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सहारनपुर लोकसभा: आंकड़ों में मजबूत हैं कांग्रेस के इमरान मसूद, मुस्लिम वोट बंटने का डर

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सहारनपुर से एकबार फिर इमरान मसूद को टिकट दिया है। पिछली बार एसपी के टिकट पर चुनाव लड़े शाजान मसूद भी इसबार इमरान के साथ आ गए हैं।

नवभारत टाइम्स 8 Mar 2019, 8:41 pm
शादाब रिजवी, मेरठ
नवभारतटाइम्स.कॉम imran
इमरान मसूद (फोटो साभार: फेसबुक)

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव की अपनी पहली लिस्ट में वेस्टर्न यूपी की पार्टी की सबसे मजबूत माने जाने वाली सहारनपुर सीट पर इमरान मसूद को कैंडिडेट घोषित कर चुनावी बिगुल फूंक दिया है। आंकड़ों के लिहाज से इमरान का पक्ष यहां एसपी-बीएसपी गठबंधन से ज्यादा मजबूत है। अलबत्ता मुस्लिमों में बंटवारे का डर जरूर बना रहेगा। इमरान पर कांग्रेस के दांव को भारतीय जानता पार्टी (बीजेपी) खुद के लिए संजीवनी मान रही है।

सहारनपुर को कांग्रेस का वेस्ट यूपी का सबसे मजबूत जिला माना जाता है। अभी भी यहां से कांग्रेस के दो विधायक हैं। 2014 की मोदी लहर में भी बीजेपी के सामने एसपी-बीएसपी जहां टिक नहीं पाई थीं वहीं कांग्रेस ने कड़ी टक्कर दी और दूसरे नंबर पर रही थी। कांग्रेस से इमरान मसूद को 4,07,909 वोट मिले थे। जबकि बीजेपी के राघव लखनपाल शर्मा 472499 वोट पाकर जीत गए थे। बीएसपी के जगदीश सिंह राणा 2,35,033 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे।

पिछली बार बीएसपी का दलित-मुस्लिम एकता का दांव नहीं चल पाया था। जबकि मुस्लिम बहुल सहारनपुर जिले में एसपी को भी नापसंद कर दिया गया था। एसपी के शाजान मसूद को मात्र 52,765 वोट ही मिले थे और उनकी जमानत जब्त हो गई थी। यहां पर मुस्लिमों की पहली पसंद कांग्रेस बन गई थी। इस बार एसपी और बीएसपी में गठबंधन है। 2014 में एसपी और बीएसपी के कैंडिडेट को मिलाकर 2,87,798 वोट मिले थे। जो कांग्रेस के इमरान मसूद के एक लाख 1,20,111 और बीजेपी के राघव लखनपाल शर्मा से 1,84,701 वोट कम थे। इस बार 2014 में एसपी से चुनाव लड़े शाजान मसूद अपने चचेरे भाई इमरान मसूद के साथ चले गए हैं।

विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस रही अव्वल
2017 के विधान सभा चुनाव में वेस्टर्न यूपी से सिर्फ सहारनपुर में दो सीट मिली थी। बेहट से नरेश सैनी और सहारनपुर देहात सीट से मसूद अख्तर विधायक चुने गए। सहारनपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने अपने चर्चित नेता इमरान मसूद पर दांव लगाया है जबकि बीएसपी-एसपी गठबंधन की तरफ से मीट कारोबारी फजलुर्रहमान को प्रभारी बनाया गया है। मीट कारोबारी मेयर का चुनाव भी यहां से लड़े थे लेकिन दूसरे नंबर पर रहे थे। इस बार बीएसपी से ठाकुर की जगह मुस्लिम कैंडिडेट रहेगा, ऐसे में कांग्रेस और बीएसपी में से मुस्लिम किसको पसंद करेंगे, यह वक्त बताएगा। मुस्लिमों में बंटवारे का सीधा लाभ बीजेपी खुद के लिए मान रही है।

इस बार इमरान के साथ आए चाचा

2014 के लोकसभा चुनाव में सहारनपुर के कद्दावर नेता और नौ बार सांसद रहे रशीद मसूद अपने भतीजे इमरान मसूद के साथ आ गए हैं। चर्चा है कि रसीद मसूद ने लोकसभा चुनाव इमरान को लड़ाने का भरोसा दिया है और 2022 के विधानसभा चुनाव में उनके बेटे शाजान मसूद को एमएलए का चुनाव इमरान लड़ाएंगे।

सहारनपुर सीट पर मजबूत रहा है कांग्रेस का इतिहास

आजादी के बाद पहला चुनाव अप्रैल 1952 में हुआ था। तब सहारनपुर की सीट सहारनपुर वेस्ट और मुजफ्फरनगर नॉर्थ के नाम से जानी जाती थी। उस समय कांग्रेस के अजीत प्रसाद जैन ने जीत दर्ज की थी। उसके बाद कांग्रेस लगातार आठ लोकसभा चुनाव जीती। वर्ष 1952 से 1971 तक कांग्रेस से दो बार अजीत प्रसाद जैन, एक बार महावीर त्यागी और पांच बार सुंदर लाल ने कांग्रेस का परचम फहराया। उसके बाद 1977 में कांग्रेस को झटका लगा। जनता पार्टी सेक्युलर से लगातार दो बार काजी रशीद मसूद जीते। 1984 में गुर्जर नेता चौधरी यशपाल सिंह ने कांग्रेस को यह सीट दिला दी। उसके बाद कांग्रेस ने सहारनपुर से सांसद का चुनाव नहीं जीता। 2014 में कांग्रेस दूसरे नंबर पर जरूर रही।

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