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कासिम सुलेमानी को मारने को लादेन और बगदादी को ढेर करने से भी अहम क्यों मान रहा अमेरिका

ईरान के बेहद ताकतवर मेजर जनरल कासिम सुलेमानी को ड्रोन हमले में मारने को अमेरिका काफी बड़ी कामयाबी मान रहा है। पश्चिम और मध्य पूर्व एशिया में अपने प्रभुत्व के लिहाज से अमेरिका इसे बेहद अहम मान रहा है।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 4 Jan 2020, 8:58 am

हाइलाइट्स

  • ईरान के बेहद ताकतवर मेजर जनरल कासिम सुलेमानी को ड्रोन हमले में मारने को अमेरिका काफी बड़ी कामयाबी मान रहा है
  • उसका मानना है कि खूंखार आतंकी ओसामा बिन लादेन को ढेर करने से भी यह बड़ी कामयाबी है
  • 'द अटलांटिक' के मुताबिक यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान के साथ अमेरिका अब न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा
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नवभारतटाइम्स.कॉम qasim
जनरल कासिम सुलेमानी
वॉशिंगटन
ईरान के बेहद ताकतवर मेजर जनरल कासिम सुलेमानी को ड्रोन हमले में मारने को अमेरिका काफी बड़ी कामयाबी मान रहा है। पश्चिम और मध्य पूर्व एशिया में अपने प्रभुत्व के लिहाज से अमेरिका इसे बेहद अहम मान रहा है। यहां तक कि उसका मानना है कि खूंखार आतंकी ओसामा बिन लादेन को ढेर करने से भी यह बड़ी कामयाबी है।
प्रतिष्ठित अमेरिकी मैगजीन 'द अटलांटिक' के मुताबिक कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान के साथ अमेरिका अब न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। इराक इनिशिएटिव ऐट अटलांटिक काउंसिल के डायरेक्टर अब्बास काधिम के हवाले से मैगजीन ने लिखा, 'किसी ऐसे शख्स को मार गिराना जिसे पूरी दुनिया में ही आतंकवादी माना जाता हो, एक आसान चीज है। लेकिन ऐसे किसी व्यक्ति को मारना जिसे वह देश आतंकी न मानता हो, जहां वह मौजूद हो तो यह आसान नहीं है।'

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लादेन, बगदादी से भी अहम है सुलेमानी को मारना

अलकायदा का आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन और इस्लामिक स्टेट का चीफ अबू बकर अल-बगदादी हमेशा छिपकर रहते थे और ठिकाने बदलते रहते थे। हालांकि सुलेमानी के साथ ऐसा नहीं था। वह ईरान की सेना के मेजर जनरल थे, जो विदेशी अभियानों में शामिल रहते थे और खुले तौर पर यात्रा करते थे। अमेरिकी थिंकटैंक से ही जुड़े एक और रणनीतिक जानकार ने कहा कि किसी देश की सेना से जुड़े शख्स को मार गिराना अलकायदा और आईएस के खिलाफ अभियान से अलग चीज है।

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इराक में सऊदी अरब और UAE की बढ़ी चिंता
फिलहाल अमेरिका और उसके सहयोगी देश सऊदी अरब और यूएई इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिर ईरान कैसे प्रतिक्रिया देगा। सऊदी अरब और यूएई को इराक में उसकी ओर से टारगेट किया जा सकता है। ऐसे में दोनों ही देशों की नजर अमेरिका पर है कि वह कैसे ईरान के खिलाफ आगे बढ़ता है।

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