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कहीं पति को रेप का अधिकार तो कहीं बचपन में निकाह, महिलाओं के लिए 'काल' बन चुके इन देशों के ये कानून

Anti Women Law: रूस दुनिया का एक शक्तिशाली देश है लेकिन यहां का कानून महिलाओं के लिए बेहद कमजोर है। रूस में महिलाओं के खिलाफ होने वाले घरेलू शोषण को अपराध नहीं माना जाता है।

Curated byयोगेश मिश्रा | नवभारतटाइम्स.कॉम 7 Dec 2021, 4:42 pm

हाइलाइट्स

  • दुनिया के कई देशों में 'महिला विरोधी कानूनों' का सामना कर रही महिलाएं
  • अमेरिका में कई जगह रेप के बाद पीड़िता से बच्चे की मांग करने का अधिकार
  • भारत में भी पति से रेप के बाद पत्नी को नहीं मिलता इंसाफ, सूची में शामिल कई देश
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नवभारतटाइम्स.कॉम women empowerment
प्रतीकात्मक फोटो
वॉशिंगटन
दुनिया में ऐसे कई देश हैं जहां 21वीं सदी में भी महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। हालांकि वित्तीय सहायता और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों में अब महिलाएं पुरुषों की बराबरी कर रही हैं। लेकिन दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं का संघर्ष अभी भी जारी है। विडंबना यह है कि अमेरिका और भारत जैसे विकसित और विकासशील देशों में भी कुछ कानून महिलाओं की सबसे बड़ी मुसीबत बने हुए हैं।
पीड़िता से बच्चा मांगने का अधिकार
अमेरिका जैसे विकसित देश में भी महिला विरोधी कानून मौजूद है। यहां कुछ राज्यों में पुरुष रेप के बाद पीड़िता से रेपिस्ट पैरेंटल राइट के तहत बच्चे की मांग कर सकता है। यह कानून मैरीलैंड, अलबामा, मिसिसिपि, मिनेसोटा, नॉर्थ डकोटा, न्यू मैक्सिको की हजारों महिलाओं के लिए सबसे बड़ी मुसीबत है।
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पति का बलात्कार करना जुर्म नहीं
दुनिया के करीब 49 देशों में शादी के बाद अगर पति पत्नी का रेप करता है तो कानून इसे अपराध नहीं मानता। इनमें भारत भी शामिल है जहां समाज भी इस तरह के मामलों के खिलाफ बंटा हुआ नजर आता है। भारत में कानून के तहत रेप जैसे जघन्य अपराध के दोषी को उम्र कैद या फांसी की सजा दी जाती है। लेकिन पति अगर अपनी पत्नी का रेप करता है तो उसके खिलाफ सजा का कोई प्रावधान नहीं है।

विदेश जाने से पहले पति की अनुमति जरूरी
ईरान में महिलाओं को विदेश जाने से पहले अपने पति की अनुमति लेना जरूरी है। यहां के कानून के मुताबिक महिलाओं को विदेश जाने से पहले दस्तावेजों पर पति के हस्ताक्षर करवाने पड़ते हैं।

10 साल की उम्र में शादी वैध
भारत में बाल विवाह एक कानूनी अपराध है लेकिन सूडान में ऐसा नहीं है। यहां 10 साल की उम्र के बाद लड़कियों का शादी करना वैध माना जाता है। यही कारण है कि इस देश में हर तीन में से एक लड़की की शादी 18 साल से कम उम्र में ही हो जाती है, जिससे मासूम लड़कियों का बचपन पूरी तरह से खत्म हो जाता है।

अपराध की कैटेगरी से हटा घरेलू शोषण
रूस दुनिया का एक शक्तिशाली देश है लेकिन यहां का कानून महिलाओं के लिए बेहद कमजोर है। रूस में महिलाओं के खिलाफ होने वाले घरेलू शोषण को अपराध नहीं माना जाता है। संसद ने 2017 में महिलाओं के खिलाफ घरेलू शोषण को अपराध की श्रेणी से हटाने के लिए पक्ष में भारी मतदान किया था। इसके दुष्परिणाम भी देखने को मिलते रहते हैं। आंकड़ों के मुताबिक हर 40 मिनट में एक महिला अपने पति की वजह से जान गंवा देती है।
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सम्मान के नाम पर हत्या करने की छूट
जॉर्डन में आज भी महिलाओं की कथित सम्मान के नाम पर दे दी जाती है। इसका मतलब है कि यहां ऑनर किलिंग वैध है। कानून के मुताबिक अगर परिवार के सम्मान के लिए किसी महिला की हत्या कर दी जाती है तो आरोपी को सजा में छूट मिल सकती है।

नौकरी के लिए पति की मंजूरी अनिवार्यतुर्की में महिलाओं को घर से निकलकर नौकरी करने का अधिकार तो है लेकिन इसके लिए उन्हें अपने पति से अनुमति लेना अनिवार्य है। अगर पति नहीं चाहता तो तुर्की में महिला नौकरी नहीं कर सकती और यही कारण है कि यहां नौकरी के क्षेत्र में महिलाओं की आबादी सिर्फ 29 फीसदी है।
लेखक के बारे में
योगेश मिश्रा
योगेश नवभारत टाइम्स डिजिटल में पत्रकार हैं और अंतरराष्ट्रीय खबरें आप तक पहुंचाते हैं। इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआती पढ़ाई यानी ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से की और पोस्ट ग्रेजुएशन बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (लखनऊ) से किया। पत्रकारिता में अनुभव अब पांच साल के पड़ाव को पार कर चुका है। खबरों से इतर योगेश को साहित्य में गहरी दिलचस्पी है। योगेश का मानना है कि पत्रकारिता भी साहित्य की एक विधा है जैसे रेखाचित्र या संस्मरण।... और पढ़ें

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