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अनलॉक में भी नहीं हो रहीं बड़ी शादियां, फूल उत्पादकों को बड़ा नुकसान

गाजीपुर में फूलों की खेती बहुतायत में की जाती है। कोरोना संक्रमण के कारण शादी विवाह एवं मांगलिक आयोजनों को साधारण तरीके से आयोजित के कारण फूलों की खपत में भारी कमी आई है। इस वजह से फूल उत्पादक आर्थिक तंगी झेलने को मजबूर हैं।

Lipi 8 Jul 2020, 12:00 pm
अमितेश कुमार सिंह, गाजीपुर
नवभारतटाइम्स.कॉम फाइल फोटो
फाइल फोटो

लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी फूल की खेती करने वाले किसानों की हालत सुधरती नजर नहीं आ रही है। एक तरफ जहां लॉकडाउन ने फूल के किसानों की कमर तोड़ कर रख दी, वहीं दूसरी तरफ लॉकडाउन खुलने के बाद भी फूलों का नहीं बिकना परेशानी का सबब बना हुआ है ।

बता दें कि गाजीपुर का फुल्लन पुर क्षेत्र फूलों की खेती के लिए काफी मशहूर है। यहां लोग बड़ी संख्या में गुलाब ,गेंदा ,बेला जैसे फूलों की खेती करते हैं। लेकिन लॉकडाउन में फूल खेतों में ही सड़ रहे हैं, उनका कोई खरीददार नहीं मिल रहा। वहीं लॉकडाउन के बाद आखिरी उम्मीद शादी के सीजन से फूल उत्पादकों को था। फूलों की भारी खपत शादियों में होती है, लेकिन लॉकडाउन खत्म होने के बाद शादी समारोह में फूलों की कुछ खास खपत नहीं होने के कारण फूल उत्पादक परेशान हैं।

'अच्छी हुई थी पैदावार, लेकिन...'
गाजीपुर में फूलों की खेती करने वाली सोनी देवी बताती हैं कि इस बार लॉकडाउन से बड़ा नुकसान हुआ है। फूल देने के लिए 20 से 25 सट्टा मिला था, लगा था सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन बाद में महामारी की वजह से सारे सट्टे निरस्त हो गए, जिससे लाखों का नुकसान हुआ है। फूलों की खेती करने वाले लौटू बिंद का कहना है की इस बार फूलों की खेती की पैदावार अच्छी हुई थी। लॉकडाउन ने पूरा मजा खराब कर दिया। शादी समारोह में साज सज्जा के लिए फूलों की काफी डिमांड होती है लेकिन इस बार अधिकतर शादियां सामान्य तरीके से हो हुईं, तो कुछ को अलगे साल के लिए टाल दिया गया। फूलों की मुख्य खपत गाड़ियों व मंडप के साज सज्जा में ही होती है लेकिन इस बार सब कुछ ठीक है, जिसकी वजह से अब इनकी हालत खस्ता हो गई।

'अब भगवान का ही सहारा'
फूल व्यवसायियों का कहना था कि सरकार द्वारा मदद के तौर पर सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पर राशन तो मिल रहा है लेकिन परिवार की जीविका सिर्फ राशन से नहीं चलती। अन्य जरूरतें भी होती हैं। जिन्हें पूरा कर पाना अब मुश्किल लग रहा है। आगे खेती करने की भी चिंता है। उसके लिए पूंजी की आवश्यकता है जो पूरी तरह से समाप्त हो गई है, अब भगवान ही सहारा है।

जिले के 1000 से अधिक किसान प्रभावित
इस मामले पर मीडिया से बात करते हुए जिला उद्यान अधिकारी शैलेंद्र दुबे ने बताया कि फूलों की खेती करने वाले रजिस्टर्ड किसानों की संख्या 200 के आसपास है जो कि गेंदा, रजनीगंधा, व गुलाब के फूलों की खेती करते हैं। जिले में बहुत सारे किसान अनरजिस्टर्ड भी हैं। जो खुद फूलों की खेती कर बाजार में फूलों की बिक्री का काम करते हैं। इनकी संख्या तकरीबन 500 से 1000 की है । सरकारी योजनाओं के जरिए इनको सहायता देने का प्रयास किया जाएगा।

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