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नेपाल को आर्थिक मदद से रिझाने का मुगालता न पाले भारत: चीन

नेपाल के प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा के भारत दौरे और दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार चीन को बिलकुल रास नहीं आ रहा है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक लेख में भारत को चेतावनी दी है कि वह आर्थिक मदद की बदौलत नेपाल को रिझाने और वहां चीन के प्रभाव को कम करने का मुगालता न पाले क्योंकि चीन ने अगर ऐसा किया तो वह कहीं नहीं ठहरेगा।

नवभारतटाइम्स.कॉम 24 Aug 2017, 6:51 pm
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नेपाल के प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा के भारत दौरे और दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार चीन को बिलकुल रास नहीं आ रहा है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक लेख में भारत को चेतावनी दी है कि वह आर्थिक मदद की बदौलत नेपाल को रिझाने और वहां चीन के प्रभाव को कम करने का मुगालता न पाले क्योंकि चीन ने अगर ऐसा किया तो वह कहीं नहीं ठहरेगा।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक देउबा के भारत दौरे पर दोनों देशों के बीच 25 करोड़ डॉलर (करीब 1600 करोड़ रुपये) के कुल 4 मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर दस्तखत होने हैं। चीनी अखबार ने अपने लेख में आगे लिखा है कि चीन और नेपाल के आर्थिक सहयोग को अगर भारत गलत नजरिए से देखता है तो उसे अपने इस छोटे से पड़ोसी देश के समर्थन के लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। लेख में लिखा है कि भारत की अर्थव्यवस्था चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का महज 20 प्रतिशत है, जो नेपाल की मदद की प्रतियोगिता में चीन से मुकाबला जीतने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।

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चीनी अखबार ने लिखा है कि अगर भारत चीन के प्रभाव की काट के लिए अपने पड़ोसी को बड़ी आर्थिक मदद करना चाहता है तो उसे हिचकना नहीं चाहिए। लेख में लिखा गया है कि भारत की आर्थिक मदद से नेपाल को 2015 में आए विनाशकारी भूकंप से निपटने और इन्फ्रस्ट्रक्चर को डिवेलप करने में मदद मिलेगी।

भारत और नेपाल संबंधों में सुधार से चीन की चिढ़ लेख में साफ दिख रही है। लेख में लिखा है, 'नेपाल और चीन के बीच सकारात्मक संबंध स्थापित हो चुके हैं लेकिन लगता है कि नेपाल नई दिल्ली को और ज्यादा रणनीतिक तवज्जो देना चाहता है।

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भारत पर तंज कसते हुए लेख में लिखा है कि अगर नई दिल्ली नेपाल को आर्थिक मदद देने की कोशिश करती भी है तो वह इसमें बहुत ज्यादा सफल नहीं हो पाएगी क्योंकि खुद भारत की अर्थव्यवस्था इस समय लड़खड़ा रही है। लेख में लिखा है कि भारत की अर्थव्यवस्था में अब भी कई ढांचागत समस्याएं हैं। चीनी अखबार ने लिखा है कि मौजूदा हालात में नई दिल्ली नेपाल को आर्थिक मदद के जरिए चीन के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव को काउंटर नहीं कर सकती। लेख में लिखा है कि इस साल मार्च में नेपाल सरकार द्वारा आयोजित नेपाल इन्वेस्टमेंट समिट में चीन ने नेपाल में 8.2 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, 'हालिया सालों में चीन ने नेपाल में काफी निवेश किया और उसकी संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए आर्थिक मदद दी है। लेकिन इंडिया को काउंटर करने के लिए नेपाल को युद्ध के मैदान में तब्दील करने की चीन की कोई योजना नहीं है।' लेख में लिखा है कि भारत को नेपाल की मदद के लिए चीन के साथ त्रिपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए।

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