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दोस्त तालिबान के खातिर अमेरिका की गुलामी से इमरान खान का इनकार, CIA को नहीं बनाने देंगे किलर ड्रोन का अड्डा

इमरान खान ने कहा कि अफगानिस्तान से अमेरिका की इस साल वापसी के बाद सीआईए को पाकिस्तानी धरती से अपने ऑपरेशन्स को लॉन्च करने की अनुमति 'बिलकुल नहीं' दी जाएगी। पहले कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने अमेरिका को अफगानिस्तान में मिशन संचालित करने के लिए अपने एयरस्पेस के उपयोग की अनुमति दे दी है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 19 Jun 2021, 6:46 pm

हाइलाइट्स

  • अमेरिका को पाकिस्तान में सैन्य अड्डा देने से इमरान का साफ इनकार
  • तालिबान के साथ पाकिस्तान के दोस्ताना संबंधों के कारण लिया फैसला
  • अफगानिस्तान में तालिबान के साथ गुपचुप डील कर रहा है पाकिस्तान
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जो बाइडन और इमरान खान
इस्लामाबाद
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने तालिबान की मदद के लिए अमेरिका के एक बड़े प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। दरअसल, अमेरिका ने इमरान खान से अनुरोध किया था कि वह पाकिस्तान के बलूचिस्तान सूबे में उसे एक सीक्रेट एयरबेस मुहैया करवाएं। इस एयरबेस से अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए अफगानिस्तान में सीक्रेट ड्रोन मिशन को अंजाम देने वाली थी। इसके बदले अमेरिका ने पाकिस्तान को रोकी गई आर्थिक मदद फिर से शुरू करने का लालच भी दिया था। लेकिन, इमरान खान ने अपने दोस्त तालिबान को बचाने के लिए अमेरिका के इस ऑफर को ठुकरा दिया है।
इमरान बोले- अमेरिका को अनुमति 'बिलकुल नहीं'
अमेरिकी न्यूज वेबसाइट Axios को दिए इंटरव्यू में इमरान खान ने कहा कि अफगानिस्तान से अमेरिका की इस साल वापसी के बाद सीआईए को पाकिस्तानी धरती से अपने ऑपरेशन्स को लॉन्च करने की अनुमति 'बिलकुल नहीं' दी जाएगी। पहले कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने अमेरिका को अफगानिस्तान में मिशन संचालित करने के लिए अपने एयरस्पेस के उपयोग की अनुमति दे दी है। इस खबर के बाद पाकिस्तान में बवाल मच गया था। यही कारण है कि इमरान सरकार ने तुरंत इस फैसले को बदलते हुए अमेरिका को एयरबेस देने से इनकार कर दिया था।


रक्षा मंत्री और सीआईए डायरेक्ट का दौरा भी नहीं आया काम
पाकिस्तान को एयरबेस देने के लिए मनाने के वास्ते अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और खुफिया एजेंसी सीआईए के डायरेक्टर विलियम बर्न्स ने इस्लामाबाद का तबाड़तोड़ दौरे किए थे। इसके बावजूद तालिबान के साथ अपने करीबी संबंधों के कारण पाकिस्तान ने एयरबेस को देने से साफ इनकार कर दिया। आशंका जताई जा रही है कि इमरान के इस इनकार से पाकिस्तान और अमेरिका के बीच संबंध और खराब हो सकते हैं।

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जिनेवा में अमेरिकी एनएसए से गुपचुप मिले थे पाक एनएसए
मई के अंतिम हफ्ते में पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुईद यूसुफ अमेरिका के एनएसए जैक सुलिवान से जिनेवा में मुलाकात की थी। इस दौरान मुईद यूसुफ ने अमेरिकी एनएसए जैक सुलिवान से पाकिस्तान और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों को सुरक्षा और रक्षा पर नहीं बल्कि, अर्थव्यवस्था और व्यापार के आधार पर बढ़ाने की वकालत की थी। हालांकि, दोनों ही अधिकारियों ने यह नहीं बताया था कि क्या इस एयरबेस को लेकर कोई बातचीत हुई थी कि नहीं।

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पाकिस्तान के साथ अमेरिका का था सैन्य समझौता
9/11 हमले के बाद अमेरिकी सेना ने तालिबान से बदला लेने के लिए पाकिस्तान के दो हवाई अड्डों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। दरअसल, अमेरिका को अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों के लिए पाकिस्तान के हवाई और जमीनी क्षेत्रों की जरूरत पड़ रही थी। यही कारण था कि दोनों देशों ने तब एएलओसी और जीएलओसी समझौता किया था। एएलओसी समझौते से अमेरिका पाकिस्तान के दो एयरबेस का इस्तेमाल करता था जबकि जीएलओसी से वह पाकिस्तानी जमीन का इस्तेमाल सैन्य अभियानों के लिए करता था।

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पाकिस्तान के दो हवाई अड्डों का इस्तेमाल करता था अमेरिका
अमेरिका ने अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों के लिए पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित शम्सी एयर बेस और सिंध के जैकोबाबाद में स्थित शहबाज एयर बेस का खूब इस्तेमाल किया है। जैकोबाबाद के अड्डे से अमेरिकी लड़ाकू विमान उड़ान भरते थे, जबकि शम्सी से ड्रोन ऑपरेशन को अंजाम दिया जाता था। ये दोनों एयरबेस को पाकिस्तान ने साल 2011 तक खाली करवा लिया था। अब अमेरिकी वायु सेना इन एयरबेस का इस्तेमाल नहीं करती है।

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