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क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक के निर्माण को लेकर चीन के संपर्क में नेपाल, ब्रिटेन ने भी बताया स्वाभाविक साझेदार

चीन को अपने 'वन बेल्ट वन रोड' (OBOR) प्रॉजेक्ट पर कई देशों से समर्थन मिलता दिख रहा है। खबर है कि इस प्रॉजेक्ट के तहत चीन से समझौता करने के बाद अब नेपाल एक क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक के निर्माण को लेकर चीन से संपर्क में है...

नवभारतटाइम्स.कॉम 14 May 2017, 3:38 pm
नई दिल्ली
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चीन की ऐंबैसडर के साथ विदेश सचिव शंकर दास बैरागी।

चीन को अपने 'वन बेल्ट वन रोड' (OBOR) प्रॉजेक्ट पर कई देशों से समर्थन मिलता दिख रहा है। खबर है कि इस प्रॉजेक्ट के तहत चीन से समझौता करने के बाद अब नेपाल एक क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक के निर्माण को लेकर चीन से संपर्क में है जिसकी कीमत करीब आठ बिलियन डॉलर (पांच खरब से ज्यादा) बताई जा रही है। रविवार को नेपाल के विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय के एक सचिव युग राज पांडे के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि प्रस्तावित 550 किलोमीटर लंबा यह रेलवे लिंक पश्चिमी चीन को नेपाल की राजधानी काठमांडू से जोड़ेगा जिससे उत्पादों और यात्रियों की आवाजाही होगी।

दो दिन पहले ही OBOR प्रॉजेक्ट पर नेपाल और चीन के बीच औपचारिक समझौता हुआ था। भारत के विरोध के बावजूद उसने चीनी प्रॉजेक्ट में शामिल होने के फैसले को सही ठहराया था। नेपाल के अलावा पाकिस्तान ने भी रविवार को सिल्क समिट आयोजन में इस प्रॉजेक्ट में 550 मिलियन डॉलर (35 अरब रुपये से ज्यादा) के निवेश के समझौते पर हस्ताक्षर किए। OBOR के तहत ही चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) प्रॉजेक्ट में पाकिस्तान चीन के साथ 57 बिलियन डॉलर (करीब 37 खरब रुपये) के मेमोरैन्डम पर हस्ताक्षर कर चुका है।

उधर ब्रिटेन ने भी इस प्रॉजेक्ट को लेकर खुद को चीन का 'स्वाभाविक साझेदार' बताया है। रविवार को समिट में ब्रिटिश वित्त मंत्री फिलिप हैमन्ड ने कहा कि न्यू सिल्क प्रोग्राम में ब्रिटेन चीन का स्वाभाविक साझेदार है और यूरोपियन यूनियन से निकलने के बाद वह दुनियाभर से ज्यादा व्यापार चाहता है। रविवार को शुरू हुए न्यू सिल्क समिट में चीन ने न्यू सिल्क रोड योजना में 80 खरब रुपये के निवेश की घोषणा की और कहा कि इस प्रॉजेक्ट का हिस्सा बनने के लिए वह हर देश का स्वागत करता है।

सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि सभी देशों को एक दूसरे की संप्रभुता और भूभागीय एकता का सम्मान करना चाहिए। बता दें कि भारत ने पाक अधिकृत कश्मीर से हो कर गुजरने वाले इस विवादित आर्थिक गलियारे (कॉरिडोर) को लेकर चिंताओं के चलते इस सम्मेलन का बहिष्कार किया है। अपने उद्घाटन भाषण में चीन के दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए 63 वर्षीय शी ने प्राचीन रेशम मार्ग का संदर्भ दिया और ‘सिंधु तथा गंगा सभ्यताओं सहित’ विभिन्न सभ्यताओं के महत्व पर अपनी बात रखी। CPEC को लेकर भारत की आपत्तियों का संदर्भ दिए बिना शी ने कहा, ‘सभी देशों को एक दूसरे की संप्रभुता, मर्यादा और भूभागीय एकता का, एक दूसरे के विकास के रास्ते का, सामाजिक प्रणालियों का और एक दूसरे के प्रमुख हितों तथा बड़ी चिंताओं का सम्मान करना चाहिए।’

बीजिंग में हो रहे इस सम्मेलन में 29 देशों के नेता शामिल हुए। यहां शी ने कहा कि ‘बेल्ट ऐंड रोड’ पहल सदी की परियोजना है जिससे पूरी दुनिया के लोगों को लाभ होगा। CPEC के हिस्से वाले ‘बेल्ट ऐंड रोड’ पहल में हिस्सा ले रहे देशों का ‘छोटा समूह’ बनाने की कोशिश से इनकार करते हुए शी ने कहा कि चीन की योजना ऐसा मार्ग बनाने की है जो शांति के लिए हो और एशिया, यूरोप तथा अफ्रीका के ज्यादातर हिस्सों से उनके देश को जोड़े।

इस फोरम में 29 देशों और सरकारों के प्रमुखों तथा 100 से अधिक देशों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। फोरम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रेजेप ताइप एर्दवां सहित अन्य ने हिस्सा लिया। अमेरिका ने राष्ट्रपति के विशेष सहायक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में एशिया के लिए वरिष्ठ निदेशक मैट पॉटिंगर की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल भेजा।

इनपुट-भाषा

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