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उत्तराखंड के नंधौर अभयारण्य को ‘टाइगर रिजर्व’ बनाया जाए: अधिकारी

ऋषिकेश, 15 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में नंधौर नदी के पास स्थित नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में बाघों की लगातार बढती संख्या से उत्साहित अधिकारियों का मानना है कि बाघों के संरक्षण के लिये इसका दर्जा बढाकर इसे बाघ अभयारण्य (टाइगर रिजर्व) बना दिया जाना चाहिए। अभयारण्य के निदेशक एनएन पांडे ने बताया, ‘‘2012 में इस अभयारण्य के अस्तित्व में आने के समय यहां बाघों की संख्या केवल नौ थी जो 2018 में बढकर 27 हो गयी। और इस साल इसके 32 के आंकड़े के पार कर जाने की संभावना है।’’

भाषा 15 Apr 2019, 5:22 pm
ऋषिकेश, 15 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में नंधौर नदी के पास स्थित नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में बाघों की लगातार बढती संख्या से उत्साहित अधिकारियों का मानना है कि बाघों के संरक्षण के लिये इसका दर्जा बढाकर इसे बाघ अभयारण्य (टाइगर रिजर्व) बना दिया जाना चाहिए। अभयारण्य के निदेशक एनएन पांडे ने बताया, ‘‘2012 में इस अभयारण्य के अस्तित्व में आने के समय यहां बाघों की संख्या केवल नौ थी जो 2018 में बढकर 27 हो गयी। और इस साल इसके 32 के आंकड़े के पार कर जाने की संभावना है।’’ अधिकारी ने कहा कि अभयारण्य में पिछले कुछ वर्षों में बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि इस बात का भी संकेत है कि अपने सीमित संसाधनों से अभयारण्य बाघों की जिम्मेदारी लंबे समय तक अच्छे ढंग से नहीं उठा पायेगा। पांडेय ने कहा कि इसे बाघ अभयारण्य के रूप में उच्चीकृत करने में केवल राज्य सरकार ही भूमिका निभा सकती है जिससे केंद्र सरकार से सरकारी धन और राष्ट्रीय स्तर के जंतु वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता मिल सके। करीब 269 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस अभयारण्य को बाघ अभयारण्य का दर्जा दिये जाने की वकालत करते हुए देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक अजय स्पेंगकू ने कहा कि अभयारण्य में बाघों की संख्या का घनत्व काफी अच्छा है और उसके संसाधन बढाने तथा उसे बाघों का एक आदर्श आवास स्थल बनाने के लिये हर मुमकिन कदम उठाये जाने चाहिए ।

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