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अमेरिका की पाक को दो-टूक, आतंक के खिलाफ कार्रवाई पर ही सुधरेंगे रिश्ते

अमेरिकी अधिकारी ने यह कह कर इस्लामाबाद के दावे की हवा निकाल दी है कि पाकिस्तान से अमेरिकी रिश्ते की सुधार की यह शर्त है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लगातार ठोस कार्रवाई करे।

भाषा 2 Aug 2019, 5:59 pm
वॉशिंगटन
नवभारतटाइम्स.कॉम IMRAN

प्रधानमंत्री इमरान खान की यात्रा को सफल बताने के पक्ष में पाकिस्तान ने यह तर्क दिया था कि इस बार अमेरिका ने रिश्ते को सुधारने के लिए यह शर्त नहीं लगाई है कि 'पाकिस्तान को कुछ और प्रयास करने होंगे।' लेकिन, एक अमेरिकी अधिकारी ने यह कह कर इस दावे की हवा निकाल दी है कि पाकिस्तान से अमेरिकी रिश्ते की सुधार की यह शर्त है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लगातार ठोस कार्रवाई करे।

'जियो न्यूज' ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका से रिश्ते बेहतर करने के लिए पाकिस्तान को अपनी जमीन पर आतंकवादियों के खिलाफ लगातार और ठोस कार्रवाई की शर्त से बांध दिया है। रिपोर्ट में बताया है कि अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक स्पेशल ब्रीफिंग में कहा, 'पाकिस्तान ने फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के तहत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से कुछ प्रतिबद्धताएं की हैं। उसने टेरर फंडिंग रोकने और आतंकी व चरमपंथी गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के लिए कई कदम उठाने का वादा किया है।'

अधिकारी ने कहा कि अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के प्रयासों को मानता है, साथ ही उन्होंने जोर दिया कि अमेरिकी प्रशासन उससे अतिरिक्त ठोस और हमेशा के लिए असर छोड़ने वाले कदम उठाने की उम्मीद करता है। इस सिलसिले में एक कार्ययोजना है और हम देखेंगे कि पाकिस्तान क्या कार्रवाई करता है और इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हम पाकिस्तान को किस रूप में मदद कर सकते हैं।

बता दें कि पीएम इमरान खान ने माना था कि 30-40 हजार आतंकी पाकिस्तान में हैं जिन्होंने अफगानिस्तान और पाकिस्तान में लड़ाई लड़ी है। इस संदर्भ में अधिकारी ने कहा कि यह आतंकी बेहद सख्त लोग हैं। यह पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह जरूरी है कि पाकिस्तान सरकार ऐसे कदम उठाए जो इन लोगों और इनके समूहों को धन एकत्र करने से रोक सके। एक सवाल के जवाब में अधिकारी ने कहा कि अमेरिका की किसी और सरकार ने आतंकी समूहों को समर्थन बंद करने के लिए पाकिस्तान पर इससे अधिक दबाव नहीं डाला।

उन्होंने कहा, 'सैन्य सहायता रोक दी गई, नागरिक सहायता घटा दी गई। बीते दो साल में हमारा राजनयिक लहजा बता रहा है कि अमेरिकी प्रशासन इन बातों को कितनी अहमियत देता है जो भारत, उस क्षेत्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए भी साझा अहमियत रखती हैं। लेकिन, जब पाकिस्तान सकारात्मक कदम उठाता है तो हम उसे सकारात्मक कहने और मानने के लिए तैयार हैं।'

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