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100 रुपए के नोट में छपी ‘रानी की वाव’ के बारे में इतनी दिलचस्प बातें नहीं जानते होंगे आप

रानी की वाव एक ऐतिहासिक संरचना है, जिसे रानी उदयमाती द्वारा अपने स्वर्गवासी पति राजा भीमदेव की याद में बनवाया गया था। 100 रुपए के नोट के पीछे छपी रानी की वाव के बारे में आप भी जानिए कुछ दिलचस्प बातें।

नवभारतटाइम्स.कॉम 11 Apr 2022, 1:45 pm
गुजरात के कई प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक होने की वजह से, रानी वाव अपनी ऐतिहासिक चीजों से लोगों को बेहद आकर्षित करती है। इस खूबसूरत संरचना का निर्माण 11वीं शताब्दी में एक राजा की याद के तौर पर करवाया गया था। सरस्वती नदी के तट पर बनी ये 7 तलों की वाव 64 मीटर लंबी, 20 मीटर चौड़ी और 27 मीटर गहरी है। इस वाव में 30 किमी लंबी रहस्यमयी सुरंग भी है, जो पाटण के सिद्धपुर में जाकर निकलती है। ऐतिहासिक बावड़ी की नक्काशी, और कलाकृति की खूबसूरती यहां आने वाले पर्यटकों का न सिर्फ दिल खुश कर देती है, बल्कि इतिहास से उनका परिचय भी करा देती है। चलिए आपको यहां की कुछ दिलचस्प चीजों के बारे में बताते हैं -
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100 रुपए के नोट में छपी ‘रानी की वाव’ के बारे में इतनी दिलचस्प बातें नहीं जानते होंगे आप

(नीचे के फोटो साभार : wikimedia commons)


राजा की याद में रानी द्वारा बनवाया गई ये बावड़ी -

भारत में ऐसी कई इमारतें हैं, जिन्हें कई राजाओं ने अपनी पत्नियों की याद में उन्हें बनवाया है। हालांकि रानी की वाव एकदम अलग और अद्वितीय है, जिसे साल 1063 में सोलंकी राजवंश की रानी उदयमाती द्वारा अपने स्वर्गवासी पति राजा भीमदेव की याद में करवाया गया था।

बावड़ी की वास्तुकला -

बावड़ी की वास्तुकला आपको एक उलटे मंदिर की तरह दिखेगी, जो कि सच है बावड़ी को उल्टे मंदिर की तरह डिजाइन किया गया है, जिसमें सात स्तर की सीढ़ियां हैं जो पौराणिक और धार्मिक कल्पनाओं के साथ खूबसूरती से उकेरी गई हैं। बावड़ी लगभग 30 मीटर गहरी है, जहां की खूबसूरत नक्काशियों में प्राचीन और धार्मिक चित्रों को उकेरा गया है।

बावड़ी में सुरंग का राज -

हर इमारत का अपना एक रहस्य होता है, उसी तरह रानी का वाव का भी है। बावली के सबसे निचले चरण की सबसे आखिरी सीढ़ी के नीचे एक गेट है, जिसके अंदर 30 मीटर लंबे सुरंग है। ये सुरंग सिद्धपुर में जाकर खुलती है, जो पाटण के काफी नजदीक है।

यहां के पानी और पौधों के औषधीय गुण -

ऐसा माना जाता है कि लगभग 5 दशक पहले, बावड़ी में औषधीय पौधे और संग्रहीत पानी का उपयोग वायरल बुखार और अन्य बीमारियों को ठीक करने में किया जाता था।

रानी की वाव में मूर्तियां -

बावड़ी के अंदरूनी दीवारों में लगभग 800 से अधिक मूर्तियों को उकेरा गया है। इन दीवारों और स्तभों पर भगवान विष्णु की नक्काशियां हैं, साथ ही अन्य मूर्तियां ऋषियों, अप्सराओं और ब्राह्मणों की हैं।

विश्व विरासत स्थल -

पाटन में विश्व धरोहर स्थल, रानी की वाव 2014 से यूनेस्को द्वारा सूचीबद्ध विश्व धरोहर स्थलों में से एक है, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित रखा गया है। अगर आप पाटण आ रहे हैं, तो रानी की वाव को भी जरूर देखें, जो उस समय के कारीगरों की शिल्प कौशल को दर्शाती है। पाटण में जैन मंदिर और सरसरलिंग तालाब को भी अपनी लिस्ट में शामिल जरूर करें।

रानी की वाव कैसे पहुंचें? - How to reach Rani ki Vav?

सड़क मार्ग से: अहमदाबाद से पाटन के लिए इंटरसिटी बसें 3.5 घंटे और मेह (Meh) से 1 घंटे का समय लेती हैं। अगर आपको जल्दी पहुंचना है, तो आप शेयर जीप ले सकते हैं।

रेल द्वारा: ट्रेन आपको मेहसाणा (1.5 घंटे) तक ले जाएगी। वहां से आपको पाटन के लिए बस पकड़नी होगी।

हवाई मार्ग से: पास का हवाई अड्डा अहमदाबाद है।

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