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चीनी हैकरों ने की Corona Vaccine की रेस में आगे चल रही अमेरिका की Moderna से रिसर्च चुराने की कोशिश?

Corona Vaccine by Moderna Inc: अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने इस बात का आरोप लगाया था कि चीन के हैकरों ने जिन अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाया था, उनमें से तीन कोरोना वायरस की वैक्सीन रिसर्च से जुड़ी थीं। अब Moderna Inc ने इस बात की पुष्टि की है कि वह FBI के संपर्क में थी।

नवभारतटाइम्स.कॉम 31 Jul 2020, 9:13 am

हाइलाइट्स

  • अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट का चीनी हैकरों पर आरोप
  • देश की कोरोना रिसर्च से जुड़ी कंपनियों को बनाया शिकार
  • अंदाजा लगाया गया है इनमें Moderna Inc भी शामिल
  • कोरोना वैक्सीन की रेस में सबसे तेज कंपनियों में से एक
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वॉशिंगटन
कोरोना वायरस वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) के इंसानों पर ट्रायल में सफल रहने वाली पहली कंपनियों में से एक Moderna Inc को चीन सरकार से जुड़े हैकर्स ने साइबर हमले (China Cyber Attack) का निशाना बनाया था। इस हमले के जरिए कोरोना वैक्सीन से जुड़ा रिसर्च चुराने की कोशिश की गई। चीन की हैकिंग ऐक्टिविटी पर नजर रख रहे अमेरिका के सिक्यॉरिटी अधिकारियों ने यह दावा किया है। पिछले हफ्ते अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने दो चीनी नागरिकों पर अमेरिका में जासूसी का आरोप लगाया था।
FBI के संपर्क में थी Moderna
जिन जगहों पर जासूसी का आरोप था उनमें से तीन कोरोना पर मेडिकल रिसर्च कर रहे ठिकाने थे। बयान में बताया गया कि चीन के हैकरों ने जनवरी में मैसच्यूसेट्स की एक बायोटेक कंपनी के नेटवर्क में रेकी की। यह कंपनी कोरोना वैक्सीन पर काम कर रही है। इसके आधार पर अंदाजा लगाया गया यह मैसच्यूसेट्स में ही आधारित Moderna हो सकती है। मॉडर्ना ने रॉयटर्स से इस बात की पुष्टि की है कि कंपनी FBI (फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) से संपर्क में थी और उसे हैकिंग ग्रुप के रेकी करने के शक के बारे में पता था।

'खतरों के खिलाफ सुरक्षा तैयार'
रेकी के लिए वेबसाइट्स में कमजोर स्पॉट खोजने से लेकर उससे जुड़े अकाउंट्स खंगाले जाते हैं। कंपनी के प्रवक्ता रे जॉर्डन ने बताया है, 'मॉडर्ना संभावित साइबर सिक्यॉरिटी खतरों को लेकर सतर्क रहती है और एक इंटरनल टीम, एक्सटर्नल सपॉर्ट और दूसरी अथॉरिटीज के साथ अच्छे संबंध रखकर खतरों का आकलन करती रहती है और अपनी अहम जानकारी की सुरक्षा करती रहती है।'


दूसरी कंपनियां कौन सी?
इसके अलावा कैलिफोर्निया और मैरीलैंड की बायोटेक कंपनियों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। कैलिफोर्निया की कंपनी ऐंटीवायरल ड्रग रिसर्च कर रही थी और मैरीलैंड की कंपनी ने भी जनवरी में वैक्सीन बनाने की कोशिश करने का ऐलान किया था। माना जा रहा है कि पहली कंपनी Gilead Sciences Inc और दूसी Novavax Inc हो सकती है। दोनों कंपनियों ने हमले के बारे में तो कुछ नहीं कहा है लेकिन Novavax ने विदेशी खतरों से सावधान रहने की बात जरूर कही है।

MSS के लिए काम करते थे
पिछले हफ्ते दो चीनी हैकरों ली शियाऊ और डॉन्ग जियाशी पर आरोप लगा था कि वे सालों से हैकिंग करते आ रहे थे और उन्होंने कोरोना वैक्सीन से जुड़े मेडिकल रिसर्च ग्रुप को भी निशाना बनाया था। अभियोजन पक्ष का कहना है कि दोनों चीन के स्टेट सिक्यॉरिटी मंत्रालय के कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर काम करते थे जो एक खुफिया एजेंसी है।


चीनी की खुफिया एजेंसी MSS
किसी भी देश की खुफिया एजेंसियां जाहिर तौर पर गुप्त रहती हैं लेकिन चीन की MSS (मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्यॉरिटी) कुछ ज्यादा ही बड़ा रहस्य है। न तो इसकी कोई ऑफिशल वेबसाइट है और न कोई संपर्कों की लिस्ट और न कोई प्रवक्ता। MSS बाकी खुफिया एजेंसियों की तरह चीन और बाहर जासूसी करने, विदेशी और घरेलू संस्थानों और लोगों पर नजर रखने और उनकी जांच करने काम करती है। यह खुफिया जानकारी लीक करने वालों को 15 दिन तक हिरासत में भी रख सकती है।

दौड़ में है चीन की वैक्सीन भी
गौर करने वाली बात है कि जो चुनिंदा वैक्सीन इस वक्त इंसानों पर ट्रायल के शुरुआती चरण में सफल रही हैं, उनमें से एक चीन की वैक्सीन भी है। चीन की कंपनी Cansino और मिलिट्री के रिसर्च विंग की बनाई वैक्सीन अपने शुरुआती नतीजों में असरदार पाई गई है। दूसरी ओर, Moderna Inc के अलावा ब्रिटेन की Oxford-AstraZeneca की वैक्सीन भी इस रेस में सबसे आगे मानी जा रही है। तीनों वैक्सीन कितनी कारगर हैं, इसका फैसला तीसरे चरण के ट्रायल के बाद ही पता चल सकेगा।

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