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अमेरिका की AGM-183A हाइपरसोनिक मिसाइल का दूसरा टेस्ट भी फेल, अबकी बार रॉकेट मोटर ही नहीं चला

टेस्ट की जा रही हाइपरसोनिक मिसाइल का नाम AGM-183A एयर-लॉन्च्ड रैपिड रिस्पांस वेपन (ARRW) है। अप्रैल में इस मिसाइल का पहला परीक्षण आयोजित किया गया था। तब यह मिसाइल कैलिफोर्निया के एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस से उड़ान भरने वाले बी-52 विमान के विंग से रिलीज ही नहीं हो सकी थी।

नवभारतटाइम्स.कॉम 30 Jul 2021, 7:22 pm

हाइलाइट्स

  • अमेरिकी वायु सेना की हाइपरसोनिक मिसाइल का लगातार दूसरा टेस्ट फेल
  • इस बार विमान से अलग होने के बाद मिसाइल का मोटर ही ऑन नहीं हो सका
  • पिछली बार बी-52 विमान से अलग ही नही हो पाई थी यह मिसाइल
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अमेरिका की एजीएम-183ए मिसाइल (Photo-USAF)
वॉशिंगटन
अमेरिकी वायु सेना की अल्ट्रा फास्ट हाइपरसोनिक मिसाइल लगातार दूसरे टेस्ट में भी फेल हो गई है। इस बार तो यह मिसाइल अपने कैरियर विमान बोइंग बी-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस से सुरक्षित तरीके से लॉन्च भी हो गई। लेकिन, एन मौके पर मिसाइल में लगा रॉकेट इंजन ऑन नहीं हुआ। जिस कारण मिसाइल गोते खाती हुई काफी ऊंचाई से धरती पर आ गिरी। इस मिसाइल के लगातार दो परीक्षणों के विफल होने से अमेरिकी हाइपसोनिक मिसाइल कार्यक्रम को तगड़ा झटका लगा है।
पिछली बार विमान के विंग से अलग ही नहीं हुई थी मिसाइल
टेस्ट की जा रही हाइपरसोनिक मिसाइल का नाम AGM-183A एयर-लॉन्च्ड रैपिड रिस्पांस वेपन (ARRW) है। अप्रैल में इस मिसाइल का पहला परीक्षण आयोजित किया गया था। तब यह मिसाइल कैलिफोर्निया के एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस से उड़ान भरने वाले बी-52 विमान के विंग से रिलीज ही नहीं हो सकी थी। जिसके बाद विमान की सकुशल लैंडिंग करवा ली गई थी। अमेरिकी वायु सेना ने दावा किया है कि इस असफल प्रक्षेपण ने अभी भी मूल्यवान परीक्षण डेटा प्रदान किया है।

बी-52 बमवर्षक

28 जुलाई को किया गया था दूसरा टेस्ट
अमेरिकी वायु सेना ने टेस्ट रिजल्ट की घोषणा करते हुए बताया कि यह परीक्षण 28 जुलाई को दक्षिणी कैलिफोर्निया के तट पर प्रशांत महासागर में प्वाइंट मुगु सी रेंज पर हुआ था। वायु सेना ने पहले ही बताया था कि वह जुलाई के आखिरी हफ्ते में इस मिसाइल के दूसरे टेस्ट को आयोजित करने जा रही है। इस टेस्ट में भी कैलिफोर्निया के एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर तैनात 419वीं फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन और ग्लोबल पावर बॉम्बर कंबाइंड टेस्ट फोर्स ने हिस्सा लिया।

रॉकेट मोटर ऑन न होने से फेल हुआ मिशन
वायु सेना ने बताया कि टेस्ट के दौरान मिसाइल विमान के विंग से अच्छे तरीके से अलग हुआ। इस दौरान जीपीएस एक्वाजिशन, विमान से मिसाइल तक पॉवर का ट्रांसफर और पूरी तरीके से अलग होने वाले सभी अनुक्रम सफलतापूर्वक पूरे किए गए। मिसाइल ने फिन ऑपरेशन और डी-कॉन्फ्लेक्शन मनूवर को भी पूरा किया। यह प्रक्रिया बमवर्षक विमान और उसके एयरक्रू के सेफ्टी के लिए जरूरी होता है। विमान से सफलतापूर्वक अलग होने के बाद मिसाइल का रॉकेट मोटर प्रज्वलित नहीं हो पाया।


आवाज से 20 गुना तेज उड़ने वाली मिसाइल बनाने की तैयारी
इस नई मिसाइल को एजीएम -183 ए एयर-लॉन्च रैपिड रिस्पॉन्स वेपन (एआरआरडब्ल्यू) कहा जाता है। संभावना जताई जा रही है कि अगले कुछ समय में इसे एयरफोर्स में कमीशन किया जा सकता है। इस परीक्षण को मिसाइल की क्षमता को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से किया गया था ताकि हाइपरसोनिक स्पीड प्राप्त की जा सके। पेंटागन इस मिसाइल के जरिए आवाज की रफ्तार से 20 गुना तेज चलने वाली मिसाइल को बनाने पर काम कर रहा है।

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अमेरिका को चीन की DF-17 मिसाइल से है खतरा
अमेरिका को चीन की डीएफ-17 हाइपरसोनिक मिसाइल से खतरा है। इस कारण वह अपनी मिसाइल डिफेंस टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने की कोशिशों में जुटा है। यह हाइपरसोनिक मिसाइल लंबी दूरी तक सटीक निशाना लगाने में माहिर है। ऐसे में अगर चीन हमला करता है तो अमेरिका को गुआम या जापान में मौजूद अपने बेस की सुरक्षा के लिए तगड़े इंतजाम करने पड़ेंगे। चीन की DF-17 मिसाइल 2500 किलोमीटर दूर तक हाइपरसोनिक स्पीड से अपने लक्ष्य को भेद सकती है। टेस्ट के फेल होने के बाद भी


क्या होती हैं हाइपरसोनिक मिसाइलेंहाइपरसोनिक मिसाइल आवाज की रफ्तार (1235 किमी प्रतिघंटा) से कम से कम पांच गुना तेजी से उड़ान भर सकती है। ऐसी मिसाइलों की न्यूनतम रफ्तार 6174 किमी प्रतिघंटा होती है। ये मिसाइलें क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइल दोनों के फीचर्स से लैस होती हैं। लॉन्चिंग के बाद यह मिसाइल पृथ्वी की कक्षा से बाहर चली जाती है। जिसके बाद यह टारगेट को अपना निशाना बनाती है। तेज रफ्तार की वजह से रडार भी इन्हें पकड़ नहीं पाते हैं।

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