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Chinese Naval Base: कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे को तेजी से डेवलप कर रहा चीन, जानें भारत के अंडमान से कितनी है दूरी?

Ream Naval Base China: चीन ने कंबोडिया के रीम नेवल बेस को डेवलप करने के काम को तेज कर दिया है। चीनी कंपनियां नेवल बेस के आसपास के इलाकों को गहरा कर रही हैं। इससे बड़े-बड़े युद्धपोत इस नेवल बेस तक पहुंच सकते हैं। जानिए इस नेवल बेस से भारत को कितना खतरा हो सकता है...

Curated byप्रियेश मिश्र | नवभारतटाइम्स.कॉम 23 Jan 2022, 9:08 pm

हाइलाइट्स

  • कंबोडिया के रीम नेवल बेस को सैन्य इस्तेमाल के लिए डेवलप कर रहा चीन
  • कंबोडिया में चीनी नौसेनिक अड्डे को लेकर अमेरिका ने भी जताई चिंता
  • भारत के अंडमान-निकोबार से काफी नजदीक है चीन का रीम नेवल बेस
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चीनी नौसेना के युद्धपोत
नोम पेन: एशिया में प्रभुत्व कायम करने मे जुटा चीन कंबोडिया में नौसैनिक अड्डे को तेजी से बना रहा है। हाल की सैटेलाइट इमेज से पता चला है कि चीनी कंपनिया रीम नौसैनिक अड्डे के आसपास समुद्री किनारों को गहरा कर रही हैं। इससे बड़े-बड़े युद्धपोत और पनडुब्बियां आसानी से नौसैनिक अड्डे पर आ सकती हैं। वहीं, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कंबोडिया में चीनी नौसेनिक अड्डे से भू-राजनीतिक तनाव पैदा हो सकता है। कंबोडिया में रीम नौसैनिक अड्डे को अमेरिका ने बनाया था। बाद में करार खत्म होने के बाद कंबोडिया ने इस अड्डे को चीन को सौंप दिया था। भारत के अंडमान से इस नौसैनिक अड्डे की दूरी 1200 किलोमीटर के आसपास है।
निक्केई एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कंपनियां रीम नेवल बेस के पास के समुद्री इलाके को गहरा कर रही हैं। इससे पूर्वी एशिया में चीनी नौसेना को एक बड़ी बढ़त मिलने की आशंका है। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की एशिया मैरीटाइम ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव ने शनिवार को रीम नेवल बेस की 16 जनवरी को ली गई एक सैटेलाइट तस्वीर जारी किया था। इन तस्वीरों में रीम के तट पर दो क्लैमशेल ड्रेजर दिखाई दे रहे हैं, जिसमें समुद्र से निकाली गई रेत को इकट्ठा करने के लिए बार्ज भी नजर आ रहा है।

कंबोडियाई रक्षा मंत्री की तस्वीर में भी दिखे थे जहाज
इस साल 18 जनवरी को थाईलैंड की खाड़ी में साइट का दौरा करने वाले कंबोडियाई राष्ट्रीय रक्षा मंत्री चाय बान के फेसबुक पर अपलोड की गई एक तस्वीर में भी जहाज दिखाई दे रहे थे। चीन रीम नौसैनिक अड्डे को डेवलप करने के लिए फंडिंग कर रहा है। इसमें बंदरगाह का विस्तार और एक शिप रिपेयर फैसिलिटी का डेवलपमेंट भी शामिल है। दूसरी ओर अमेरिका ने चिंता जताई है कि चीन इस नौसैनिक अड्डे का इस्तेमाल सैन्य जरूरत को पूरा करने के लिए कर सकता है।

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2019 में चीन और कंबोडिया ने किया था समझौता
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में कंबोडिया और चीन ने रीम नेवल बेस को लेकर समझौता किया था। इसमें चीन को अगले 30 सालों तक चीन को रीम नौसैनिक अड्डे के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी। पिछले साल जून में अमेरिकी उप विदेश मंत्री वेंडी शेरमेन ने रीम में दो अमेरिकी फैसिलिटी को बिना किसी पूर्व सूचना के ध्वस्त किए जाने पर कंबोडिया से स्पष्टीकरण मांगा था। उन्होंने कंबोडियन नौसैनिक अड्डे पर चीन की कथित सैन्य उपस्थिति के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की थी। कंबोडियाई रक्षा मंत्री टी बान ने इस बात पर जोर देते हुए जवाब दिया कि वे कोई तार नहीं जोड़ रहे बल्कि चीन के साथ उनके देश का रिश्ता प्राकृतिक है।

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कंबोडिया ने अमेरिकी मिलिट्री अताशे को बेस पर रोका
जून में ही अमेरिका और कंबोडिया के बीच एक राजनयिक विवाद भी हुआ था। दरअसल, चीन की उपस्थिति और अमेरिकी निर्माण को गिराए जाने की खबर के बाद यूएस डिफेंस अताशे कर्नल मार्कस एम फेरारा कंबोडियाई अधिकारियों के साथ रीम नेवल बेस तक गए थे लेकिन उन्हें अंदर तक पूर्ण पहुंच नहीं दी गई जिससे उन्हें अपना दौरा छोटा करना पड़ा। वे पूरा बेस देखना चाहते थे, लेकिन कंबोडियाई अधिकारियों ने उन्हें मना कर दिया।

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कंबोडिया में चीन ने किया है 10 अरब डॉलर का निवेश
कंबोडिया पर कब्जा करने की नीयत से चीन साल 2017 से भारी निवेश कर रहा है। वर्तमान समय में चीन ने कंबोडिया में लगभग 10 अरब डॉलर का निवेश किया है। इतनी बड़ी राशि को चुकाने में कंबोडिया जैसा गरीब देश नाकाम हो गया है। इसी के कारण उसने चीन की बात मानते हुए रीम नेवल बेस को गिरवी रख दिया है। वहीं, चीन पहले की ही तरह इस बात से इनकार कर रहा है कि उसने कर्ज के जाल में फंसाकर कंबोडिया से यह पोर्ट हासिल किया है।
लेखक के बारे में
प्रियेश मिश्र
नवभारत टाइम्स डिजिटल में डिजिटल कंटेंट राइटर। पत्रकारिता में दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला जैसी संस्थाओं के बाद टाइम्स इंटरनेट तक 5 साल का सफर जो इंदौर से शुरू होकर एनसीआर तक पहुंचा है पर दिल गौतम बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर और गोरक्षनाथ की धरती गोरखपुर में बसता है। देश-विदेश, अंतरराष्ट्रीय राजनीति/कूटनीति और रक्षा क्षेत्र में खास रुचि। डिजिटल माध्यम के नए प्रयोगों में दिलचस्पी के साथ सीखने की सतत इच्छा।... और पढ़ें

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