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क्या था थियानमेन चौक नरसंहार जिसकी याद में हॉन्ग कॉन्ग में बनी मूर्ति को चीन ने रातों-रात गायब किया?

हॉन्ग कॉन्ग में हर साल थियानमेन चौक नरसंहार की याद में बड़े पैमाने पर रैली की जाती है। हॉन्ग कॉन्ग विश्वविद्यालय (एचकेयू) की परिषद ने कहा कि उसने बुधवार की बैठक के दौरान मूर्ति को हटाने का निर्णय लिया। यह फैसला बाहरी कानूनी विशेषज्ञों और विश्वविद्यालय के हितों और जोखिमों का मूल्यांकन करने के बाद लिया गया।

Curated byप्रियेश मिश्र | नवभारतटाइम्स.कॉम 23 Dec 2021, 5:24 pm

हाइलाइट्स

  • चीन ने थियानमेन चौक नरसंहार की याद में बनी मूर्ति को हॉन्ग कॉन्ग में उखड़वाया
  • हॉन्ग कॉन्ग के विश्वविद्यालय में लगी थी यह प्रतिमा, प्रशासन बोला- हमारा फैसला था
  • मूर्ति को ट्रक पर लादकर अज्ञात स्थान पर भेजा गया, तैनात थे सशस्त्र गार्ड
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नवभारतटाइम्स.कॉम Hong Kong university 01
मूर्ति निकालते कर्मचारी
बीजिंग
चीन ने हॉन्ग कॉन्ग में चुनाव जीतते ही लोकतंत्र समर्थकों के दमन की कार्रवाइयों को तेज कर दिया है। सरकार के आदेश पर हॉन्ग कॉन्ग के एक यूनिवर्सिटी में थियानमेन चौक नरसंहार की याद में बनी मूर्ति को हटा दिया गया है। चीन में थियानमेन चौक नरसंहार पर खुलकर बात करने पर पाबंदी है। इस मूर्ति को 'पिलर ऑफ शेम' के नाम से भी जाना जाता था। इस मूर्ति को हॉन्ग कॉन्ग में ब्रिटिश उपनिवेश के दौरान बनाया गया था।
विश्वविद्यालय ने कहा- हमने सोच समझकर फैसला किया
हॉन्ग कॉन्ग में हर साल थियानमेन चौक नरसंहार की याद में बड़े पैमाने पर रैली की जाती है। हॉन्ग कॉन्ग विश्वविद्यालय (एचकेयू) की परिषद ने कहा कि उसने बुधवार की बैठक के दौरान मूर्ति को हटाने का निर्णय लिया। यह फैसला बाहरी कानूनी विशेषज्ञों और विश्वविद्यालय के हितों और जोखिमों का मूल्यांकन करने के बाद लिया गया। एचकेयू परिषद ने अनुरोध किया है कि मूर्ति को स्टोर में रखा जाए और विश्वविद्यालय को किसी भी उचित कार्रवाई पर कानूनी सलाह लेना जारी रखना चाहिए।


हथियारबंद गार्डों की निगरानी में मजदूरों ने मूर्ति को निकाला
बुधवार की देर रात, सुरक्षा गार्डों ने आठ मीटर (26 फुट) ऊंची, दो टन तांबे की मूर्ति के चारों ओर लगे पीले रंग के बैरिकेड्स लगा दिए थे। रॉयटर्स के पत्रकारों ने बताया कि उन्होंने घटनास्थल पर सेफ्टी कैप पहने कई कर्मचारियों को काम करते हुए देखा था। उन्होंने मूर्ति को सफेद प्लास्टिक शीट में कवर किया हुआ था। इस दौरान उनकी सुरक्षा के लिए दर्जनों हथियारबंद गार्ड भी तैनात थे।

ट्रक में मूर्ति को रख अज्ञात स्थान पर भेजा गया
गुरुवार तड़के मूर्ति को एक कंटेनर ट्रक में रखकर घटनास्थल से अज्ञात जगह पर भेज दिया गया। उन्होंने मूर्ति वाली जगह को सफेद प्लास्टिक से ढंक दिया था। विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने बाद में बैरिकेड्स के चारों ओर हॉन्ग कॉन्ग में एक लोकप्रिय क्रिसमस सजावट फूल पॉइन्सेटिया को रख दिया था। विश्वविद्यालय ने कुछ महीने पहले प्रतिमा के संरक्षकों को एक कानूनी नोटिस भी भेजा था।


क्या थी थियानमेन चौक की पूरी घटना
जून 1989 में बीजिंग के थियानमेन चौक पर लाखों की संख्या में लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारी इकठ्ठा हुए थे। इसमें बड़ी संख्या में छात्र और मजदूर भी शामिल थे। ये विरोध प्रदर्शन कम्यूनिस्ट पार्टी के पूर्व महासचिव और सुधारवादी हू याओबांग की मौत के बाद शुरू हुए थे। हू याओबांग को चीन की तत्कालीन सरकार ने राजनीतिक और आर्थिक नीतियों में विरोध के कारण पद से हटा दिया था। जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी।

टैंक और गोलियों से लोगों को बनाया गया था निशाना
छह हफ्ते तक चले इस प्रदर्शन को कुचलने के लिए 3-4 जून को चीन की सेना ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों पर बंदूकों और टैंकों से कार्रवाई की। इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मारे गये थे। इस दौरान चीनी सेना के एक टैंक को रोकने की कोशिश करते हुए एक युवक की तस्वीर प्रकाशित होने के बाद यह स्थान पूरी दुनिया में मशहूर हो गया।


कार्रवाई को आज भी सही बताता है चीन
चीन आज भी बीजिंग के ऐतिहासिक थियानमेन चौक नरसंहार को पूरी तरह से सही करार देता है। साथ ही,वह कई बार कह चुका है कि देश को चलाने के लिए उसका समाजवादी राजनीतिक मॉडल सही चुनाव है। पिछले साल चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने इस प्रदर्शन को एक राजनीतिक व्यवधान करार दिया था। उन्होंने कहा था कि हम चीनी विशेषताओं के साथ समाजवाद को जारी रखने के लिये प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने अमेरिका को वैचारिक पूर्वाग्रह दूर रखने, गलतियों को सुधारने और चीन के घरेलू मामलों में किसी भी तरह से दखलअंदाजी रोकने को कहा था।
लेखक के बारे में
प्रियेश मिश्र
नवभारत टाइम्स डिजिटल में डिजिटल कंटेंट राइटर। पत्रकारिता में दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला जैसी संस्थाओं के बाद टाइम्स इंटरनेट तक 5 साल का सफर जो इंदौर से शुरू होकर एनसीआर तक पहुंचा है पर दिल गौतम बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर और गोरक्षनाथ की धरती गोरखपुर में बसता है। देश-विदेश, अंतरराष्ट्रीय राजनीति/कूटनीति और रक्षा क्षेत्र में खास रुचि। डिजिटल माध्यम के नए प्रयोगों में दिलचस्पी के साथ सीखने की सतत इच्छा।... और पढ़ें

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