ऐपशहर

Gonda News: बजरंग बली में ऐसी आस्था, जब मोहम्मद अनीस बन गए भगवान हनुमान के भक्त

मोहम्मद अनीश पहले शराब, मांस, जुआ और अन्य तरह की कई बुराइयों में लिप्त था। जैसे ही मोहम्मद अनीश ने बजरंगबली के चरणों की शरण ली वैसे ही इसके मन के अंदर परिवर्तन हुआ और सब बुराइयों को त्यागकर मोहम्मद अनीश से हनुमान भक्त शुक्राचार्य हो गए।

Lipi 28 Mar 2021, 3:53 pm
गोंडा
नवभारतटाइम्स.कॉम हनुमान भक्त अनीश
हनुमान भक्त अनीश

श्रीराम भक्त बजरंगबली में ऐसी आस्था देखने को मिली है, जहां एक गांव नशे को छोड़कर भक्ति में डूब गया है। यही नहीं हनुमान की भक्ति में डूबे एक व्यक्ति ने इस्लाम धर्म छोड़कर हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया और अब दिन रात बजरंगबली की भक्ति और सेवा में डूबा रहता है।

यह सब तब हुआ, जब पुलिस के एक रिटायर्ड दरोगा ने गांव में हनुमान जी का मंदिर बनवाया। मंदिर बनने के बाद इस गांव के लोगों में आलौकिक परिवर्तन हुआ और कच्ची शराब के नशे में रहने वाले युवा और बुजुर्ग नशे को त्यागकर अब हनुमान भक्ति में डूबे रहते है। जिले के विकास खंड परसपुर के लायकपुरवा गांव में हनुमान मंदिर बनने के बाद यहां के ग्रामीण बजरंगबली की भक्ति में ऐसे रच बस गए कि उन्होंने शराब और मांस को छोड़ दिया है। इससे यह क्षेत्र अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

यही नहीं यहां चर्चा का विषय एक ऐसा भक्त भी है, जो हनुमान जी कि भक्ति में ऐसा डूबा कि वह इस्लाम धर्म छोड़कर मुस्लिम से हिन्दू बन गया। और अब इसका नाम मोहम्मद अनीस से शुक्राचार्य हो गया है। मोहम्मद अनीस पहले शराब, मांस, जुआ और अन्य तरह की कई बुराइयों में लिप्त था। जैसे ही मोहम्मद अनीस ने बजरंगबली के चरणों की शरण ली वैसे ही इसके मन के अंदर परिवर्तन हुआ और सब बुराइयों को त्यागकर मोहम्मद अनीस से हनुमान भक्त शुक्राचार्य हो गए।

शुक्राचार्य अब हनुमान जी सेवा भक्ति में लगे रहते हैं, आरती करते हैं, मोहम्मद अनीस से शुक्राचार्य बने हनुमान भक्त व्यक्ति ने बताया कि जब से वह हनुमान जी के शरण में आए तब से उनके घर-परिवार में खुशहाली आ गई। उनके धर्म परिवर्तन से उनके परिवार और समाज के लोगों को कोई आपत्ति नहीं है और उन्होंने स्वेच्छा से मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपनाया है। उन पर किसी तरह का कोई दबाब नहीं था। यहां के लोगों में ह्रदय परिवर्तन का काम किया योगीराज कुंवरनाथ ने। योगिराज कुंवरनाथ भगवा रंग ओढ़ने से पहले पुलिस विभाग में दरोगा थे।

रिटायर होने के बाद गांव लौटे और रिटायर होने पर मिली रकम से एक मंदिर का निर्माण कराया। इसके बाद ग्रामीण, जो गलत रास्ते पर थे शराब पीने का काम, लड़ाई - झगड़ा करने मशगूल रहते थे उन्हें सुधारा और रामभक्ति व हनुमान भक्ति के पावन कार्य मे लगा दिया। बाबा का कहना है कि जब से गांव में मंदिर का निर्माण हुआ है, तब से यहां के लोगों में काफी परिवर्तन आया है।

अगला लेख

Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग