ऐपशहर

China: जीरो कोविड नीति को लेकर पागलपन की कगार पर चीन! क्या बच्चे-क्या जानवर सभी को 'प्लास्टिक बैग' में किया बंद

Shanghai Lockdown Crisis: पांच हफ्तों से घरों में कैद लोग मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। बालकनियों पर खड़े लोग गाना गाकर और चिल्लाकर अपना विरोध दर्ज कर रहे हैं।

Curated byयोगेश मिश्रा | नवभारतटाइम्स.कॉम 23 Apr 2022, 4:06 pm
बीजिंग : चीन के सबसे बड़े शहर शंघाई में 22 अप्रैल कोरोना के चलते 12 लोगों की मौत हो गई। एक दिन पहले यह आंकड़ा 11 था। सुनने में भले यह आंकड़ा छोटा लगे लेकिन देश में इसका असर बेहद बड़ा हो रहा है। करीब पांच हफ्तों से लगा लॉकडाउन अब और ज्यादा सख्त होने जा रहा है। शुरुआत में लॉकडाउन सिर्फ कुछ इलाकों में लगा था जो अब पूरे शहर में फैल चुका है। शुरुआत में कुछ ढील देने के बाद सख्त नियमों में करोड़ों लोगों को घरों में कैद कर दिया। लोग भूख से तड़प रहे हैं, कोरोना के खौफ में जी रहे हैं, खिड़कियों और बालकनियों से चिल्ला रहे हैं, पुलिस से भिड़ रहे हैं और जीवनयापन के बेहद मामूली स्तर के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके सामने खड़ी है चीन की बेहद कठोर जीरो कोविड पॉलिसी।
नवभारतटाइम्स.कॉम china zero covid policy photos of shanghai lockdown pets in plastic bags kids going to school in ppe kit people starving to death
China: जीरो कोविड नीति को लेकर पागलपन की कगार पर चीन! क्या बच्चे-क्या जानवर सभी को 'प्लास्टिक बैग' में किया बंद



मरने वालों के नहीं लगी थी वैक्सीन

महामारी की शुरुआत से अब तक चीन में कोरोना अपने सबसे भयानक रूप में सामने आया है। शुक्रवार को शंघाई में बिना लक्षण वाले 20,634 मामले सामने आए। एक दिन पहले यह आंकड़ा 15,698 था। वहीं लक्षण वाले कुल मामले गुरुवार को 1931 से बढ़कर शनिवार को 2736 हो गए। मरने वालों की औसत उम्र 88 दर्ज की गई है। सभी को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं और किसी के भी वैक्सीन नहीं लगी थी। खबरों की मानें तो कोरोना के ओमीक्रोन स्वरूप का एक नया सब-वेरिएंट इस प्रकोप के लिए जिम्मेदार है जो मूल स्वरूप से अधिक संक्रामक है।

न खाना, न दवाई...बालकनी से कर रहे प्रदर्शन

अप्रैल की शुरुआत में लॉकडाउन ने पूरे शंघाई को अपनी ज़द में ले लिया था। इसके बाद से करोड़ों लोग अपने घरों में कैद हैं। कुल 30 दिनों से अधिक के लॉकडाउन के बाद भी मामले कम नहीं हो रहे हैं। इतने दिनों से घरों में कैद लोग मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। बालकनियों पर खड़े लोग गाना गाकर और चिल्लाकर अपना विरोध दर्ज कर रहे हैं। वे मजबूर हैं क्योंकि उनके पास अब न खाना बचा है और न ही दवाइयां और कोई भी सामान लेने के लिए वे बाहर नहीं जा सकते है।

पीपीई किट पहनकर स्कूल जा रहे बच्चे

द सन की एक खबर के मुताबिक सोशल मीडिया पर शेयर किए एक वीडियो में छोटे-छोटे बच्चे पीपीई सूट पहनकर स्कूल जाते दिखाई पड़ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो शंघाई का है। वीडियो में दुनिया के सबसे सख्त लॉकडाउन के बीच बच्चों की कतार देखी जा सकती है। छोटे-छोटे बच्चे सिर से लेकर पांव तक पीपीई किट पहने हुए हैं और उनके हाथ में बैग है। यह दिखाता है कि चीन अपनी जीरो कोविड नीति को लेकर किस हद तक सख्त है।

प्लास्टिक बैग में जानवरों को किया कैद

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक दूसरे वीडियो में कुछ पालतू जानवरों को प्लास्टिक बैग में कैद देखा जा सकता है। इस वीडियो को 10 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं। वीडियो में कुत्ते और बिल्ली से भरे बैग फुटपाथ पर पड़े दिखाई दे रहे हैं। शहर में पुलिस कथित तौर पर उन लोगों के पालतू जानवरों को प्रताड़ित और मौत के घाट उतार रही है, जो कोरोना के टेस्ट में पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। यह वीडियो ट्विटर यूजर @EnesFreedom द्वारा 16 अप्रैल को शेयर किया गया था।

लेखक के बारे में
योगेश मिश्रा
योगेश नवभारत टाइम्स डिजिटल में पत्रकार हैं और अंतरराष्ट्रीय खबरें आप तक पहुंचाते हैं। इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआती पढ़ाई यानी ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से की और पोस्ट ग्रेजुएशन बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (लखनऊ) से किया। पत्रकारिता में अनुभव अब पांच साल के पड़ाव को पार कर चुका है। खबरों से इतर योगेश को साहित्य में गहरी दिलचस्पी है। योगेश का मानना है कि पत्रकारिता भी साहित्य की एक विधा है जैसे रेखाचित्र या संस्मरण।... और पढ़ें

अगला लेख

Worldकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग