धर्म बदलकर दूसरी शादी करना गैरकानूनी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह कहा है कि किसी भी शादीशुदा व्यक्ति या महिला द्वारा धर्म परिवर्तन करके दूसरी शादी करना वैध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि पहली शादी से कानूनन तलाक लिए बिना दूसरी शादी शून्य मानी जाएगी।

हाई कोर्ट इलाहाबाद ने यह फैसला जौनपुर की विवाहित महिला द्वारा दूसरे धर्म के पुरुष से विवाह करने के लिए धर्म परिवर्तन करने के मामले में सुनाया है। महिला के पति ने उसके खिलाफ मामला दायर किया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए महिला और उसका दूसरा पति हाई कोर्ट गए थे। हाई कोर्ट ने महिला को किसी भी तरह की राहत देने से मना करते हुए उसकी गिरफ्तारी पर रोक की मांग को भी खारिज कर दिया।

जौनपुर की खुशबू तिवारी की पहली शादी 30 नवंबर 2016 को हुई थी। उसने पहली शादी से बिना तलाक लिए जौनपुर बरसठी के रहने वाले अशरफ से दूसरी शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन किया। जिसके बाद वह खुशबू तिवारी से खुशबू बेगम बन गई थी। उसने अशरफ से दूसरी शादी कर ली। दोनों की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया कि वे बालिग हैं और अपनी मर्जी से शादी की है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने यह आदेश दिया। याचिका का विरोध कर रहे अधिवक्ता विनोद मिश्रा ने कहा कि दोनों के खिलाफ जौनपुर में एनसीआर दर्ज है। कोर्ट ने नूरजहां बेगम उर्फ़ अंजलि मिश्रा केस का हवाला देते हुए याचिका ख़ारिज करते हुए शादी को शून्य करार दे दिया। साथ गिरफ्तारी पर रोक लगाने से भी मना कर दिया।

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