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बांग्लादेश में रोहिंग्या कैंप पर बरसाईं ताबड़तोड़ गोलियां, सात लोगों ने गंवाई जान

Bangladesh: म्यांमार से लाखों की संख्या में रोहिंग्या भागकर बांग्लादेश आ गए थे। इनमें से कई भारत में भी मौजूद हैं जो सीमावर्ती इलाकों के पास अस्थायी आवास बनाकर रहते हैं। बांग्लादेश के सबसे बड़े रोहिंग्या कैंप में 10 लाख शरणार्थी रहते हैं।

Curated byयोगेश मिश्रा | नवभारतटाइम्स.कॉम 22 Oct 2021, 1:32 pm
ढाका
नवभारतटाइम्स.कॉम Bangladesh
रोहिंग्या कैंप (फाइल फोटो)

बांग्लादेश के एक रोहिंग्या शरणार्थी कैंप पर शुक्रवार को कुछ अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया। हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं जिसमें करीब 7 लोगों की मौत हो गई। बांग्लादेश पुलिस के हवाले से न्यूज एजेंसी एएफपी ने इसकी जानकारी दी। हमले के बाद चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि तीन लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

स्थानीय अखबार ढाका ट्रिब्यून के अनुसार हमला कैंप में बने मदरसे पर हुआ। हमला सुबह चार बजे के आसपास हुआ। एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि उखिया में कैंप नंबर 18 के ब्लॉक एच-52 में बने मदरसे पर कुछ अनजान लोगों ने सुबह तड़के गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। शुरुआत में अनुमान लगाया गया कि यह हमला दरअसल दो रोहिंग्या समूहों के बीच संघर्ष के तहत हुआ जो एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं।

एक हमलावर को किया गया गिरफ्तार
उखिया के एसपी शिहाब कैसर ने मीडिया से बात करते हुए हमले के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि हमले के बाद चार लोगों की मौत हो गई जबकि तीन घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। खबरों के मुताबिक एक हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया है जिसके पास से बंदूक और गोला बारूद मिला है। वहीं अन्य की तलाश जारी है।

म्यांमार से भागकर आए रोहिंग्याबांग्लादेश में रोहिंग्याओं के कई शरणार्थी कैंप हैं। इनमें सबसे बड़ा कैंप कॉक्स बाजार में स्थित है जिसमें लगभग 10 लाख शरणार्थी रहते हैं। ये चार साल पहले पड़ोसी देश म्यांमार से भागकर यहां आए थे। 2017 में म्यांमार की सेना ने रोहिंग्याओं के खिलाफ अभियान चलाते हुए कार्रवाई की थी। रोहिंग्या मुसलमान हैं जबकि म्यांमार एक बौद्ध बहुल देश है। कई रोहिंग्या भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं।
लेखक के बारे में
योगेश मिश्रा
योगेश नवभारत टाइम्स डिजिटल में पत्रकार हैं और अंतरराष्ट्रीय खबरें आप तक पहुंचाते हैं। इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआती पढ़ाई यानी ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से की और पोस्ट ग्रेजुएशन बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (लखनऊ) से किया। पत्रकारिता में अनुभव अब पांच साल के पड़ाव को पार कर चुका है। खबरों से इतर योगेश को साहित्य में गहरी दिलचस्पी है। योगेश का मानना है कि पत्रकारिता भी साहित्य की एक विधा है जैसे रेखाचित्र या संस्मरण।... और पढ़ें

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