ऐपशहर

उत्तराखंड नगर निकाय चुनाव: बीजेपी को झटका, अपने इलाके में नहीं जिता पाए दिग्गज

प्रदेश के सात नगर निगमों, 39 नगर परिषदों और 38 नगर पंचायतों सहित 84 नगर निकायों के लिए चुनाव हुए थे। सत्ताधारी पार्टी के विधायकों की बात करें तो 10 एमएलए अपने क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार को जीत नहीं दिला पाए।

नवभारतटाइम्स.कॉम 21 Nov 2018, 1:14 pm
देहरादून
नवभारतटाइम्स.कॉम 1
नगर निकाय चुनावों में मतपत्रों से हुआ है मतदान

उत्तराखंड नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने बीजेपी को झटका दिया है। आंकड़ों में दोनों प्रमुख पार्टियों के लिए नतीजे बराबर लगते हैं, लेकिन बीजेपी के कई बड़े नेता और मंत्री अपने घर की सीट भी नहीं जितवा पाए। वहीं 1064 वॉर्डों के घोषित नतीजों में सबसे ज्यादा निर्दलीयों ने बाजी मारी है।

542 वॉर्डों में जीते निर्दलीय, मेयर में बीजेपी अव्वल
निर्दलीय उम्मीदवारों ने 542 वॉर्डों में जीत हासिल की है, जबकि बीजेपी को 288 सीटों पर विजय मिली है। वहीं विपक्षी कांग्रेस पार्टी को 159 वॉर्डों में जीत हासिल हुई है। बीएसपी को 3, जबकि यूकेडी और समाजवादी पार्टी को 1-1 वॉर्ड में जीत मिली है। मेयर के चुनाव में हल्द्वानी सीट पर कांग्रेस की हार हुई है। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के पुत्र सुमित हृदयेश यहां से मैदान में थे। बीजेपी के जोगेंद्र रौतेला ने उन्हें 10 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी। इसके अलावा बीजेपी ने काशीपुर, ऋषिकेश और रुद्रपुर में महापौर की सीट पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को हरिद्वार और कोटद्वार में मेयर सीट पर बढ़त मिली। वहीं देहरादून में भी बीजेपी उम्मीदवार आगे चल रहे थे।

10 बीजेपी विधायकों के इलाके में हारी पार्टी
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट अपने घर रानीखेत नगर पंचायत की सीट नहीं जितवा पाए हैं। गैरसैंण में विधानसभा सत्र करने वाली बीजेपी यहां की पंचायत सीट भी गंवा चुकी है। सत्ताधारी पार्टी के विधायकों की बात करें तो 10 एमएलए अपने क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार को जीत नहीं दिला पाए। इनमें देवप्रयाग, टिहरी, चंपावत, रुद्रप्रयाग, रामनगर, अल्मोड़ा नगर पालिका शामिल हैं। नगर पंचायत पुरोला, लोहाघाट, कपकोट और नानकमत्ता में भी बीजेपी को मात मिली है। कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय के निर्वाचन क्षेत्र गदरपुर नगर पालिका में तो निर्दल ने बाजी मार ली है।

बता दें कि पूरे राज्य में इस बार मतपत्रों से 1257 मतदान केंद्रों पर रविवार को मतदान हुआ था। साल 2013 की तरह ही इस बार चार नगर निगमों में ईवीएम का प्रयोग नहीं किया गया, जिसके कारण नतीजे आने में देरी हुई। राज्य में पूरे प्रदेश में 69 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इससे पहले रविवार को 60 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। प्रदेश के सात नगर निगमों, 39 नगर परिषदों और 38 नगर पंचायतों सहित 84 नगर निकायों के लिए चुनाव हुए थे।

अगला लेख

Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग