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Doomsday Plane: दुनिया में कयामत लाने वाले अमेरिकी डूम्सडे विमान के अधिकारी के पास रिवॉल्वर क्यों? कारण जानिए

अमेरिकी वायु सेना के EC-135C ALCC विमान के बेड़े को डूम्सडे प्लेन के तौर पर तैयार किया गया। इस विमान में सबसे आधुनिक कम्यूनिकेशन सिस्टम लगाए गए, जो हवा से दुनिया के किसी भी कोने में स्थित अमेरिकी कमांड, पनडुब्बियों, युद्धपोतों, लड़ाकू विमानों, स्ट्रैटजिक बॉम्बर्स और मिसाइल बेस से संपर्क कर सकते थे।

Curated byप्रियेश मिश्र | नवभारतटाइम्स.कॉम 2 Sep 2022, 8:49 pm

हाइलाइट्स

  • अमेरिकी डूम्सडे विमान में रिवॉल्वर से लैस अधिकारी को लेकर हो रही चर्चा
  • दुनिया के किसी भी हिस्से में तबाही मचा सकता है अमेरिका का डूम्सडे प्लेन
  • आधुनिक कम्यूनिकेशन सिस्टम से लैस है विमान, परमाणु हमले का दे सकता है आदेश
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नवभारतटाइम्स.कॉम US Doomsday Plane
अमेरिकी डूम्सडे विमान
वॉशिंगटन: अमेरिका का डूम्सडे प्लेन हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। यह विमान दरअसल एक एयरबोर्न कमांड पोस्ट है, जो तबाही के वक्त कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के तौर पर काम कर सकता है। इसमें लगे अत्याधुनिक कम्यूनिकेशन सिस्टम और दूसरे उपकरणों के जरिए पूरी दुनिया को ही तबाह किया जा सकता है। हालांकि, डूम्सडे प्लेन ऐसा आदेश तभी दे सकता है, जब पूरा का पूरा अमेरिका परमाणु बम, शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स या दूसरे महाविनाशक हथियारों के हमलों में तबाह हो चुका हो। डूम्सडे प्लेन के इतने शक्तिशाली होने के कारण इसकी सुरक्षा भी काफी कड़ी होती है। इसमें नियुक्त अधिकारी अमेरिका के सबसे अनुभवी सैन्य अधिकारी होते हैं। इसके बावजूद इस विमान के चीफ के पास हमेशा एक रिवॉल्वर होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जो विमान दुनिया को बर्बाद कर सकता है, उसे ऐसा क्या डर है कि एक अधिकारी हमेशा रिवॉल्वर से लैस होता है।
अमेरिका ने क्यों बनाया डूम्सडे प्लेन
द ड्राइव की रिपोर्ट के अनुसार, शीत युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना का एयरबोर्न लॉन्च कंट्रोल सेंटर (एएलसीसी) मिशन लॉन्च किया था। इसे ऑपरेशन लुकिंग ग्लास कहा जाता था। उस समय सोवियत संघ के खतरों को देखते हुए ऐसे मिशन का संचालन करना अमेरिका के लिए रणनीतिक अनिवार्यता बन गई थी। अमेरिका को डर था कि अगर दुश्मन देश की तरफ से उसके ऊपर परमाणु हथियारों से लैस बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया गया तो उसे जवाब देने के लिए एक ऐसा कमांड और कंट्रोल सेंटर होना चाहिए, जिस पर ऐसे हथियारों का प्रभाव न हो। अगर दुश्मन की मिसाइलों से जमीन पर मौजूद कमांड सेंटर ही नष्ट हो जाता है तो जवाबी कार्रवाई की क्षमता ही खत्म हो जाएगी। यही कारण था कि अमेरिका ने डूम्सडे प्लेन निर्माण करने की आधारशिला रखी।


क्या काम करता है यह विमान
इस कारण अमेरिकी वायु सेना के EC-135C ALCC विमान के बेड़े को डूम्सडे प्लेन के तौर पर तैयार किया गया। इस विमान में सबसे आधुनिक कम्यूनिकेशन सिस्टम लगाए गए, जो हवा से दुनिया के किसी भी कोने में स्थित अमेरिकी कमांड, पनडुब्बियों, युद्धपोतों, लड़ाकू विमानों, स्ट्रैटजिक बॉम्बर्स और मिसाइल बेस से संपर्क कर सकते थे। इतना ही नहीं, इनका कमांड अमेरिकी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या कार्यवाहक राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में अंतिम माना जाता। इस विमान में हमेशा एक अधिकारी को रिवाल्वर के साथ तैनात रखा जाता है। जो क्रू के बाकी सदस्यों के साथ ही काम करता है। इस विमान की ताकत को देखते हुए अधिक संख्या में सुरक्षाकर्मियों को नहीं रखा जा सकता और ना ही अधिकारियों को ही बड़े हथियार या रायफल सौंपे जा सकते हैं।

विमान में एक ही अधिकारी के पास रिवॉल्वर क्यों
अमेरिकी विमानन इतिहासकार और डू्म्सडे प्लेन में काम कर चुके रॉबर्ट हॉपकिंस ने सी-135 और इसके कई वेरिएंट्स पर किताबें लिखी हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारी के पास एक रिवॉल्वर पहले के कुछ समय तक एक सुरक्षा उपाय के तौर पर रहती थी। हॉपकिंस ने कहा कि कमांडर और ऑपरेशन ऑफिसर के पास कई टॉप सीक्रेट कोड, डाक्यूमेंट्स और दूसरी जानकारियां होती थी। ऐसे में उनमें से एक अधिकारी को रिवॉल्वर से लैस किया गया, जिससे किसी दुष्ट क्रू मेंबर की पहुंच ऐसे डॉक्यूमेंट्स तक न हो जाए। विमान के अंदर अगर रिवॉल्वर के अलावा दूसरे हथियार को रखा जाता तो उससे ज्यादा तबाही मच सकती थी। इस कारण सिर्फ छोटे हथियार को ही प्राथमिकता दी गई। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में इसमें भी कई बड़े बदलाव आ चुके हैं।
लेखक के बारे में
प्रियेश मिश्र
नवभारत टाइम्स डिजिटल में डिजिटल कंटेंट राइटर। पत्रकारिता में दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला जैसी संस्थाओं के बाद टाइम्स इंटरनेट तक 5 साल का सफर जो इंदौर से शुरू होकर एनसीआर तक पहुंचा है पर दिल गौतम बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर और गोरक्षनाथ की धरती गोरखपुर में बसता है। देश-विदेश, अंतरराष्ट्रीय राजनीति/कूटनीति और रक्षा क्षेत्र में खास रुचि। डिजिटल माध्यम के नए प्रयोगों में दिलचस्पी के साथ सीखने की सतत इच्छा।... और पढ़ें

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