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UP का हाल, करोड़ों खर्च के बाद भी हजारों लोग नाव से पार कर रहे जिंदगी की 'नैया', 12 साल बाद भी नहीं मिट सकी दूरी

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में तमाम गांव ऐसे हैं जो यमुना किनारे बसे हुए हैं। एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए नाव का सहारा लेते हैं। ऐसे लोगों की समस्याओं के निदान के लिए यमुना पर पुल निर्माण कार्य शुरू हुआ लेकिन 12 साल बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो सका। हजारों लोग नाव से ही जिंदगी की नैया को पार लगा रहे हैं।

Lipi 13 Jun 2021, 5:27 pm
अरुण रावत, फिरोजाबाद
नवभारतटाइम्स.कॉम 2222

फिरोजाबाद मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित गांव अनवारा। यहां से आगरा की दूरी यमुना पार करके वैसे तो करीब दो से तीन किलोमीटर है लेकिन सड़क मार्ग से ग्रामीण आगरा पहुंचें तो करीब 35 किलोमीटर दूर घूमकर जाना पड़ता है। ग्रामीणों की इस समस्या का समाधान 12 साल में भी नहीं हो सका है।

फिरोजाबाद और आगरा के बीच में है यमुना
जिले की टूंडला तहसील का गांव अनवारा, जहां टूंडला (फिरोजाबाद) और आगरा के बाह-फतेहाबाद को जाने वाले मार्ग के बीच में यमुना बह रही है। आगरा और टूंडला के बीच की दूरी को कम करने के लिए तत्कालीन फिरोजाबाद सांसद राजबब्बर ने यमुना पर पुल के निर्माण को हरी झंडी दिखाई थी। इसे बनाने की जिम्मेदारी आगरा के पीडब्ल्यूडी खंड दो को दी गई थी। पीडब्ल्यूडी ने काम शुरू तो कराया लेकिन उसे पूरा नहीं किया।

राजबब्बर ने शुरू कराया था काम
राजबब्बर वर्ष 2009 में सांसद बने थे। जीतने के बाद ही उन्होंने यहां पुल के निर्माण कार्य को शुरू करा दिया था। पीडब्ल्यूडी विभाग ने पुल निर्माण का अधूरा काम छोड़ दिया। उसके बाद से लेकर आज तक यह पुल अधूरा ही पड़ा हुआ है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी उसका लाभ क्षेत्रीय जनता को नहीं मिल सका।

बढ़ गया यमुना का दायरा
एडीएम ने बताया कि जानकारी करने पर पता चला है कि पीडब्ल्यूडी ने जिस समय इस पुल का टेंडर लिया था। उस समय यमुना का बहाव कम था और यमुना सीमित दायरे में थी लेकिन यमुना का बहाव तेज होने के कारण मिट्टी का कटान हो गया और यमुना का विस्तार हो गया। ऐसे में यमुना पर पुल निर्माण को पूरा करने के लिए अभी तीन से चार पिलर और बढ़ाने पड़ेंगे। इसी के चलते पीडब्ल्यूडी ने इस कार्य को बीच में ही रोक दिया है। इस कार्य को पूरा कराए जाने के लिए आगरा के अधिकारियों से वार्ता चल रही है। जल्द ही इस पर कार्य प्रारंभ कराया जाएगा। बारिश के दिनों में यमुना के आवागमन को अधिकारियों द्वारा बंद करा दिया जाता है। यमुना का जल स्तर बढ़ने पर कई बार यमुना में नाव पलटने के कारण लोगों की जान तक जा चुकी है। उसके बाद लोगों को तीन किलोमीटर का सफर तय करने के लिए 35 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है।

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