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क्या अमेरिका ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का किया समर्थन? बाइडेन के बयान में बहुत बड़ा झोल, समझें

मेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया था कि बाइडेन ने भारत, जापान और जर्मनी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाए जाने का समर्थन किया है। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारी के नाम का जिक्र नहीं किया गया है। बाइडेन ने अपने भाषण के दौरान कहा था कि अमेरिका समेत सुरक्षा परिषद के सदस्यों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर की रक्षा करनी चाहिए और केवल बहुत ही कठिन परिस्थितियों में वीटो का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

Curated byप्रियेश मिश्र | नवभारतटाइम्स.कॉम 24 Sep 2022, 8:17 pm

हाइलाइट्स

  • जो बाइडेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्या का समर्थन किया
  • पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार का सबसे बड़ा विरोधी रहा है अमेरिका
  • बाइडेन के बयान में पर्मामेंट सीट का किया जिक्र, पर्मामेंट मेंबरशिप का नहीं
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नवभारतटाइम्स.कॉम West_ More sanctions, isolation if Putin carries out threats.
जो बाइडेन
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र में दिए गए भाषण की खूब चर्चा हो रही है। बाइडेन ने बाकी अमेरिकी राष्ट्रपतियों से अलग संयुक्त राष्ट्र में सुधार की वकालत की है। उन्होंने बुधवार को महसभा को संबोधित करते हुए कहा कि समय आ गया है कि इस संस्था को और अधिक समावेशी बनाया जाए ताकि वह आज की दुनिया की जरूरतों को अच्छे तरीको से पूरा कर सके। उन्होंने कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी, दोनों तरह के सदस्यों की संख्या बढ़ाने का समर्थन करता है। इनमें वे देश भी शामिल हैं, जिनकी स्थायी सीट की मांग का हम लंबे समय से समर्थन करते आ रहे हैं। बाइडेन ने अपने भाषण में किसी खास देश का नाम नहीं लिया लेकिन क्षेत्रों का जिक्र जरूर किया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका ने भारत की स्थायी सदस्या का समर्थन किया।
क्या अमेरिका ने भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया
दरअसल, कुछ मीडिया रिपोर्ट में अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया था कि बाइडेन ने भारत, जापान और जर्मनी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाए जाने का समर्थन किया है। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारी के नाम का जिक्र नहीं किया गया है। बाइडेन ने अपने भाषण के दौरान कहा था कि अमेरिका समेत सुरक्षा परिषद के सदस्यों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर की रक्षा करनी चाहिए और केवल बहुत ही कठिन परिस्थितियों में वीटो का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि इस परिषद की विश्वसनीय और प्रभावकारिता बनी रहे। बाइडेन का इससे इशारा रूस और चीन की तरफ था, जो वीटो का इस्तेमाल कर अमेरिका के लगभग हर मांग को रोक देते हैं।

पहली बार यूएनएससी के विस्तार को तैयार हुआ अमेरिका
बीबीसी से बात करते हुए पूर्व राजनयिक डीपी श्रीवास्तव ने जो बाइडेन के यूएनएससी में दिए गए भाषण की कई बारीकियां बताई। डीपी श्रीवास्तव ईरान और चेक गणराज्य में भारत के राजदूत रह चुके हैं। इसके अलावा वे भारतीय विदेश मंत्रालय में यूएन डेस्क पर काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि बाइडेन का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दिया गया बयान काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बीबीसी से कहा कि कहा कि 90 के दशक में इस विषय पर जब संयुक्त राष्ट्र में चर्चा शुरू हुई थी तो उस समय मैं विदेश मंत्रालय में डायरेक्टर था और मैं इसी विषय को डील करता था। उस वक्त अमेरिका यूएनएससी के विस्तार के लिए तैयार नहीं था। आज जो बाइडेन खुद बोल रहे हैं कि सुरक्षा परिषद का विस्तार होना चाहिए।

बाइडेन के बयान की बारीकी पूर्व राजनयिक से समझें
डीपी श्रीवास्तव ने बाइडेन के बयान की बारीकी को समझाया। उन्होंने कहा कि बाइडेन ने पर्मानेंट सीट (स्थायी सीट) शब्द का जिक्र किया है पर्मानेंट मेंबरशिप (स्थाई सदस्यता) का नहीं। इन दोनों में काफी ज्यादा फर्क है। उनके अनुसार, पर्मानेंट सीट अक्सर अफ्रीकी देशों के लिए इस्तेमाल होता है जो कि रोटेशनल होती है। इसका मतलब है कि इस सीट पर एक क्षेत्र या वर्ग के देशों को ही सदस्य बनायाा जाएगा और यह हमेशा किसी एक देश के पास न होकर उस क्षेत्र या वर्ग के अलग-अलग देशों के पास रहेगी। बस बाइडेन के इसी बयान में यह कंफ्यूजन बना हुआ है।

यूएनएससी के नए सदस्य को वीटो पावर देने पर भी कंफ्यूजन
बाइडेन ने अपने भाषण में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वीटो पावर के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। पहले भी ऐसी बातें हो चुकी हैं कि नए स्थायी सदस्यों को शायद वीटो पावर न दिया जाए। अगर यह ताकत नए सदस्यों के पास नहीं होगी तो वे पुराने सदस्यों के बराबर ताकतवर नहीं हो सकेंगे। इतना ही नहीं, वे बस कहने को ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य बन पाएंगे। ऐसे में बिना वीटो पावर के स्थायी सदस्यता किसी काम की नहीं होगी और सदस्य देश अस्थायी मेंबर की तरह ही गिनती करवाने के लिए होंगे।
लेखक के बारे में
प्रियेश मिश्र
नवभारत टाइम्स डिजिटल में डिजिटल कंटेंट राइटर। पत्रकारिता में दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला जैसी संस्थाओं के बाद टाइम्स इंटरनेट तक 5 साल का सफर जो इंदौर से शुरू होकर एनसीआर तक पहुंचा है पर दिल गौतम बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर और गोरक्षनाथ की धरती गोरखपुर में बसता है। देश-विदेश, अंतरराष्ट्रीय राजनीति/कूटनीति और रक्षा क्षेत्र में खास रुचि। डिजिटल माध्यम के नए प्रयोगों में दिलचस्पी के साथ सीखने की सतत इच्छा।... और पढ़ें

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